केरल: नन ने किया बड़ा खुलासा आरोपी बिशप दो साल से कर रहा था शोषण

केरल में नन के साथ दुष्कर्म का मामला अब तूल पकड़ता जा रहा है. जहां इस केस के आरोपी बिशप

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केरल बाढ़ : प्राकृतिक आपदा की भयावहता मानवनिर्मित होती है

गुजरात और महाराष्ट्र की सीमा से शुरू होकर महाराष्ट्र, गोवा, कर्नाटक, तमिलनाडु और केरल के बाद कन्याकुमारी तक जाने वाली

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केरल, कर्नाटक से होते हुए कोलकाता पहुंचा जानलेवा निपाह, सैनिक की मौत

जानलेवा निपाह वायरस केरल और कर्नाटक के बाद अब पश्चिम बंगाल की राजधानी तक कोलकाता पहुंच गया है. इसके संक्रमण

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उत्तर भारत में आंधी-तूफ़ान का आतंक, केरल पहंचा मानसून

उत्तर प्रदेश, बिहार, झारखंड, मध्य प्रदेश और राजस्थान सहित पूरे उत्तर भारत के लिए आंधी आतंक बनी हुई है. आंधी-तूफान

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केरल: बीजेपी कार्यालय पर हमला, इलाके में भारी तनाव

नई दिल्ली।  केरल में बीजेपी के एक कार्यालय तड़के सुबह हमला हुआ। हमला राज्य की राजधानी तिरुवनंतपुरम के एक जिला

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बेगूसराय और वामपंथ का पुराना नाता है

राजधानी दिल्ली से लगभग एक हजार किमी की दूरी पर स्थित बिहार का बेगूसराय जिला हाल ही में जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय

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निषाद समेत यूपी की 17 अति पिछड़ी जातियां सड़क पर उतरने की तैयारी में जाट आंदोलन का फलाफल

जाट आरक्षण की मांग को लेकर हुए हिंसक आंदोलन के सामने सरकार के घुटने टेकने के बाद उत्तर प्रदेश में

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भारतीय राजनीती की प्रयोगशाला है केरल

भारत विविधताओं का देश है. यह विविधताएं सामाजिक आर्थिक व राजनीतिक तीनों स्तर पर हैं. राजनीतिक स्तर पर देखें तो

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अब बंदर नारियल तोड़ेंगे

केरल में श्रमिकों की कमी के कारण अब बंदरों को पेड़ों से नारियल तोड़ने के लिए प्रशिक्षित करने की योजना है. पेड़ों पर चढ़ कर नारियल तोड़ना खतरनाक होने के साथ श्रम साध्य कार्य है. नारियल तोड़ने वाले श्रमिकों में कमी का प्रभाव राज्य के नारियल व्यवसाय पर पड़ा है.

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आईपीएल-5, काउंट डाउन शुरू

आईपीएल-5 शुरू होने वाला है. जनवरी-फरवरी में होने वाली नीलामी के लिए बर्खास्त कोच्चि टस्कर्स केरल टीम के खिलाड़ी भी उपलब्ध रहेंगे. आईपीएल ने कोच्चि फ्रेंचाइजी की मान्यता ख़त्म कर दी थी.

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चुनाव परिणाम सभी राजनीतिक दलों के लिए खतरे का संकेत है

इतिहास करवट लेने जा रहा है और जब इतिहास करवट लेने वाला होता है तो इसके संकेत वह पहले से दे देता है. पांच विधानसभा चुनावों के परिणाम हमारे सामने हैं, जो किसी की जीत या किसी की हार से बड़ा संकेत हमें दे रहे हैं. हम इससे सीख लें या न लें, यह हम पर निर्भर करता है. पर अगर हम सीख लेना चाहें तो वह बिल्कुल साफ़ और स्पष्ट है कि इतिहास करवट लेने वाला है.

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केरल: कैसी जीत कैसी हार

हाल में हुए विधानसभा चुनाव में केरल के लोगों ने फिर से साबित कर दिया कि वे अपने पुराने रवैये को भूले नहीं हैं. केरल हर पांच साल में सरकार में बदलाव देखता आ रहा है. इस बार भी ऐसा ही हुआ.

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केरलः असल मुद्दे गुम, चावल हावी

केरल की राजनीति देश के बाक़ी राज्यों की राजनीति से थोड़ी अलग है. ऐसा इसलिए है, क्योंकि केरल देश का सबसे समृद्ध और सामाजिक रूप से विकसित राज्य है, लेकिन पिछले दशकों की अपेक्षा अब केरल की स्थिति बिगड़ती जा रही है. राजनीति अब चावल की राजनीति बनकर रह गई है. कांग्रेस गठबंधन एक रुपये किलो चावल देने का वादा कर रहा है, क्योंकि उसके विरोधी वामपंथी एलडीएफ ने ढाई रुपये किलो चावल देने की बात की है.

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केरलः टिकट बंटवारे पर कांग्रेस में बवाल

केरल में कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी की स़िफारिश पर 25 युवा कार्यकर्ताओं को उम्मीदवार बनाए जाने को लेकर बवाल मच गया है. टिकट की दावेदारी जता रहे पार्टी के वरिष्ठ नेताओं ने बग़ावत कर दी है.

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विधानसभा चुनावः सबसे बड़ा मुद्दा भ्रष्‍टाचार

तमिलनाडु विधानसभा चुनाव का मिज़ाज अलग है. यहां सियासी दल जनता को वोट के बदले क़ीमती वस्तुएं देने का लालच दे रहे हैं. जहां सत्ताधारी पार्टी द्रविड़ मुनेत्र कषगम (द्रमुक) के प्रमुख और मुख्यमंत्री एम करुणानिधि जनता को करुणानिधि सार्वजनिक वितरण प्रणाली के ज़रिए सस्ता अनाज, हर ग़रीब परिवार को मुफ़्त रंगीन टीवी, छात्रों को लैपटॉप, महिलाओं को मंगलसूत्र के लिए सोना देने और विकास के नाम पर समर्थन जुटाने की कवायद में जुटे हैं, वहीं एआईएमडीएमके की महासचिव एवं पूर्व मुख्यमंत्री जयललिता ने जनता को राशन कार्ड पर 20 किलो चावल म़ुफ्त, छात्रों को लैपटॉप, महिलाओं को पंखे, मिक्सर, ग्राइंडर एवं मिनरल वाटर आदि देने का ऐलान किया है.

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बबली बन गई बंटी

इस युग में जो न हो, वही कम है. केरल के कोल्लम में एक ऐसी अजीबोग़रीब घटना प्रकाश में आई है, जिसे पढ़कर आप भी चौंक जाएंगे. एक महिला पुरुष बनकर कंपनी को करोड़ों रुपये का चूना लगाती रही और अधिकारियों को इसकी भनक तक नहीं लगी.

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दिल्‍ली का बाबू : नौकरशाहों का शोर-दिल्ली चलो

वामपंथी धड़े से जुड़े राजनीतिज्ञ यदि पूर्वाभासों में भरोसा रखते हैं, तो उन्हें पश्चिम बंगाल और केरल में नौकरशाही के बदले रुख पर गौर करना चाहिए. जैसा कि हमने पहले भी बताया था कि पश्चिम बंगाल कैडर के कई वरिष्ठ अधिकारी राज्य से बाहर प्रतिनियुक्ति के लिए हाथ-पैर मार रहे हैं. अब तो हालत यह है कि ऐसे नौकरशाहों की संख्या लगातार तेजी से बढ़ती ही जा रही है.

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राजा भोज के असली चेहरे की तलाश

इतिहास में गर्भ में न जाने कितने राज़ द़फन हैं. राजा महाराजाओं की विरासत से लेकर विलुप्त हो चुकी संस्कृतियों की जानकारी इसी गर्भ से हासिल होती है. लेकिन कुछ गुत्थियां ऐसी होती हैं जो अनसुलझी ही रह जाती हैं. ऐसी ही एक गुत्थी है राजा भोज की. दसवीं-ग्याहरवीं सदी के इतिहास प्रसिद्ध लोकमान्य राजा भोज के असली चेहरे की तलाश की जा रही है, अब तक भोज के अनेक चित्र और उनकी अनेक मूर्तियां बनाई जा चुकी हैं, लेकिन पुरातत्व विद्वान अब तक किसी एक चित्र या मूर्ति को प्रामाणिक और सर्वमान्य नहीं मान सकें हैं.

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बंगाल के मुसलमानों को दिखी उम्‍मीद की किरण

आख़िरकार बंगाल सरकार ने संसद में रखी गई रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट को लागू करने का फैसला कर ही लिया. यह फैसला उस समय हुआ है, जब विपक्षी लहर को मोड़ने के लिए माकपा उठ खड़ी हुई है, जिसे बांग्ला में घुरे दाड़ानो कहा जाता है.

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बैगन पर बवाल, सेहत का सवाल

काफी दिनों से बीटी बैगन को लेकर पूरे देश में व्यापक बहस चल रही है. इसके पक्ष और विपक्ष में तर्क दिए जा रहे हैं. कहने का मतलब यह है कि बीटी बैगन सुर्ख़ियों में है. लेकिन सवाल यह उठता है कि आख़िर बीटी बैगन है क्या?

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नरेगा में फेरबदल क्यों

अगर किसानों को पर्याप्त मुना़फा नहीं होता है तो यह सरकार की ज़िम्मेदारी है कि वह फायदे को बढ़ाने वाले नए कार्यक्रम लाए, न कि अधिनियम को ही कमज़ोर कर दे. यह देश की हर समस्या का समाधान नहीं है.

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आदिवासियों तक विकास योजनाएं नही पहुंच पा रही हैं

लगभग 90 प्रतिशत कोयला खदानें, 72 प्रतिशत जंगल और 80 प्रतिशत खनिज उत्पाद आदिवासियों की ज़मीन की कोख में हैं. आदिवासी बहुल इलाक़ों में 3000 से भी ज़्यादा पनबिजली परियोजनाएं हैं. देश के औद्योगीकरण और शहरीकरण की बुनियादी सुविधाएं इन्हीं इलाक़ों के संसाधनों से जुटाई गई हैं, पर आदिवासियों को क्या मिला? इसलिए आज भी 85 प्रतिशत आदिवासी ग़रीबी रेखा से नीचे जीवनयापन कर रहे हैं.

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अन्नदाता की ख़ुदकुशी का इंतज़ाम

आंकड़े बताते हैं कि 1997 से 2008 तक भारत में क़रीब सवा लाख किसान ख़ुदक़ुशी कर चुके हैं. इनमें ऊपर बताए गए राज्यों के अलावा छत्तीसगढ़, गुजरात, पंजाब, उड़ीसा और केरल के किसान शामिल हैं. और यही वह समय भी है, जब देश में बीटी कॉटन यानी जेनेटिकली मॉडिफाइड बीजों का प्रचलन ज़ोर पकड़ रहा था. सन 2002 में, जहां देश में क़रीब 27 हज़ार हैक्टेयर क्षेत्र में बीटी कॉटन की खेती होती थी, यह दायरा 2006 में बढ़ कर 38 लाख हैक्टेयर पहुंच गया. इसी के साथ किसानों की परेशानियों का दौर भी बढ़ता चला गया।

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