कर्ज का कुचक्र और किसान

बीते 22 जुलाई को उत्तर प्रदेश के फैज़ाबाद जनपद की तहसील रुदौली के सिठौली गांव में ज़मीन नीलाम होने के डर के चलते किसान ठाकुर प्रसाद की मौत हो गई. ठाकुर प्रसाद का बेटा अशोक गांव के एक स्वयं सहायता समूह का सदस्य था. उसने समूह से कोई क़र्ज़ नहीं लिया था. समूह के जिन अन्य सदस्यों ने क़र्ज़ लिया था, उन्होंने अदायगी के बाद नो ड्यूज प्रमाणपत्र प्राप्त कर लिया था.

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पूर्वी चंपारणः महात्‍मा गांधी केंद्रीय विश्‍वविद्यालय, जनसंघर्ष और नेतागिरी

संघर्ष ज़मीन तैयार करता है और फिर उसी ज़मीन पर नेता अपनी राजनीतिक फसल उगाते हैं. कुछ ऐसा ही हो रहा है मोतिहारी में महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए बने संघर्ष मोर्चा के साथ. चंपारण की जनता केंद्रीय विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए दिन-रात एक करके संघर्ष करती है और जब दिल्ली आती है अपनी बात केंद्र तक पहुंचाने, तो वहां मंच पर मिलते हैं बिहार के वे सारे सांसद, जो संसद में तो इस मुद्दे पर कुछ नहीं बोलते, लेकिन जनता के बीच भाषणबाज़ी का मौक़ा भी नहीं छोड़ते.

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आप सांसद हैं, देवता नहीं

हमारे सांसद कुछ ज़्यादा ही सेंसेटिव हो गए हैं. उन्हें लगता है कि वे संसद के लिए चुन लिए गए हैं तो वे लोकतंत्र के देवता हो गए हैं. उन्हें कोई कुछ कह नहीं सकता है. अगर देश में भ्रष्टाचार की बात हो तो सांसदों को लगता है कि उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

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दिल्‍ली का बाबू : सीआईसी की परेशानी

केंद्रीय सूचना आयोग में सूचना आयुक्त के दो पद खाली पड़े हैं, लेकिन सरकार इस ओर ध्यान नहीं दे रही है. सूत्रों का कहना है कि नियुक्ति में देरी का कारण प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और लोकसभा में विपक्ष की नेता सुषमा स्वराज की व्यस्तता है, इसलिए निर्णय नहीं हो पा रहा है.

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