मोदी सरकार ने तीन साल में हटाए 1159 पुराने क़ानून : क़ानूनी किताब का ‘अंग्रेजी’ पाठ

कानून की किताब में जितने नए अध्याय ज़ुडे हैं, उससे कहीं अधिक हटाए गए हैं. ये ब्रिटिशकालीन अध्याय कानूनी किताब

Read more

वनाधिकार कानून : जंगल का अधिकार जमीन पर उतरता ही नहीं

वन व अन्य प्राकृतिक संपदा पर आश्रित समुदायों के स्वतंत्र एवं पूर्ण अधिकार का विषय वनाधिकार आंदोलन में हमेशा से

Read more

पाकिस्तान के अजीबों गरीब क़ानून, किसी का फोन छूने पर होती है जेल

नई दिल्ली, (राज लक्ष्मी मल्ल): हर देश में कुछ ऐसे कानून होते हैं तो दूसरे देश में बैठे लोगों को

Read more

सरकार ही क़ानून तोड़ेगी तो क़ानून की रक्षा कौन करेगा

ये शिकायत नहीं है, ये गुस्सा भी नहीं है और इसके आगे कहें, तो अब कोई तकली़फ  भी नहीं है,

Read more

खीरी में ख़राब स्वास्थ्य सेवाएं, झूठ के आसरे सीएमओ

चुनावी बिगुल बज चुका है, लेकिन सच मानिए, पूरे प्रदेश की जनता विभिन्न मुद्दों जैसे बिजली, पानी, कानून, रोजगार, शिक्षा

Read more

जश्न-ए-आजादी : दिल्ली से उना वाया बस्तर

दिल्ली आजादी के जश्‍न में डूबी थी, वहीं अहमदाबाद से लेकर उना, दंतेवाड़ा से लेकर बस्तर तक दलित व आदिवासी

Read more

इस कलंक से मुक्ति के लिए स़िर्फ क़ानून का़फी नहीं

हाथ से मैला उठाने, उसे सिर पर ढोने या मैनुअल स्केवेंजिंग का घिनौना और अमानवीय कार्य आज भी हमारे देश

Read more

जिसे अदालत ने देशद्रोह नहीं माना…

जेएनयू और कन्हैया कुमार प्रकरण के बाद देश में देशद्रोह बनाम देशभक्ति एक राष्ट्रीय मुद्दा बनकर सामने है. हालत यह

Read more

कन्याएं काट रहीं क़ानून के कनकव्वे!

कानून बनाए ही जाते हैं तोड़े जाने के लिए. फिल्म शहंशाह में खलनायक अमरीश पुरी के मुंह से निकला यह

Read more

यह दंगा भड़काने की साज़िश है

एक तऱफ कमलेश तिवारी के घृणित बयान को लेकर देश का मुस्लिम समुदाय गुस्से में है और देश के विभिन्न

Read more

Editor’s Take- CM Shivraj Seeking CBI probe in Vyapam not enough

 Editor’s Take- CM Shivraj Seeking CBI probe in Vyapam not enough

Read more

ये क़ानून कोढ़ में खाज जैसे हैं

कोढ़ या कुष्ठ एक ऐसी बीमारी है जिसका नाम सुनते ही हमारे माथे पर बल पड़ जाना कोई असामान्य बात

Read more

यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार आम आदमी के जीवन की रक्षा और उसकी बेहतरी के लिए वचनबद्ध है. लेकिन सरकार ने इस लोक कल्याणकारी चरित्र को ही बदल दिया है. सरकार बाज़ार के सामने समर्पण कर चुकी है, लेकिन संसद में किसी ने सवाल तक नहीं उठाया.

Read more

प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रही होगी, उनमें किसान, मज़दूर एवं छात्रनेता भी थे, जो अपने भाषणों में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ आग उगल रहे थे. वे सब अपने भाषणों में सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे थे. उस प्रदर्शन का नेतृत्व समाजवादी नेता चंद्रशेखर कर रहे थे.

Read more

प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

Read more

राजनीतिक दलों का रवैया गुस्सा दिलाता है

महाभारत शायद आज की सबसे बड़ी वास्तविकता है. इस महाभारत की तैयारी अलग-अलग स्थलों पर अलग तरह से होती है और लड़ाई भी अलग से लड़ी जाती है, लेकिन 2013 और 2014 का महाभारत कैसे लड़ा जाएगा, इसका अंदाज़ा कुछ-कुछ लगाया जा सकता है, क्योंकि सत्ता में जो बैठे हुए लोग हैं या जो सत्ता के आसपास के लोग हैं, वे धीरे-धीरे इस बात के संकेत दे रहे हैं कि वे किन हथियारों से लड़ना चाहते हैं.

Read more

न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले जाएं, लोग उन्हें देखने-सुनने दौड़े चले आते हैं? उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर कई राजनेताओं को रश्क होता होगा.

Read more

मध्‍य प्रदेश: पुलिस बर्बरता के शिकार हुए किसान

भूमि अधिग्रहण के लिए सरकार भले ही एक मज़बूत क़ानून बनाने की बात कर रही हो, लेकिन सच्चाई इसके विपरीत है. यही वजह है कि देश की सभी राजनीतिक पार्टियां किसानों और मज़दूरों के हितों की अनदेखी करते हुए निजी कंपनियों को फायदा पहुंचाने में जुटी हैं. बात चाहे कांग्रेस शासित महाराष्ट्र की हो या फिर भाजपा शासित मध्य प्रदेश की, हालात कमोबेश एक जैसी ही हैं.

Read more

भविष्य के भ्रष्टाचारियों के कुतर्क

बहुत चीजें पहली बार हो रही हैं. पूरा राजनीतिक तंत्र भ्रष्टाचार के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है. पहले भ्रष्टाचार का नाम लेते थे, तो लोग अपने आगे भ्रष्टाचारी का तमगा लगते देख भयभीत होते हुए दिखाई देते थे, पर अब ऐसा नहीं हो रहा है. भ्रष्टाचार के ख़िला़फ जो भी बोलता है, उसे अजूबे की तरह देखा जाता है. राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग चाहते हैं कि यह आवाज़ या इस तरह की आवाज़ें न निकलें और जो निकालते भी हैं, उनके असफल होने की कामना राजनीतिक दल करते हैं और राजनीतिक दल से जुड़े हुए लोग इसका उपाय बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाने वाले लोग कैसे असफल होंगे.

Read more

48 लाख करोड़ का महाघोटाला

जबसे यूपीए सरकार बनी है, तबसे देश में घोटालों का तांता लग गया है. देश के लोग यह मानने लग गए हैं कि मनमोहन सिंह सरकार घोटालों की सरकार है. एक के बाद एक और एक से बड़ा एक घोटाला हो रहा है. चौथी दुनिया ने जब 26 लाख करोड़ रुपये के कोयला घोटाले का पर्दाफाश किया था, तब किसी को यह यकीन भी नहीं हुआ कि देश में इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा सकता है.

Read more

एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

साधारण पोशाक में किसी आम आदमी की तरह दुबला-पतला नज़र आने वाला शख्स, जो बगल से गुजर जाए तो शायद उस पर किसी की नज़र भी न पड़े, आज देश के करोड़ों लोगों की नज़रों में एक आशा बनकर उभरा है. तीखी बोली, तीखे तर्क और ज़िद्दी होने का एहसास दिलाने वाला शख्स अरविंद केजरीवाल आज घर-घर में एक चर्चा का विषय बन बैठा है. अरविंद केजरीवाल की कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं. उनकी अच्छाइयों और बुराइयों का विश्लेषण किया जा सकता है, लेकिन इस बात पर दो राय नहीं है कि देश में आज भ्रष्टाचार के खिला़फ जो माहौल बना है, उसमें अरविंद केजरीवाल का बड़ा योगदान है.

Read more

सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

Read more

फर्रुख़ाबाद को बदनाम मत कीजिए

मैं अभी तक पसोपेश में था कि सलमान खुर्शीद के खिला़फ कुछ लिखना चाहिए या नहीं. मेरे लिखे को सलमान खुर्शीद या सलमान खुर्शीद की जहनियत वाले कुछ और लोग उसके सही अर्थ में शायद नहीं लें. इसलिए भी लिखने से मैं बचता था कि मेरा और सलमान खुर्शीद का एक अजीब रिश्ता है. फर्रुख़ाबाद में हम दोनों पहली बार लोकसभा के चुनाव में आमने-सामने थे और चुनाव में सलमान खुर्शीद की हार और मेरी जीत हुई थी.

Read more

Gen VK Singh, Anna Hazare attack UPA, seek dissolution of Parliament

Read more

जन सत्‍याग्रह- 2012 अब सरकार के पास विकल्‍प नहीं है

जन सत्याग्रह मार्च ग्वालियर से 3 अक्टूबर को शुरू हुआ. योजना के मुताबिक़, क़रीब एक लाख किसान ग्वालियर से चलकर दिल्ली पहुंचने वाले थे. इस मार्च में शामिल होने वालों में सभी जाति-संप्रदाय के अदिवासी, भूमिहीन एवं ग़रीब किसान थे. ग्वालियर से आगरा की दूरी 350 किलोमीटर है. हर दिन लगभग दस से पंद्रह किलोमीटर की दूरी तय करता हुआ यह मार्च दिल्ली की तऱफ बढ़ रहा था.

Read more

सीमेंट फैक्ट्रियों के लिए भूमि अधिग्रहणः खूनी मैदान में तब्‍दील हो सकता है नवलगढ़

करीब पांच दशक पहले तत्कालीन प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने 2 अक्टूबर, 1959 को जिस राजस्थान के नागौर ज़िले में पंचायती राज का शुभारंभ किया था, उसी सूबे की पंचायतों और ग्राम सभाओं की उपेक्षा होना यह साबित करता है कि ग्राम स्वराज का जो सपना महात्मा गांधी और डॉक्टर राम मनोहर लोहिया ने देखा था, वह आज़ादी के 65 वर्षों बाद भी साकार नहीं हो सका.

Read more

नया भूमि अधिग्रहण विधेयक किसानों के खिलाफ साजिश

भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्स्थापना एवं पुनर्वास विधेयक संसद के मॉनसून सत्र में भी पेश नहीं हो सका. यह विधेयक कब पेश होगा और देश के करोड़ों किसानों की परेशानियां कब खत्म होंगी, यह कोई नहीं बता सकता. मौजूदा समय में देश के अंदर जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में छोटे-बड़े सैकड़ों आंदोलन चल रहे हैं. अब नंदीग्राम, सिंगुर, भट्टा पारसौल, नगड़ी, जैतापुर और कुडनकुलम जैसे हालात कई राज्यों में पैदा हो गए हैं.

Read more

बड़ी कठिन है न्‍याय की डगर

सब मानते हैं कि देर से मिला इंसा़फ भी नाइंसा़फी के बराबर होता है. इसके बावजूद हमारे देश में म़ुकदमे कई पीढि़यों तक चलते हैं. हालत यह है कि लोग अपने दादा और परदादा के म़ुकदमे अब तक झेल रहे हैं. इंसान खत्म हो जाता है, लेकिन म़ुकदमा बरक़रार रहता है. इसकी वजह से बेगुनाह लोग अपनी ज़िंदगी जेल की सला़खों के पीछे गुज़ार देते हैं. कई बार पूरी ज़िंदगी क़ैद में बिताने या मौत के बाद फैसला आता है कि वह व्यक्ति बेक़सूर है.

Read more

संशोधित भूमि अधिग्रहण बिल: काला कानून, काली नीयत

उदारीकरण का दौर शुरू होते ही जब सवा सौ साल पुराने भूमि अधिग्रहण क़ानून ने अपना असर दिखाना शुरू किया, तब कांग्रेस महासचिव राहुल गांधी को यह मुद्दा अपनी छवि बनाने के एक अवसर के रूप में दिखा. नतीजतन, अपनी तऱफ से उन्होंने इस कानून में यथाशीघ्र संशोधन कराने की घोषणा कर दी. घोषणा चूंकि राहुल गांधी ने की थी, इसलिए उस पर संशोधन का काम भी शुरू हो गया.

Read more