इंडिया इन ट्रांजिशनः अलंग के लिए आईएमओ की शिप डंपिंग पॉलिसी : यूरोप का दोहरा रवैया

अभी वैश्विक स्तर पर यह मुहिम चल रही है कि पर्यावरण के नुक़सान को किस तरह से कम किया जाए. विकसित देश यह दिखाने की कोशिश कर रहे हैं कि वे पर्यावरण संरक्षण के प्रति का़फी गंभीर हैं. लेकिन उनकी कथनी और करनी में ज़मीन-आसमान का अंतर है. जिस तरह से जहाज़ तो़डने के लिए दक्षिण एशिया की बंदरगाहों का इस्तेमाल किया जा रहा है, उससे तो ऐसा ही लगता है.

Read more

पर्यावरण संबंधी मुकदमेबाज़ी का नया युग

भारत एक ऐसा देश है, जिसका पर्यावरण संबंधी आंदोलनों, ज़मीनी स्तर पर सक्रियता और उत्तरदायी उच्च न्यायपालिका का अपना समृद्ध इतिहास रहा है. ऐसे देश में 2011 का वर्ष पर्यावरण संबंधी मुकदमेबाज़ी का अत्यंत महत्वपूर्ण वर्ष अर्थात मील का पत्थर साबित हुआ है. यद्यपि पर्यावरण संबंधी मुक़दमेबाज़ी पिछले तीन दशकों में काफ़ी बढ़ गई है, लेकिन पर्यावरण और वन मंत्रालय द्वारा राष्ट्रीय हरित अधिकरण की स्थापना के कारण 2011 का वर्ष फिर भी काफ़ी विशिष्ट है.

Read more

इंडिया इन ट्रांजशिनः ऊर्जा दक्षता और भारत का भवन निर्माण क्षेत्र

त्वरित शहरीकरण से इमारतों के निर्माण की मांग में अभूतपूर्व वृद्धि होने के कारण अधिकाधिक अवसर भी पैदा हो रहे हैं. यह मांग अभी से भारत में बिजली की कुल खपत की 30 प्रतिशत आंकी गई है. बढ़ते विकास के अनुरूप ही देश के भवन निर्माण क्षेत्र में 2005 से 2050 तक पांच गुना वृद्धि की संभावना है.

Read more

इंडिया इन ट्रांजिशनः एंटी बायोटिक और अनिवार्य दवाएं न मिल पाने की चुनौतियां

जहां तक एंटी बायोटिक दवाओं का संबंध है, भारत में इस संदर्भ में दो बिल्कुल अंतर्विरोधी समस्याएं हैं. बहुत से लोग इसलिए मरते हैं, क्योंकि उन्हें एंटी बायोटिक दवाएं नहीं मिल पातीं और दूसरे लोग ऐसे हालात में भी इनका प्रयोग करते हैं, जब उन्हें इनकी ज़रूरत नहीं होती और इस प्रकार वे एंटी बायोटिक प्रतिरोध को बढ़ाने में मदद करते हैं.

Read more

इंडिया इन ट्रांजिशनः भारत और दक्षिण एशिया संतुलन से लेकर आपसी सहयोग तक

क्या अतीत की पिछली घटनाओं और उनके तर्क से यह संकेत नहीं मिलता कि अपने पड़ोसियों को लेकर हमारी नीति में परिवर्तन की शुरुआत होने जा रही है, जिसमें भारत को संतुलित करने के प्रयास से लेकर लंबे समय तक इसके साथ आपसी सहयोग भी शामिल है? क्या कारण है कि हमारे पड़ोसी देश, ख़ास तौर पर पाकिस्तान और किसी हद तक बांग्लादेश, श्रीलंका एवं नेपाल अपने ही हित में क्षेत्र की सबसे बड़ी और सबसे तेज़ी से बढ़ती अर्थव्यवस्था के साथ मिलकर सहयोग नहीं करते?

Read more

इंडिया इन ट्रांजिशनः भारत में कोयले की काली लकीर

यह समय सबसे अच्छा था, यह समय सबसे खराब था, यह युग समझदारी का था, यह युग ही बेवक़ूफ़ियों का था. कोयले की इस वर्तमान गतिशीलता की तुलना किसी षड्‌यंत्र और दो शहरों की कथा (ए टेल ऑफ़ टू सिटीज़) के झंझावात से नहीं की जा सकती.

Read more