पंजाब संयोजक पद से हटाए जाने के बाद घुग्गी ने छोड़ा ‘आप’ का साथ

नई दिल्ली : इन दिनों आम आदमी पार्टी के लिए मुश्किलों का सिलसिला थमने का नाम ही नहीं ले रहा

Read more

पार्टी से निकाले गए बसपा के कद्दावर नेता नसीमुद्दीन सिद्दीकी

नई दिल्ली : बसपा के कद्दावर नेता और पार्टी सुप्रीमो मायावती के करीबी माने जाने वाले नसीमुद्दीन सिद्दीकी को पार्टी

Read more

सपा नेत्री पर बीजेपी प्रवक्ता की टिप्पड़ी से मचा सियासी घमासान

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : एक बार फिर से महिलाओं के ऊपर अभद्र टिप्पड़ी का मामला सामने आया है. इस

Read more

कानपुर में सपा नेता की निर्माणाधीन इमारत ढही, 7 की मौत दर्जन भर घायल

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : कानपुर के जाजमऊ इलाके में सपा के पूर्व जिलाध्यक्ष महताब अालम का निर्माणाधीन छह मंजिला

Read more

कभी राहुल को बाइक पर घुमाया, अब भाजपा में घूमेंगे

पिछले कुछ चुनावों से लगातार हार का सामना कर रही कांग्रेस यूपी चुनाव के लिए तैयारी कर रही है. लेकिन,

Read more

कहां गया हमारा वोट

हमारा वोट कहां गया साहेब? समय है कि आप पूछें उन मौलानों से जो आपकी तरफ से सोनिया गांधी और

Read more

किताबों में लोकप्रिय मोदी

लोकसभा चुनाव सिर पर हैं. सियासी बिसात पर हर तरह की चालें चली जा रही हैं. सियासत के इस खेल

Read more

स़िर्फ हंगामा खड़ा करना जिनका मकसद था

2010 में 2जी मामले पर जेपीसी के गठन के लिए विपक्ष ने क़रीब-क़रीब पूरे शीतकालीन सत्र के दौरान काम नहीं

Read more

पीएम कि कुर्सी के काबिल कौन

पांच राज्यों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और अब लोकसभा चुनाव होने हैं. इसके लिए सभी राजनीतिक दल अपने-अपने

Read more

जनता को विकल्प की तलाश है

नरेंद्र मोदी की विजय ने संघ और भारतीय जनता पार्टी में एक चुप्पी पैदा कर दी है. संघ के प्रमुख लोगों में अब यह राय बनने लगी है कि नरेंद्र मोदी को देश के नेता के रूप में लाना चाहिए, लेकिन भारतीय जनता पार्टी के नेता इस सोच से सहमत नहीं हैं. भारतीय जनता पार्टी के लगभग सभी नेताओं का मानना है कि नरेंद्र मोदी को देश के अगले प्रधानमंत्री के रूप में प्रस्तुत करते ही देश के 80 प्रतिशत लोग भारतीय जनता पार्टी के ख़िला़फ हो जाएंगे, क्योंकि मोदी की सोच से देश के 16 प्रतिशत मुसलमान और लगभग 80 प्रतिशत हिंदू सहमत नहीं हैं.

Read more

मोदी की जीत के मायने

मोदी को जीतना था, क्योंकि विपक्ष ने विकल्प नहीं दिया. जीत का अंतर घटता या बढ़ता, जीतना मोदी को ही था. लेकिन जीत के साथ ही भारतीय राजनीति और ख़ासकर भाजपा के भीतर एक नई किस्म की राजनीति ज़रूर शुरू होने वाली है. यह राजनीति राहुल बनाम मोदी के नाम पर हो सकती है. यह राजनीति मोदी बनाम गडकरी की हो सकती है. यह राजनीति एनडीए के भीतर भी हो सकती है.

Read more

तीसरा मोर्चा संभावनाएं और चुनौतियां

लोकसभा में एफडीआई के मुद्दे पर दो दलों ने जो किया, वह भविष्य की संभावित राजनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है. शायद पहली बार मुलायम सिंह और मायावती किसी मुद्दे पर एक सी समझ रखते हुए, एक तरह का एक्शन करते दिखाई दिए. यह मानना चाहिए कि अब यह कल्पना असंभव नहीं है कि चाहे उत्तर प्रदेश का चार साल के बाद होने वाला विधानसभा का चुनाव हो या फिर देश की लोकसभा का आने वाला चुनाव, ये दोनों साथ मिलकर भी चुनाव लड़ सकते हैं.

Read more

अन्ना हजारे नेता नहीं, जननेता हैं

शायद जयप्रकाश नारायण और कुछ अंशों में विश्वनाथ प्रताप सिंह के बाद देश के किसी नेता को जनता का इतना प्यार नहीं मिला होगा, जितना अन्ना हजारे को मिला है. मुझे लगा कि अन्ना हजारे के साथ कुछ समय बिताया जाए, ताकि पता चले कि जनता उन्हें किस नज़रिए से देखती है और उन्हें क्या रिस्पांस देती है.

Read more

फर्रुख़ाबाद को बदनाम मत कीजिए

मैं अभी तक पसोपेश में था कि सलमान खुर्शीद के खिला़फ कुछ लिखना चाहिए या नहीं. मेरे लिखे को सलमान खुर्शीद या सलमान खुर्शीद की जहनियत वाले कुछ और लोग उसके सही अर्थ में शायद नहीं लें. इसलिए भी लिखने से मैं बचता था कि मेरा और सलमान खुर्शीद का एक अजीब रिश्ता है. फर्रुख़ाबाद में हम दोनों पहली बार लोकसभा के चुनाव में आमने-सामने थे और चुनाव में सलमान खुर्शीद की हार और मेरी जीत हुई थी.

Read more

गुजरात चुनाव सब की परीक्षा लेगा

गुजरात विधानसभा चुनाव किसके लिए फायदेमंद होगा और किसके लिए नहीं, यह तो आख़िरी तौर पर दिसंबर के आख़िरी हफ्ते में पता चलेगा, जब परिणाम आ जाएंगे. लेकिन परीक्षा किस-किस की है, इसका आकलन करना ज़रूरी है. गुजरात विधानसभा चुनाव में पहली परीक्षा श्रीमती सोनिया गांधी की है. कांग्रेस पार्टी में सोनिया गांधी के अलावा कोई ऐसा नेता नहीं है, जिसके जाने से भीड़ इकट्ठी हो सके. यहां तक कि प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह की सभा में भी सारे ख़र्चों और सारी कोशिशों के बावजूद लोगों की संख्या कुछ हज़ारों तक सीमित रहती है.

Read more

अन्‍ना हजारे की नाराजगी का मतलब

अचानक ऐसी क्या बात हो गई कि टीम अन्ना और अन्ना के बीच मतभेद सामने आ गए, ऐसा क्या हो गया कि अन्ना इतने नाराज़ हो गए कि उन्होंने अरविंद केजरीवाल और टीम अन्ना के लोगों से कहा कि न तो आप मेरे नाम का और न मेरे फोटो का इस्तेमाल कर सकते हैं. इसमें दो बातें हैं. राजनीतिक दल बनाने की घोषणा जंतर-मंतर के आंदोलन के दौरान नहीं हुई थी.

Read more

मई में होंगे मध्‍यावधि चुनाव

अंतत: कांग्रेस पार्टी और सरकार ने फैसला कर लिया कि उन्हें बजट सत्र के दौरान या बजट सत्र समाप्त होते ही चुनाव में चले जाना है. देश की आर्थिक स्थिति तेज़ी से बिगड़ रही है. इसलिए यह फैसला लिया गया. यह भी फैसला लिया गया कि क़डा बजट लाया जाए. जितने भी उपाय आम जनता को परेशानी में डालने वाले हो सकते हैं, उन उपायों को लागू कर दिया जाए. आने वाला बजट भारत के संविधान में दिए गए सारे आश्वासनों और विश्वासों के खिला़फ होने वाला है.

Read more

नया भूमि अधिग्रहण विधेयक किसानों के खिलाफ साजिश

भूमि अधिग्रहण एवं पुनर्स्थापना एवं पुनर्वास विधेयक संसद के मॉनसून सत्र में भी पेश नहीं हो सका. यह विधेयक कब पेश होगा और देश के करोड़ों किसानों की परेशानियां कब खत्म होंगी, यह कोई नहीं बता सकता. मौजूदा समय में देश के अंदर जबरन भूमि अधिग्रहण के विरोध में छोटे-बड़े सैकड़ों आंदोलन चल रहे हैं. अब नंदीग्राम, सिंगुर, भट्टा पारसौल, नगड़ी, जैतापुर और कुडनकुलम जैसे हालात कई राज्यों में पैदा हो गए हैं.

Read more

सुशासन का सच या फरेब

बिहार के चौक-चौराहों पर लगे सरकारी होर्डिंग में जिस तरह सुशासन का प्रचार किया जाता है, वह एनडीए सरकार की शाइनिंग इंडिया की याद दिलाता है. बिहार से निकलने वाले अ़खबार जिस तरह सुशासन की खबरों से पटे रहते हैं, उसे देखकर आज अगर गोएबल्स (हिटलर के एक मंत्री, जो प्रचार का काम संभालते थे) भी ज़िंदा होते तो एकबारगी शरमा जाते. ऐसा लिखने के पीछे तर्क है.

Read more

सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

Read more

आडवाणी जी बधाई के पात्र हैं

श्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग पर एक कमेंट लिखा और उस कमेंट पर कांग्रेस एवं भाजपा में भूचाल आ गया. कांग्रेस पार्टी के एक मंत्री, जो भविष्य में महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं, ने कहा कि भाजपा ने अपनी हार मान ली है. मंत्री महोदय यह कहते हुए भूल गए कि उन्होंने अपनी बुद्धिमानी से लालकृष्ण आडवाणी जी के आकलन को वैधता प्रदान कर दी.

Read more

राहुल कांग्रेस को कैसे बचाएंगे

राजनीति में राहुल गांधी की सक्रिय भूमिका हो, राहुल गांधी को बड़ी ज़िम्मेदारियां सौंपी जाएं, राहुल गांधी पार्टी और सरकार में प्रभावशाली रूप से दखल दें, कांग्रेस की तऱफ से समय-समय पर ऐसे बयान आते रहते हैं. पिछले कुछ सालों से कांग्रेस में यह एक रिवाज़ सा हो गया है. इस बार कुछ नया है, क्योंकि पहली बार राहुल गांधी ने कहा कि वह अब राजनीति में सक्रिय भूमिका निभाएंगे.

Read more

संघ नहीं चाहता भाजपा मज़बूत हो

यह हमेशा विवाद का विषय रहा है कि विधानसभा का चुनाव मुख्यमंत्री पद का प्रत्याशी घोषित करके लड़ा जाए या चुनाव के बाद मुख्यमंत्री चुना जाए. ठीक उसी तरह, जैसे लोकसभा चुनाव में कुछ पार्टियां प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार की घोषणा करके लड़ती हैं, कुछ पार्टियां ऐसा नहीं करती हैं. 2004 में भाजपा ने आडवाणी जी को प्राइम मिनिस्टर इन वेटिंग कहकर चुनाव लड़ा था, जबकि कांग्रेस ने किसी को भी अपना उम्मीदवार नहीं बनाया था.

Read more

सरकारी घोषणाओं का क्या हुआ

आम तौर पर एक सरकार जनता की सुविधाओं के लिए कोई योजना बनाती है या उसकी घोषणा करती है और बाद की कोई सरकार आकर उस योजना को ठंडे बस्ते में डाल देती है. इसके अलावा कई मौक़ों पर (खासकर किसी आपदा के व़क्त) सरकार की तऱफ से मदद देने की घोषणा की जाती है

Read more

एंटनी कमेटी की रिपोर्ट : उपेक्षा, गुटबाज़ी और बयानबाज़ी कांग्रेस को ले डूबी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में कांग्रेस को मिली करारी हार की समीक्षा कर रही एंटनी कमेटी ने दिल्ली में अपनी रिपोर्ट कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी को तमाम सिफारिशों और हार के कारणों के ख़ुलासे के साथ सौंप दी. कमेटी ने अपनी रिपोर्ट में उत्तर प्रदेश में कांग्रेस की हार के लिए बड़े नेताओं के नाते-रिश्तेदारों को टिकट देने, ज़मीनी कार्यकर्ताओं की उपेक्षा, कांग्रेसियों की आपसी गुटबाज़ी और बड़बोलेपन को मुख्य वजह बताया.

Read more

उत्तर प्रदेशः दिल्‍ली के ताज पर मुलायम की नजर

मुलायम सिंह यादव ने बेटे अखिलेश को उत्तर प्रदेश का ताज दिलाकर अपना धर्म-कर्म पूरा कर दिया. अब अखिलेश यादव की पुत्र धर्म निभाने की बारी है. समाजवादी पार्टी के तमाम नेता चाहते हैं कि वर्षों से प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे उम्रदराज़ मुलायम के लिए अखिलेश राह निष्कंटक बनाएं. इसके लिए ठीक वैसी ही तैयारियां शुरू की जाएं, जैसी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मुलायम सिंह यादव ने की थीं.

Read more

क्षेत्रीय दलों का गठबंधन एक विकल्प है

जब जवाहर लाल नेहरू सत्तर साल के हो गए तो उन्होंने सेवानिवृत होना चाहा. लेकिन उनकी पार्टी ने उन्हें ऐसा करने नहीं दिया. उनके अंतिम पांच साल का़फी कठिनाइयों भरे रहे. विशेष तौर पर चीन द्वारा भारत पर आक्रमण करने के मुद्दे और रक्षा मंत्री पर लगने वाले आरोपों के कारण. नेहरू की ताक़त खत्म होने के साथ ही क्षेत्रीय नेताओं के सिंडिकेट का उदय हुआ.

Read more

दिल्‍ली का बाबू : बाबू और नेता जी

आंध्र प्रदेश सरकार और वहां के बाबुओं के बीच रिश्ते सुधरने का नाम नहीं ले रहे हैं. राज्य में हुए घोटालों के लिए कई बाबुओं के विरुद्ध सीबीआई जांच की जा रही है, जबकि बाबुओं का मानना है कि नेताओं को इस जांच से दूर रखा जा रहा है. हाल में मुख्यमंत्री किरण कुमार रेड्डी ने एसीबी (एंटी करप्शन ब्यूरो) के अतिरिक्त निदेशक के श्रीनिवास रेड्डी का स्थानांतरण समय पूर्व कर दिया है.

Read more

कांग्रेस ऐसे हारी

दिग्विजय सिंह और परवेज़ हाशमी को फांसी की सज़ा सुनाने की तैयारी हो चुकी है. कांग्रेस हाईकमान ने इन दोनों की राजनीतिक ज़िंदगी पर एक लंबा पूर्ण विराम लगाने का फैसला ले लिया है. बस इसका औपचारिक ऐलान बाक़ी है. उत्तर प्रदेश के अधिकांश कांग्रेस कार्यकर्ता कह रहे हैं कि दिग्विजय सिंह ने पहले कांग्रेस का संगठन चौपट किया, ग़लत पीसीसी मेंबर बनाए.

Read more