जब बाबा रामदेव के अच्छे दिन थे, उस समय हिंदुस्तानी मीडिया के कर्णधार उनसे मिलने के लिए लाइन लगाए रहते थे. आज जब बाबा रामदेव परेशानी में हैं तो मीडिया के लोग उन्हें फोन नहीं करते. पहले उन्हें बुलाने या उनके साथ अपना चेहरा दिखाने के लिए एक होड़ मची रहती थी. आज बाबा रामदेव के साथ चेहरा दिखाने से वही सारे लोग दूर भाग रहे हैं. यह हमारे मीडिया का दोहरा चरित्र है.
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जब से इंसान ने एक दूसरे को समझना शुरू किया होगा, तभी से उसने भाषा के महत्व को भी समझा और जाना होगा. भाषा सभ्यता की पहली निशानी है. किसी भी समाज की संस्कृति और सभ्यता की जान उसकी भाषा में ही बसी होती है. किसी भाषा का खत्म होना, उस समाज का वजूद मिट जाना है, उस समाज की संस्कृति और सभ्यता का इतिहास के पन्नों में सिमट जाना है. इंसान के आधुनिक होने में उसकी भाषा का सबसे ब़डा योगदान रहा होगा, क्योंकि इसके ज़रिये ही उसने अपनी बात दूसरों तक पहुंचाई होगी.
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जिंदगी जीने और सिर छुपाने के लिए एक अदद छत की ज़रूरत होती है, लेकिन अमूमन छोटे शहरों की तरह आसानी से मिलने वाली किराए की छत को दिल्ली में प्रॉपर्टी डीलरों की नज़र लग गई है. तक़रीबन डेढ़ दशक पहले राजधानी दिल्ली में भी निजी पहचान के ज़रिए अथवा ख़ुद सीधे मकान मालिक से संपर्क करके लोग किराए के घर में रहते थे, लेकिन अब यह मुमकिन नहीं है.
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साहिबाबाद गांव में इन दिनों कुछ अलग सी हलचल देखने में आ रही है. अपराधियों का निवास तो यहां पहले से ही था, अब कुछ लड़कियां समूह में यहां रहने लगी हैं. दिन में सोती हैं और रात को सज-धज कर निकल जाती हैं. इनमें कुछ बंगाल की हैं तो कुछ गुजरात और नेपाल की.
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जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
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