इंडियन एक्‍सप्रेस की पत्रकारिता- 2

अगर कोई अ़खबार या संपादक किसी के ड्राइंगरूम में ताकने-झांकने लग जाए और गलत एवं काल्पनिक कहानियां प्रकाशित करना शुरू कर दे तो ऐसी पत्रकारिता को कायरतापूर्ण पत्रकारिता ही कहेंगे. हाल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, सीक्रेट लोकेशन. यह इस अ़खबार में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम डेल्ही कॉन्फिडेंशियल का एक हिस्सा थी.

Read more

आम आदमी और न्यायपालिका-2

लंबित मुकदमों की लंबी कतार और साथ ही जजों की ईमानदारी पर सवालिया निशान एक बहुत बड़ी समस्या है. ऐसा न हो कि इसकी वजह से भारतीय लोकतंत्र के इस अंतिम गढ़ की प्रतिष्ठा धूमिल हो जाए. अन्य दो संस्थाएं, विधायिका और नौकरशाही तो पहले से ही कमज़ोर हो चुकी हैं.

Read more

पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल- 19

नन्हीं सूफी रोज़-रोज़ की तकरार को अपनी आंख से गुज़रते देखती. आनंद का तेज़ गुस्सा देख वह सहमी सी रहती. एक बार कुछ ऐसी ख़ास घटना हो गई, जिससे दरार और बढ़ गई और शिवानी ने अपना सामान बांध मायके जाने का निश्चय कर लिया. आनंद भारती ने कभी किसी को मनाना सीखा ही नहीं था.

Read more