दहेज प्रथा की शिकार बेटियां

हिंदुस्तानी मुसलमानों में दहेज का चलन तेज़ी से बढ़ रहा है. हालत यह है कि बेटे के लिए दुल्हन तलाशने वाले मुस्लिम अभिभावक लड़की के गुणों से ज़्यादा दहेज को तरजीह दे रहे हैं. एक तऱफ जहां बहुसंख्यक तबक़ा दहेज के ख़िलाफ़ आवाज़ बुलंद कर रहा है, वहीं मुस्लिम समाज में दहेज का दानव महिलाओं को निग़ल रहा है. दहेज के लिए महिलाओं के साथ मारपीट करने, उन्हें घर से निकालने और जलाकर मारने तक के संगीन मामले सामने आ रहे हैं.

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एक दिन जिसने ओलंपिक की तस्‍वीर बदल दी

म्‍युनिख में 1972 में हुए ओलंपिक खेलों के दौरान छह फिलीस्तीनी आतंकवादी खेलगांव में घुस गए थे. इस दौरान उन्होंने इजराइल के दो खिलाड़ियों की हत्या कर दी थी और 9 खिलाड़ियों को बंधक बना लिया था. इस घटना को फिलीस्तीन के ब्लैक सितंबर नाम के संगठन ने अंजाम दिया था. यह पहला मौक़ा था, जब आतंकवादियों ने किसी अंतरराष्ट्रीय खेल स्पर्धा को अपना निशाना बनाया था.

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बिहारः आरटीआई कार्यकर्ता सुरक्षित नहीं

सूचना के अधिकार के सिपाही रामविलास सिंह अपनी जान की सुरक्षा की गुहार लगाते रहे, पर लखीसराय सहित बिहार का सारा पुलिस अमला आराम से सोता रहा. राज्य मानवाधिकार आयोग में भी उनकी फरियाद अनसुनी रह गई. अपराधी उन्हें जान से मारने की धमकी दे रहे थे और प्रशासन ने आंखें मूंद लेने में भलाई समझी.

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निशाने पर खिलाडी़

यह बिल्कुल वैसा है कि मंदिरों के नाम पर देश भर में दंगे होते हैं और भगवान को सच्चे मन से मानने वाला कोई नहीं मिलता. सब उनका नाम अपने-अपने स्वार्थ सिद्ध करने के लिए इस्तेमाल करते हैं. तीज-त्योहारों पर उनके नाम का हल्ला शुरू कर देते हैं. ऐसा ही कुछ हमारे देश में खेल प्रतिभाओं के साथ हो रहा है. हमारे देश में खेल को किसी धर्म से कम नहीं आंका जा सकता है.

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साहित्‍यकार की हत्‍या से उठे सवालः डॉ. अनिल सुलभ

साहित्यकार तथा आकाशवाणी, पटना मे कार्यक्रम अधिशासी रहे सीताराम यादव की हत्या ने क़ानून और राज्य सरकार के दावों की पोल खोल दी है. डॉ. अनिल सुलभ ने सदाक़त आश्रम में बिहार प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा आयोजित शोक-गोष्ठी में शोक जताते हुए कहा.

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उत्तराखंडः खतरे में बाघ

देहरादून में एक युवक पर हमला करने वाले बाघ को मार डाला गया. कुछ दिनों पहले यहां वन विभाग ने एक बाघिन को आदमखोर घोषित किया था. वन्यजीव प्रेमियों कि माने तो यहां वन्यजीव और मानव संघर्ष के ब़ढते घटनाओं के उचित कारणों पर भारत सरकार एवं सूबे के प्रशासन को ध्यान देना चाहिए.

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सार-संक्षेपः गृहयुद्ध का रूप है नक्सलवाद

पुरी पीठ के शंकराचार्य जगतगुरू निश्चलानंद सरस्वती देश में बढ़ते नक्सलवादी प्रभाव और आतंक को भारत में गृहयुद्ध का एक रूप मानते हैं. इनका कहना है कि नेपाल की तरह ही हिन्दू बहुल भारत राष्ट्र की एकता अखंडता और सुरक्षा को विदेशी षड़यंत्रकारी नष्ट करना चाहते हैं और इसके लिए वह नक्सलवादियों को खुला प्रोत्साहन देने के साथ हर तरह की मदद भी कर रहे हैं.

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