मेवात का सामाजिक-आर्थिक परिवेश और तबलीगी जमात

मेवात इलाक़े में अधिकतर ज़मीनों पर खेती मियो किसान ही करते थे, लेकिन कुछ चौधरियों (स्थानीय समुदायों के नेताओं) को छोड़कर बड़े जमींदारों में उनकी गिनती नहीं थी. अधिकांश मियो छोटे किसान ही थे और ग़रीबी की हालत में जीते थे. (गिब्सन 1909:13) ज़मीन की उत्पादकता कम थी, वहीं आधुनिक सिंचाई सुविधाओं का भी नितांत अभाव था.

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बनारसी साड़ी उद्योगः बुनकरों की हालत बदतर, सरकार उदासीन

कवि अग्निवेद को इस कविता की राह पर चलते हुए बीते वर्ष वाराणसी के गौरगांव निवासी बुनकर सुरेश राजभर पत्नी हीरामनी एवं सात वर्षीय पुत्र छोटू की हत्या करके स्वयं फांसी पर झूल गया. क़र्ज़ के बोझ तले दबे सुरेश के सामने जीने के लिए कोई रास्ता नहीं बचा था.

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सार-संक्षेप

केंद्र एवं प्रदेश सरकार द्वारा शिक्षा में गुणात्मक सुधार और उसे रोचक बनाने के प्रयास में अरबों रुपए ख़र्च करने के बाद भी राज्य में सैटेलाईट के माध्यम से प्राथमिक शिक्षा (एडूसेट) की योजना पूरी तरह नाकाम हो गई है. इस योजना को सर्वप्रथम पायलट प्रोजेक्ट के रूप में सीधी ज़िले में, तत्कालीन मानव संसाधन विकास मंत्री अर्जुन सिंह ने प्रारंभ किया था.

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