प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सच बोलना अपराध नहीं है

सेवा में,

श्री वीरभद्र सिंह जी,

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री

1, जंतर मंतर रोड,

नई दिल्ली-110001

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निराशा पैदा करने वाला फैसला

सुप्रीम कोर्ट के फैसले का सभी सम्मान करेंगे. आखिर यह भारत के सुप्रीम कोर्ट का फैसला है, लेकिन इस फैसले से उन लोगों को निराशा हुई, जो ईमानदारी में यक़ीन रखते हैं. देश का सुप्रीम कोर्ट यह कहता है कि हमें ईमानदारी और इंटीग्रिटी से कोई मतलब नहीं है तो फिर सवाल खड़ा होता है कि क्या देश ईमानदारी छोड़ दे, क्या इस देश में उन्हीं लोगों की सुनी जाएगी, जो भ्रष्ट या बेईमान हैं?

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लाइन में खडा़ किया गोली मारी और लाशें बहा दीं

अगर न्याय में देरी का मतलब न्याय से वंचित होना है तो यह कह सकते हैं कि मेरठ के मुसलमानों के साथ अन्याय हुआ है. मई 1987 में हुआ मेरठ का दंगा पच्चीसवें साल में आ चुका है. इस दंगे की सबसे दर्दनाक दास्तां मलियाना गांव और हाशिमपुरा में लिखी गई. खाकी वर्दी वालों का जुर्म हिटलर की नाजी आर्मी की याद दिलाता है.

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आदिवासी आज भी गुलाम है

आज देश के अधिकांश जंगलक्षेत्र एक ऐसी हिंसा की आग से धधक रहे हैं, जिसकी आंच को कहीं न कहीं पूरा देश महसूस कर रहा है. इस आग का कारण इन क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों का तेज होना है. देश की आज़ादी के बाद से ही सुलग रही इस आग ने आज एक विकराल ज्वालामुखी का रूप धारण कर लिया है.

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भागलपुर दंगा न्‍याय के नाम पर अन्‍याय का खेल जारी

दो दशक बीत जाने के बावजूद भागलपुर दंगे के घाव अभी तक नहीं भरे हैं. इस दंगे ने न केवल बिहार, बल्कि यहां की सभ्यता-संस्कृति को भी गहरा आघात पहुंचाया. इसने बिहार के राजनीतिक समीकरण को तितर-बितर करके रख दिया

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सार-संक्षेप: मध्य प्रदेश-अंधेर नगरी, चौपट राजा

मध्य प्रदेश सरकार में कुछ भी अजूबा नहीं है. हाल ही में खंडवा के विकास आयुक्त कार्यालय के मुख्य कार्यपालन अधिकारी के स्टेनों ने 32 कर्मचारियों की अवैध रूप से नियुक्ति कर उनसे लाखों रुपयों की अवैध कमाई कर ली, लेकिन मामला प्रकाश में आते ही इसे दबा दिया गया. खंडवा से प्राप्त जानकारी के अनुसार पिछले 14 नवंबर 2008 को विकास आयुक्त कार्यालय भोपाल से संयुक्त आयुक्त के नाम से एक आदेश जारी हुआ,

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