सबरीमाला मंदिर में महिलाओं के प्रवेश के फैसले के खिलाफ SC में पुनर्विचार याचिका दाखिल

केरल के सबरीमाला मंदिर में महिलाओं को प्रवेश की अनुमति देने वाले फैसले के खिलाफ अयप्‍पा मंदिर एसोसिएशन ने सुप्रीम

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सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला- विवाहेत्तर संबंध अब अपराध नहीं

विवाहेत्तर संबंधों के मामले में केवल पुरुष को दोषी मानने वाली भारतीय दंड संहिता के कानून की संवैधानिक वैधता को

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मोदी सरकार ने तीन साल में हटाए 1159 पुराने क़ानून : क़ानूनी किताब का ‘अंग्रेजी’ पाठ

कानून की किताब में जितने नए अध्याय ज़ुडे हैं, उससे कहीं अधिक हटाए गए हैं. ये ब्रिटिशकालीन अध्याय कानूनी किताब

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वनाधिकार कानून : जंगल का अधिकार जमीन पर उतरता ही नहीं

वन व अन्य प्राकृतिक संपदा पर आश्रित समुदायों के स्वतंत्र एवं पूर्ण अधिकार का विषय वनाधिकार आंदोलन में हमेशा से

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पाकिस्तान के अजीबों गरीब क़ानून, किसी का फोन छूने पर होती है जेल

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल): हर देश में कुछ ऐसे कानून होते हैं तो दूसरे देश में बैठे लोगों को

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खीरी में ख़राब स्वास्थ्य सेवाएं, झूठ के आसरे सीएमओ

चुनावी बिगुल बज चुका है, लेकिन सच मानिए, पूरे प्रदेश की जनता विभिन्न मुद्दों जैसे बिजली, पानी, कानून, रोजगार, शिक्षा

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यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार आम आदमी के जीवन की रक्षा और उसकी बेहतरी के लिए वचनबद्ध है. लेकिन सरकार ने इस लोक कल्याणकारी चरित्र को ही बदल दिया है. सरकार बाज़ार के सामने समर्पण कर चुकी है, लेकिन संसद में किसी ने सवाल तक नहीं उठाया.

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प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रही होगी, उनमें किसान, मज़दूर एवं छात्रनेता भी थे, जो अपने भाषणों में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ आग उगल रहे थे. वे सब अपने भाषणों में सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे थे. उस प्रदर्शन का नेतृत्व समाजवादी नेता चंद्रशेखर कर रहे थे.

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प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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राजनीतिक दलों का रवैया गुस्सा दिलाता है

महाभारत शायद आज की सबसे बड़ी वास्तविकता है. इस महाभारत की तैयारी अलग-अलग स्थलों पर अलग तरह से होती है और लड़ाई भी अलग से लड़ी जाती है, लेकिन 2013 और 2014 का महाभारत कैसे लड़ा जाएगा, इसका अंदाज़ा कुछ-कुछ लगाया जा सकता है, क्योंकि सत्ता में जो बैठे हुए लोग हैं या जो सत्ता के आसपास के लोग हैं, वे धीरे-धीरे इस बात के संकेत दे रहे हैं कि वे किन हथियारों से लड़ना चाहते हैं.

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न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले जाएं, लोग उन्हें देखने-सुनने दौड़े चले आते हैं? उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर कई राजनेताओं को रश्क होता होगा.

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मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने में जुटी हैं. बात चाहे कांग्रेस शासित महाराष्ट्र की हो या फिर भाजपा शासित मध्य प्रदेश की, हालात कमोबेश एक जैसी ही हैं.

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भविष्य के भ्रष्टाचारियों के कुतर्क

बहुत चीजें पहली बार हो रही हैं. पूरा राजनीतिक तंत्र भ्रष्टाचार के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है. पहले भ्रष्टाचार का नाम लेते थे, तो लोग अपने आगे भ्रष्टाचारी का तमगा लगते देख भयभीत होते हुए दिखाई देते थे, पर अब ऐसा नहीं हो रहा है. भ्रष्टाचार के ख़िला़फ जो भी बोलता है, उसे अजूबे की तरह देखा जाता है. राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग चाहते हैं कि यह आवाज़ या इस तरह की आवाज़ें न निकलें और जो निकालते भी हैं, उनके असफल होने की कामना राजनीतिक दल करते हैं और राजनीतिक दल से जुड़े हुए लोग इसका उपाय बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाने वाले लोग कैसे असफल होंगे.

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48 लाख करोड़ का महाघोटाला

जबसे यूपीए सरकार बनी है, तबसे देश में घोटालों का तांता लग गया है. देश के लोग यह मानने लग गए हैं कि मनमोहन सिंह सरकार घोटालों की सरकार है. एक के बाद एक और एक से बड़ा एक घोटाला हो रहा है. चौथी दुनिया ने जब 26 लाख करोड़ रुपये के कोयला घोटाले का पर्दाफाश किया था, तब किसी को यह यकीन भी नहीं हुआ कि देश में इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा सकता है.

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एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

साधारण पोशाक में किसी आम आदमी की तरह दुबला-पतला नज़र आने वाला शख्स, जो बगल से गुजर जाए तो शायद उस पर किसी की नज़र भी न पड़े, आज देश के करोड़ों लोगों की नज़रों में एक आशा बनकर उभरा है. तीखी बोली, तीखे तर्क और ज़िद्दी होने का एहसास दिलाने वाला शख्स अरविंद केजरीवाल आज घर-घर में एक चर्चा का विषय बन बैठा है. अरविंद केजरीवाल की कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं. उनकी अच्छाइयों और बुराइयों का विश्लेषण किया जा सकता है, लेकिन इस बात पर दो राय नहीं है कि देश में आज भ्रष्टाचार के खिला़फ जो माहौल बना है, उसमें अरविंद केजरीवाल का बड़ा योगदान है.

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सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

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फर्रुख़ाबाद को बदनाम मत कीजिए

मैं अभी तक पसोपेश में था कि सलमान खुर्शीद के खिला़फ कुछ लिखना चाहिए या नहीं. मेरे लिखे को सलमान खुर्शीद या सलमान खुर्शीद की जहनियत वाले कुछ और लोग उसके सही अर्थ में शायद नहीं लें. इसलिए भी लिखने से मैं बचता था कि मेरा और सलमान खुर्शीद का एक अजीब रिश्ता है. फर्रुख़ाबाद में हम दोनों पहली बार लोकसभा के चुनाव में आमने-सामने थे और चुनाव में सलमान खुर्शीद की हार और मेरी जीत हुई थी.

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जन सत्‍याग्रह- 2012 अब सरकार के पास विकल्‍प नहीं है

जन सत्याग्रह मार्च ग्वालियर से 3 अक्टूबर को शुरू हुआ. योजना के मुताबिक़, क़रीब एक लाख किसान ग्वालियर से चलकर दिल्ली पहुंचने वाले थे. इस मार्च में शामिल होने वालों में सभी जाति-संप्रदाय के अदिवासी, भूमिहीन एवं ग़रीब किसान थे. ग्वालियर से आगरा की दूरी 350 किलोमीटर है. हर दिन लगभग दस से पंद्रह किलोमीटर की दूरी तय करता हुआ यह मार्च दिल्ली की तऱफ बढ़ रहा था.

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सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए भूमि अधिग्रहणः खूनी मैदान में तब्‍दील हो सकता है नवलगढ़

करीब पांच दशक पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1959 को जिस राजस्थान के नागौर ज़िले में पंचायती राज का शुभारंभ किया था, उसी सूबे की पंचायतों और ग्राम सभाओं की उपेक्षा होना यह साबित करता है कि ग्राम स्वराज का जो सपना महात्मा गांधी और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने देखा था, वह आज़ादी के 65 वर्षों बाद भी साकार नहीं हो सका.

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