कश्मीर के जाने-माने पत्रकार शुजात बुखारी की गोली मारकर हत्या

देश के जाने माने पत्रकार और ‘राइजिंग कश्मीर’ के सम्पादक शुजात बुखारी पर अज्ञात हमलावरों ने ताबड़तोड़ गोलियां चलाकर उनकी

Read more

पत्रकार ने आतंकी को पकड़वाया, अब खुद की जिन्दगी आफत में

बिहार का गया शहर. दो दृश्य, लेकिन विषय एक-आतंकवाद. यहां आतंकवाद के विरोध मेंे काम करने वाले एक जत्थे का

Read more

पत्रकार मिटा सकते हैं भारत-पाकिस्तान की तल्खी

हिंदुस्तान और पाकिस्तान के रिश्ते भी अजीब हैं. दोनों देशों की जनता चाहती है कि दोस्ती हो, आना-जाना हो, एक-दूसरे

Read more

श्रद्धांजलि : अलविदा प्रफुल्ल बिदवई!

प्रफुल्ल बिदवई एक पत्रकार होने के साथ-साथ एक एक्टिविस्ट भी थे. उन्होंने वर्ष 1998 में भारत के परमाणु परीक्षण का

Read more

बिहार विधान परिषद चुनाव : प्रत्याशियों की नहीं, सुप्रीमो की अग्नि परीक्षा

बिहार के राजनीतिक हलकों में लाख टके का सवाल है कि विधान परिषद चुनाव में क्या होगा? इसका उत्तर बहुत

Read more

आखिर क्यों मारा जाता है एक पत्रकार

पत्रकारों के हितों की पैरोकार न्यूयॉर्क की संस्था कमिटी टू प्रोटेक्ट जर्नलिस्ट्स’ (सीपीजे) की एक रिपोर्ट में उन देशों का

Read more

बाज़ारवादी पत्रकारिता के निशाने पर वैदिक

पत्रकारिता के बारे में आम तौर पर धारणा है कि पत्रकार निष्पक्ष तो होता ही है, क्योंकि उसे जज या

Read more

इंडियन एक्‍सप्रेस की पत्रकारिता- 2

अगर कोई अ़खबार या संपादक किसी के ड्राइंगरूम में ताकने-झांकने लग जाए और गलत एवं काल्पनिक कहानियां प्रकाशित करना शुरू कर दे तो ऐसी पत्रकारिता को कायरतापूर्ण पत्रकारिता ही कहेंगे. हाल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, सीक्रेट लोकेशन. यह इस अ़खबार में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम डेल्ही कॉन्फिडेंशियल का एक हिस्सा थी.

Read more

हम तो ख़ुद अपने हाथों बेइज़्ज़त हो गए

जी न्यूज़ नेटवर्क के दो संपादक पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए. इस गिरफ्तारी को लेकर ज़ी न्यूज़ ने एक प्रेस कांफ्रेंस की. अगर वे प्रेस कांफ्रेंस न करते तो शायद ज़्यादा अच्छा रहता. इस प्रेस कांफ्रेंस के दो मुख्य बिंदु रहे. पहला यह कि जब अदालत में केस चल रहा है तो संपादकों को क्यों गिरफ्तार किया गया और दूसरा यह कि पुलिस ने धारा 385 क्यों लगाई, उसे 384 लगानी चाहिए थी. नवीन जिंदल देश के उन 500 लोगों में आते हैं, जिनके लिए सरकार, विपक्षी दल और पूरी संसद काम कर रही है.

Read more

भविष्य के भ्रष्टाचारियों के कुतर्क

बहुत चीजें पहली बार हो रही हैं. पूरा राजनीतिक तंत्र भ्रष्टाचार के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है. पहले भ्रष्टाचार का नाम लेते थे, तो लोग अपने आगे भ्रष्टाचारी का तमगा लगते देख भयभीत होते हुए दिखाई देते थे, पर अब ऐसा नहीं हो रहा है. भ्रष्टाचार के ख़िला़फ जो भी बोलता है, उसे अजूबे की तरह देखा जाता है. राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग चाहते हैं कि यह आवाज़ या इस तरह की आवाज़ें न निकलें और जो निकालते भी हैं, उनके असफल होने की कामना राजनीतिक दल करते हैं और राजनीतिक दल से जुड़े हुए लोग इसका उपाय बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाने वाले लोग कैसे असफल होंगे.

Read more

यह पत्रकारिता का अपमान है

मीडिया को उन तर्कों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिन तर्कों का इस्तेमाल अपराधी करते हैं. अगर तुमने बुरा किया तो मैं भी बुरा करूंगा. मैंने बुरा इसलिए किया, क्योंकि मैं इसकी तह में जाना चाहता था. यह पत्रकारिता नहीं है और अफसोस की बात यह है कि जितना ओछापन भारत की राजनीति में आ गया है, उतना ही ओछापन पत्रकारिता में आ गया है, लेकिन कुछ पेशे ऐसे हैं, जिनका ओछापन पूरे समाज को भुगतना पड़ता है. अगर न्यायाधीश ओछापन करें तो उससे देश की बुनियाद हिलती है.

Read more