लोकतंत्र में सरकार मतवाला हाथी नहीं हो सकती

सुप्रीम कोर्ट के चार वरिष्ठ जजों ने पहली बार मुख्य न्यायाधीश को पत्र लिखा और प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर उसे सार्वजनिक

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सुप्रीम कोर्ट जज प्रकरण : जज ही जब न्याय मांगें तो जनता को कहां मिलेगा न्याय

भारतीय इतिहास में जब पहली बार सुप्रीम कोर्ट के चार जजों (जस्टिस जे चेलमेश्वर, जस्टिस रंजन गोगोई, जस्टिस मदन बी

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देश की स्थिति बिगड़ रही है

भारत एक कृषि प्रधान देश है और अगले कई साल तक कृषि प्रधान ही रहेगा. एक नीति, जो पिछली सरकार

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बिड़ला-सहारा मामला, फैसले पर पुनर्विचार की जरूरत है

प्राकृतिक न्याय का पहला सिद्धांत, भेदभाव के खिलाफ कानून पर आधारित होता है. इसके तीन सूत्रवाक्य हैं: पहला, कोई व्यक्ति

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न्याय की आस में नर्मदा घाटी के डूब प्रभावित

सरदार सरोवर बांध का गेट लगने के बाद नर्मदा घाटी के डूब प्रभावितों का आक्रोश बढ़ता जा रहा है. जैसे-जैसे

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मुख्यमंत्री (पू.) का सुसाइड नोट : उपराष्ट्रपति ने अपने कर्तव्य का पालन नहीं किया- क्यों?

माननीय उपराष्ट्रपति जी ने अपने संवैधानिक और नैतिक कर्तव्य का पालन नहीं किया. क्यों नहीं किया, ये सवाल हम उपराष्ट्रपति

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बैलट पेपर से चुनाव में क्या हर्ज है

अपनी तरह के एक अनोखे मामले में कोलकाता हाई कोर्ट के एक न्यायाधीश ने सुप्रीम कोर्ट के निवर्तमान न्यायाधीशों को

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संघ को समझना राष्ट्रवाद से साक्षात्कार है

न्याय दर्शन में संवाद की जो सोलह विधाएं बताई गई हैं, उनमें दो विधाएं जल्प और वितण्डता भी हैं. जल्प

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ये क़ानून कोढ़ में खाज जैसे हैं

कोढ़ या कुष्ठ एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही हमारे माथे पर बल पड़ जाना कोई असामान्य बात

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सचिन की आत्मकथा का विमोचन

भारत रत्न मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर की बहुप्रतीक्षित आत्मकथा प्लेयिंग इट माई वे का विमोचन मुंबई के एक पांच सितारा

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देर से मिला इंसाफ़ नाइंसाफ़ी है

एक वरिष्ठ वकील साहब का पुत्र क़ानून की पढ़ाई ख़त्म करके  पिता के साथ वकालत करने लगा. बड़े वकील साहब

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प्रधानमंत्री अपने विचार जनता के सामने रखें

न्यायाधीशों की नियुक्ति का मामला देखिए. जस्टिस काटजू ने कुछ खुलासे किए और जो सार्वजनिक डोमेन में आ गए हैं.

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मनमोहन सिंह ईमानदारी का सिर्फ़ मुखौटा हैं

यूपीए के दस सालों में देश ने इतिहास के सबसे बड़े घोटालों को देखा. अरबों-खरबों का घोटाला करने वाली सरकार

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जजों की नियुक्ति सरकार का विशेषाधिकार है

केद्र सरकार द्वारा गोपाल सुब्रह्मण्यम को सुप्रीम कोर्ट का न्यायाधीश न नियुक्त करने के निर्णय ने एक बार फिर से

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राष्ट्र की एकता को बचाइए

आज भारत में राष्ट्रीय स्तर पर मुझे जो नितांत आवश्यकता प्रतीत होती है वह है लड़ाई की! लड़ाई किसके विरुद्ध?

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कब होगी न्यायालय की अवमानना?

पिछले अंक में हमने आपको तीसरे पक्ष के बारे में बताया था. हम उम्मीद करते हैं कि आगे से जब कभी

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प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

साधारण पोशाक में किसी आम आदमी की तरह दुबला-पतला नज़र आने वाला शख्स, जो बगल से गुजर जाए तो शायद उस पर किसी की नज़र भी न पड़े, आज देश के करोड़ों लोगों की नज़रों में एक आशा बनकर उभरा है. तीखी बोली, तीखे तर्क और ज़िद्दी होने का एहसास दिलाने वाला शख्स अरविंद केजरीवाल आज घर-घर में एक चर्चा का विषय बन बैठा है. अरविंद केजरीवाल की कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं. उनकी अच्छाइयों और बुराइयों का विश्लेषण किया जा सकता है, लेकिन इस बात पर दो राय नहीं है कि देश में आज भ्रष्टाचार के खिला़फ जो माहौल बना है, उसमें अरविंद केजरीवाल का बड़ा योगदान है.

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सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

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बड़ी कठिन है न्‍याय की डगर

सब मानते हैं कि देर से मिला इंसा़फ भी नाइंसा़फी के बराबर होता है. इसके बावजूद हमारे देश में म़ुकदमे कई पीढि़यों तक चलते हैं. हालत यह है कि लोग अपने दादा और परदादा के म़ुकदमे अब तक झेल रहे हैं. इंसान खत्म हो जाता है, लेकिन म़ुकदमा बरक़रार रहता है. इसकी वजह से बेगुनाह लोग अपनी ज़िंदगी जेल की सला़खों के पीछे गुज़ार देते हैं. कई बार पूरी ज़िंदगी क़ैद में बिताने या मौत के बाद फैसला आता है कि वह व्यक्ति बेक़सूर है.

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श्रमिकों की जिंदगी से खिलवाड़

मध्य प्रदेश का कटनी ज़िला भारत के भौगोलिक केंद्र में स्थित होने के कारण बेशक़ीमती खनिज संपदा के प्रचुर भंडारण सहित जल संपदा की दृष्टि से महत्वपूर्ण है. यही वजह है कि स्टील अथॉरिटी ऑफ इंडिया लिमिटेड (सेल) द्वारा अपने इस्पात उद्योगों हेतु आवश्यक गुणवत्ता पूर्ण कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल किए जाने वाले चूना पत्थर (लाईम स्टोन) की खदानें यहां के ग्राम कुटेश्वर में स्थापित की गई थीं.

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न्याय याचना के ज्वलंत सवाल

भारतीय साहित्यकार संघ के अध्यक्ष डॉ. वेद व्यथित का खंड काव्य न्याय याचना एक अनुपम कृति है. जैसा नाम से ही ज़ाहिर है कि इसमें न्याय पर सवाल उठाए गए हैं. वह कहते हैं, यह ठीक है कि जानबूझ कर किया गया अपराध अनजाने में हुए अपराध से कहीं भयावह है, लेकिन लापरवाही में किया गया अपराध भी कम भयावह नहीं है. ज़रूर कहीं उसके अवचेतन में व्यवस्था और अनुशासन की अवहेलना है. ठीक है, गंधर्व ने जानबूझ कर ऋषि की अंजलि में नहीं थूका, लेकिन क्या कहीं भी थूक देना उचित है?

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मध्य प्रदेश : नक्सल प्रभावित क्षेत्र घोषित होने का फ़ायदा किसे

राज्य में पूर्व के तीन ज़िलों मंडला, डिंडोरी एवं बालाघाट के मुक़ाबले 5 अन्य नए ज़िलों सीधी, सिंगरौली, उमरिया, शहडोल एवं अनूपपुर में नक्सलियों का प्रभाव बढ़ गया है. राज्य सरकार की लगातार कोशिशों के बाद प्रदेश के इन सभी आठ ज़िलों को नक्सल प्रभावित घोषित कराने में कामयाबी मिल गई और ऐसे प्रत्येक ज़िले के लिए 25 करोड़ रुपये की सालाना केंद्रीय सहायता हाल में शुरू भी हो गई है.

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