क्या हम स्वतंत्रता के लायक़ हैं?

गणतंत्र दिवस और महात्मा गांधी की पुण्यतिथि दोनों एक ही महीने में आते हैं. दोनों के बीच के निचोड़ को किस तौर देखा जाए. पाखंड और अतिश्योक्ति से मुक्ति के लिए किए गए कामों की सुरक्षा की जानी चाहिए या उन्हें केवल दस्तावेज़ों में रखा जाना चाहिए. हमने अहिंसा के नैतिक गुण को अपना लिया है, लेकिन जयपुर में हिंसा होने के डर के कारण जो हुआ, उससे तो यही लगता है कि यह सब कहने की बात है.

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