गौरी लंकेश हत्याकांड :  SIT ने किया बड़ा खुलासा, 5 साल पहले रची गई थी हत्या की साज़िश

गौरी लंकेश हत्याकांड में एसआईटी ने बहुत बड़ा खुलासा करते हुए सबको हतप्रभ कर दिया. शुक्रवार को उन्होंने बंगलौर के

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अमेरिका उन सभी अधिकारियों का वीसा निरस्त करेगा, जो जमाल खशोगी की हत्या में शामिल पाए जाएंगे.

अमेरिका ने जमाल खशोगी के हत्या के मामले में कहा कि वो उन सभी अधिकारियों का वीसा निरस्त कर देगा,

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कश्मीर के जाने-माने पत्रकार शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या

देश के जाने माने पत्रकार और ‘राइजिंग कश्मीर’ के सम्पादक शुजात बुखारी पर अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर उनकी

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पत्रकार ने आतंकी को पकड़वाया, अब खुद की जिन्दगी आफत में

बिहार का गया शहर. दो दृश्य, लेकिन विषय एक-आतंकवाद. यहां आतंकवाद के विरोध मेंे काम करने वाले एक जत्थे का

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पत्रकार मिटा सकते हैं भारत-पाकिस्तान की तल्खी

हिंदुस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते भी अजीब हैं. दोनों देशों की जनता चाहती है कि दोस्ती हो, आना-जाना हो, एक-दूसरे

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श्रद्धांजलि : अलविदा प्रफुल्ल बिदवई!

प्रफुल्ल बिदवई एक पत्रकार होने के साथ-साथ एक एक्टिविस्ट भी थे. उन्होंने वर्ष 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण का

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बिहार विधान परिषद चुनाव : प्रत्याशियों की नहीं, सुप्रीमो की अग्नि परीक्षा

बिहार के राजनीतिक हलकों में लाख टके का सवाल है कि विधान परिषद चुनाव में क्या होगा? इसका उत्तर बहुत

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आखिर क्यों मारा जाता है एक पत्रकार

पत्रकारों के हितों की पैरोकार न्यूयॉर्क की संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) की एक रिपोर्ट में उन देशों का

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बाज़ारवादी पत्रकारिता के निशाने पर वैदिक

पत्रकारिता के बारे में आम तौर पर धारणा है कि पत्रकार निष्पक्ष तो होता ही है, क्योंकि उसे जज या

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इंडियन एक्‍सप्रेस की पत्रकारिता- 2

अगर कोई अ़खबार या संपादक किसी के ड्राइंगरूम में ताकने-झांकने लग जाए और गलत एवं काल्पनिक कहानियां प्रकाशित करना शुरू कर दे तो ऐसी पत्रकारिता को कायरतापूर्ण पत्रकारिता ही कहेंगे. हाल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, सीक्रेट लोकेशन. यह इस अ़खबार में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम डेल्ही कॉन्फिडेंशियल का एक हिस्सा थी.

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हम तो ख़ुद अपने हाथों बेइज़्ज़त हो गए

जी न्यूज़ नेटवर्क के दो संपादक पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए. इस गिरफ्तारी को लेकर ज़ी न्यूज़ ने एक प्रेस कांफ्रेंस की. अगर वे प्रेस कांफ्रेंस न करते तो शायद ज़्यादा अच्छा रहता. इस प्रेस कांफ्रेंस के दो मुख्य बिंदु रहे. पहला यह कि जब अदालत में केस चल रहा है तो संपादकों को क्यों गिरफ्तार किया गया और दूसरा यह कि पुलिस ने धारा 385 क्यों लगाई, उसे 384 लगानी चाहिए थी. नवीन जिंदल देश के उन 500 लोगों में आते हैं, जिनके लिए सरकार, विपक्षी दल और पूरी संसद काम कर रही है.

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