सरकार की असंवेदनशीलता इन मौतों की वजह है

अभी तक डेंगू के ऊपर सरकार कारगर ढंग से कोई कार्रवाई नहीं कर पाई है. जैसे डेंगू की दवाएं, प्लेटलेट्‌स

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युवा पीढ़ी अर्थहीन सरकारी प्रतिबंध बर्दाश्त नहीं करती

डेंगू मच्छर का अचानक इतना आतंक हो जाना चिंता की बात है. किसी ने भी यह उम्मीद नहीं की थी

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डॉक्टरों को क्यों करनी पड़ती है हड़ताल

डॉक्टरों ने अपनी असुरक्षा का मसला तो उठाया ही साथ ही जीवनरक्षक दवाओं, जांच और इलाज के लिए जरूरी तमाम

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स्वाइन फ्लू : डरें नहीं इलाज और बचाव आसान है

स्वाइन फ्लू श्‍वसन तंत्र से जुड़ी बीमारी है, जो ए टाइप के इनफ्लुएंजा वायरस से होती है. यह वायरस एच1

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नसबंदी कांड : महिलाओं की मौत का जिम्मेदार कौन

पिछले दिनों छत्तीसगढ़ के बिलासपुर जिले में कैंप लगाकर किए गए नसबंदी कार्यक्रम में कुल 17 महिलाओं की मौत ने

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समय पर जानकारी बचा सकती है जान

आज के भाग-दौड़ भरे जीवन में हर चीज पा लेने की जल्दबाजी के चलते हम स्वास्थ्य को पीछे छोड़ते जा

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सरकारी अस्पताल में दवाई नहीं मिलती

देश के कुछ राज्यों में सरकारी अस्पताल का नाम लेते ही एक बदहाल सी इमारत की तस्वीर जेहन में आ

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ज़रा हट के

    सांप और छिपकली खाकर 19 दिन तक ज़िंदा रहा मनुष्यों को जिंदा रहने के लिए ऊर्जा की ज़रूरत

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दवा कंपनियां, डॉक्‍टर और दुकानदार: आखिर इस मर्ज की दवा क्‍या है

दवा, डॉक्टर एवं दुकानदार के प्रति भोली-भाली जनता इतना विश्वास रखती है कि डॉक्टर साहब जितनी फीस मांगते हैं, दुकानदार जितने का बिल बनाता है, को वह बिना किसी लाग-लपेट के अपना घर गिरवी रखकर भी चुकाती है. क्या आप बता सकते हैं कि कोई घर ऐसा है, जहां कोई बीमार नहीं पड़ता, जहां दवाओं की ज़रूरत नहीं पड़ती? यानी दवा इस्तेमाल करने वालों की संख्या सबसे अधिक है. किसी न किसी रूप में लगभग सभी लोगों को दवा का इस्तेमाल करना पड़ता है, कभी बदन दर्द के नाम पर तो कभी सिर दर्द के नाम पर.

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फर्रु़खाबाद को अब धोखा बर्दाश्त नहीं

अरविंद केजरीवाल फर्रु़खाबाद गए भी और दिल्ली लौट भी आए. सलमान खुर्शीद को सद्बुद्धि आ गई और उन्होंने अपनी उस धमकी को क्रियान्वित नहीं किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि केजरीवाल फर्रु़खाबाद पहुंच तो जाएंगे, लेकिन वापस कैसे लौटेंगे. इसका मतलब या तो अरविंद केजरीवाल के ऊपर पत्थर चलते या फिर गोलियां चलतीं, दोनों ही काम नहीं हुए.

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लोकतंत्र के साथ खिलवाड़ मत कीजिए

सरकार का संकट उसकी अपनी कार्यप्रणाली का नतीजा है. सरकार काम कर रही है, लेकिन पार्टी काम नहीं कर रही है और हक़ीक़त यह है कि कांग्रेस पार्टी की कोई सोच भी नहीं है, वह सरकार का एजेंडा मानने के लिए मजबूर है. सरकार को लगता है कि उसे वे सारे काम अब आनन-फानन में कर लेने चाहिए, जिनका वायदा वह अमेरिकन फाइनेंसियल इंस्टीट्यूशंस या अमेरिकी नीति निर्धारकों से कर चुकी है.

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कब्रों का कारोबार

हिंदुस्तान पर हुकूमत करने वाले अनेकानेक राजा-महाराजाओं और नवाबों को लोग आज सैकड़ों वर्षों बाद भी भूल नहीं पाए हैं. यह राजा-रजवाड़े भले ही आलीशान महलों में रहते थे लेकिन इनका दिल जनता में बसता था.

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चिकित्सा अब समाजसेवा नहीं

कुछ दिनों पहले उत्तर प्रदेश के बिजनौर ज़िले के भोगनवाला गांव निवासी शमशाद (25) को उसके परिवारीजन इलाज के लिए ज़िला अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां डॉक्टरों ने उसके फेफड़ों में पानी होने की बात कहते हुए भर्ती करने से इंकार कर दिया. मरीज के परिवारीजन डॉक्टरों से घंटों मिन्नतें करते रहे, मगर अस्पताल प्रशासन अपने रवैये पर अड़ा रहा.

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योजना और स्‍वास्‍थ्‍य दोनों से खिलवाड़

उत्तर प्रदेश में पांच वर्ष पूर्व लागू राष्ट्रीय ग्रामीण स्वास्थ्य मिशन योजना में कार्ड बनवाने से लेकर इलाज कराने तक की राह में रोड़े ही रोड़े नज़र आ रहे हैं. ग्राम्य विकास विभाग द्वारा संचालित इस योजना को लेकर किए जा रहे बड़े-बड़े दावे धराशाई होते नज़र आ रहे हैं, क्योंकि इस योजना का उद्देश्य था अनौपाचारिक स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने वाली प्रणाली को सुनिश्चित करना लेकिन इतने वर्षों के बाद भी यह योजना जनमानस को स्वास्थ्य सेवा प्रदान करने में नाक़ाम रही है.

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क्‍या यही ग्राम स्‍वराज है?

मैं घूमने के लिए कई बार यहां-वहां जाती रहती हूं. कभी बड़े शहरों में तो कभी छोटे शहरों में और कई बार उत्तराखंड के पिछड़े ग्रामीण क्षेत्रों में भी. वैसे तो गांवों में भी अब बदलाव आने लगे हैं, पर कहने में संकोच नहीं होता कि ज़्यादातर बदलावों का परिणाम उल्टा ही हुआ है.

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सदर अस्पताल का बुरा हाल

देवघर सदर अस्पताल झारखंड का एकमात्र आईएसओ प्रमाणित अस्पताल है. सदर अस्पताल में मरीज़ों को बेहतर सुविधा उपलब्ध कराने के नाम पर प्रति महीने लाखों का खर्च स्वास्थ्य विभाग की ओर से किया जाता है, लेकिन स्थिति बद से बदतर ही होती जा रही है.

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पत्नी की भी नही सुनेंगे भीम सिंह

ग्रामीण कार्य मंत्री भीम सिंह ने कहा है कि समय पर काम उनकी पहली प्राथमिकता है. कोई लापरवाही नहीं चलेगी. कहते हैं कि मैंने अपने विभाग में साफ कह दिया है कि अगर मेरी पत्नी भी किसी की पैरवी करे, नहीं मानी जाए.

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सारणः एक अस्‍पताल के भरोसे पूरा जिला

आम आदमी की बुनियादी सुविधाओं में स्वास्थ्य और चिकित्सा बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसकी ज़रूरत कब पड़ जाए, कहना मुश्किल है. धनी लोग तो ज़्यादातर निजी चिकित्सालयों में जाना मुनासिब समझते हैं, मगर ग़रीबों के लिए तो सरकारी अस्पताल ही एकमात्र सहारा होता है.आम आदमी की बुनियादी सुविधाओं में स्वास्थ्य और चिकित्सा बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसकी ज़रूरत कब पड़ जाए, कहना मुश्किल है. धनी लोग तो ज़्यादातर निजी चिकित्सालयों में जाना मुनासिब समझते हैं, मगर ग़रीबों के लिए तो सरकारी अस्पताल ही एकमात्र सहारा होता है.

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सरकारी अस्पताल में दवाई नहीं मिलती!

देश के कुछ राज्यों में सरकारी अस्पताल का नाम लेते ही एक बदहाल सी इमारत की तस्वीर जेहन में आ आती है. डॉक्टरों की लापरवाही, बिस्तरों एवं दवाइयों की कमी, चारों तऱफ फैली गंदगी के बारे में सोच कर आम आदमी अपना इलाज सरकारी अस्पताल के बजाय किसी निजी नर्सिंग होम में कराने का फैसला ले लेता है.

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सत्तर फीट के स़फर में नवजात का लिंग बदला

सरकारी अस्पतालों में नवजात बच्चों को बदलने का मुद्दा गंभीर रूप लेता जा रहा है. शहर के ज़िला अस्पताल के अंदर ही केवल 70 फिट की दूरी तय करते-करते एक नवजात को बदल दिया गया. प्रशासन पूरे मामले की जांच की बात कह रहा है, परंतु इस आरोप को साधारण तरीके से नही लिया जा सकता है.

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सार-संक्षेप: बिरला अस्पताल पानी के विवाद में उलझा

पानी की एक-एक बूंद के लिए तरस रहे सतना शहर में पलायन ज़ोरों पर है. पानी की एक-एक बूंद के लिए खूनी संघर्ष हो रहे हैं पर नगर निगम सतना शहर के प्रभावशील संस्थान को सात रुपये प्रति हज़ार लीटर की दर से पानी बेचने का सौदा कर चुका है. बिरला अस्पताल देश के प्रसिद्ध औद्योगिक परिवार से संबंद्ध है.

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सार-संक्षेप: पूर्व कुलपति के खिला़फ अदालत में चालान

प्रदेश में भ्रष्टाचार की अपसंस्कृति ने शिक्षा के क्षेत्र को भी बुरी तरह प्रभावित किया है. नकलची कुलपति के नाम से बदनाम रहे डॉ. कमलाकर सिंह पर हाल ही में राज्य सरकार के आर्थिक अपराध अनुसंधान ब्यूरो ने एक मामले में धोखा-धड़ी, जालसाजी और भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत विशेष सत्र न्यायालय में चालान पेश किया है.

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एमपी बिरला अस्पताल : अवैध ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जांच शुरू

मध्य प्रदेश विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न ने सतना के एमपी बिरला अस्पताल में हड़कंप मचा दिया है. इस अस्पताल के पास ब्लड बैंक की अनुमति नहीं है, जबकि यह अब तक हज़ारों मरीज़ों को स्वयं खून चढ़ाने का काम कर चुका है. पिछले आठ वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे से कई मरीज़ों की जान संकट में पड़ चुकी है.

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अस्पताल की तस्वीर नहीं बदली

अस्पताल के बाह्य कक्ष और अंत:कक्ष में मुफ़्त दी जाने वाली दवाओं की वजह से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन बुनियादी संसाधनों में कोई सुधार नहीं हुआ है. नतीजतन, अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बात छोड़ भी दें, तो मगध प्रमंडल का इकलौता और ग़रीब एवं लाचार मरीजों के लिए संजीवनी के रूप में प्रसिद्घ अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्थिति किसी से छिपी नहीं है.

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यह कैसा सुशासन?

ग्‍यारह फीसदी से ज़्यादा की विकास दर हासिल कर बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार फूले नहीं समा रहे हैं. राज्य की अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए तमाम पुरस्कार पाकर वह इतरा रहे हैं. देश भर में इस बात को लेकर उनकी ज़बरदस्त प्रशंसा हो रही है कि बिहार को पटरी पर लाकर उन्होंने ऐतिहासिक काम किया है.

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