बिहार में जाल बिछा गए शाह

खासकर रामविलास पासवान की नजदीकियां इस दौरान नीतीश कुमार से काफी बढ़ गईं. इन्हीं नजदीकियों को देखकर कुछ लोगों ने

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सीतामढ़ी: चुनावी तैयारी को लेकर जातीय गोलबंदी शुरू

आगामी लोकसभा चुनाव को लेकर विभिन्न राजनीतिक दलों ने तैयारियां शुरू कर दी हैं. दलगत जिला सम्मेलनों के अलावा अन्य

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अंदरूनी विवाद से लोजपा का राजनीतिक गणित गड़बड़ाया

लोजपा ने 2019 के आगामी लोकसभा चुनाव के मद्देजनर अपनी राजनीतिक हैसियत आंकने के लिए राजगीर सम्मेलन का आयोजन किया.

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मणिपुर चुनाव परिणाम : इबोबी की सल्तनत में भाजपा की सेंध

सियासी व सामाजिक उथल-पुथल के लिए जाना जाने वाला मणिपुर अब चुनावी परिणामों के जरिए चौंकाने वाले प्रदेश के रूप

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बिहार एनडीए में कोई यहां कोई वहां

बिहार विधानसभा चुनावों के बाद से ही राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए), कुछ अपवादों को छोड़कर, सूबे में कभी सुगठित नहीं

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दल बदल नेता : किसी ने खाई मलाई और किसी का हाथ ख़ाली

राजनीति समाज सेवा का एक सशक्त माध्यम एवं मंच माना जाता है, लेकिन कुछ राजनेता सिर्फ अपनी महत्वाकांंक्षा की पूर्ति

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बेगूसराय और वामपंथ का पुराना नाता है

राजधानी दिल्ली से लगभग एक हजार किमी की दूरी पर स्थित बिहार का बेगूसराय जिला हाल ही में जवाहरलाल नेहरू विश्‍वविद्यालय

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बिहार महागठबंधन-लाभ का उत्तर प्रदेश में विस्तार चाहता है जदयू नीतीश की महत्वाकांक्षा चढ़ेगी परवान

समाजवादी पार्टी को महागठबंधन से अलग होने के लिए विवश करने वाले जनता दल (यू) और कांग्रेस की उत्तर प्रदेश

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महिलाएं वोट देने में आगे, हिस्सेदारी में पीछे

बिहार की महिलाओं ने सामाजिक और राजनीतिक जागरूकता के मामले में हमेशा बढ़ चढ़कर हिस्सा लिया है. अगर इस बार

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पिता की विरासत संभालने के लिए बेटे चुनाव मैदान में

भारतीय राजनीति में वंशवाद कोई नई बात नहीं है. चाहे केन्द्र की राजनीति हो या राज्य की, भारत की राजनीति

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बिहार : युवाओं की सेना सज गई

राजनीतिक प्रयोग की धरती बिहार में पिछले दिनों एक नया प्रयोग हुआ. भले ही इस प्रयोग को अभी ज़मीनी चुनौतियों से गुज़रना है, पर इस अनूठी पहल ने यह सा़फ कर दिया कि सूबे का युवा नेतृत्व अब आर-पार की लड़ाई के मूड में आ चुका है और वह युवाओं को उनका हक़ दिलाने के लिए किसी भी सीमा तक जा सकता है.

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पूर्णिया उपचुनावः विपक्ष का गुरूर चकनाचूर

पूर्णिया उपचुनाव में विपक्ष के नेताओं ने यह साबित कर दिया कि वे सुधरने वाले नहीं हैं. विधानसभा चुनाव में पस्त हो चुके लालू प्रसाद एवं राम विलास पासवान का अहंकार उन्हें अगर आने वाले समय में राजनीतिक हाशिए पर डाल दे तो कोई हैरानगी की बात नहीं होगी, क्योंकि लगता है, उन्होंने आपस में ही लड़ने की कसम खा ली है.

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शांति और विकास की चाहत ने जीत दिलाई

गया ज़िले के दस विधानसभा क्षेत्रों के परिणामों ने सभी को दंग कर दिया. ज़िले में राजद-लोजपा गठबंधन और कांगे्रस की हालत इतनी खराब होगी, इसका अंदाज़ा किसी को नहीं था. अमन और विकास की हवा ऐसी चली कि जदयू-भाजपा को दस में से नौ सीटें मिल गईं. अब तो यही कहा जा सकता है कि नक्सलवाद से त्रस्त और विकास से मरहूम लोगों ने विकास की आस में जनादेश दिया है.

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पारस की बंध गई पोटली

खगड़िया ज़िले के बेहद पिछड़े विधानसभा क्षेत्र अलौली में अंतत: 33 वर्षों के बाद लोजपा प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस की पोटली बंध ही गई. लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के अनुज पारस ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जनता उन्हें सिर आंखों पर बिठाने के बजाए ज़मीन पर पटक देगी. दरअसल हार से बचने के लिए उन्होंने अपने चहेते रामचंद्रा सदा को जदयू का टिकट यह सोचकर दिलवाया था कि उन्हें मुसहर समाज के तीन-तीन प्रत्याशियों के खड़े रहने से जीतने में मदद मिलेगी. हुआ उल्टा. महादलित समाज के लोगों ने एकजुट होकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया.

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निशाना चूक गया

विकास की लाख रट लगाने के बावजूद शुरू के दो चरणों के मतदान में विकास चुनावी मुद्दा नहीं बन पाया. जाति के आधार पर होने वाले बिहार के चुनावों की दिशा बदलने के लिए नीतीश कुमार का इस तरफ किया गया कोई भी प्रयास रंग नहीं ला सका. यहां तक की मीडिया के नीतीशीकरण का भी प्रभाव वोटरों पर नहीं पड़ा और बिहार में जातीय ताने-बाने के बीच स्थानीय मुद्दों और उम्मीदवारों की अपनी छवि के घेरे में वोट पड़े.

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सीमांचलः बागी पलट सकते हैं बाजी

कहा जाता है कि राजनीति अनिश्चितताओं का खेल है. कब कौन नेता पाला बदल ले या किसी से हाथ मिला ले, इसकी गारंटी कोई नहीं ले सकता. कभी सीमांचल की राजनीति में राजद के अगुवा एवं लालू के प्रबल सहयोगी रहे तस्लीमुद्दीन आज नीतीश के साथ हैं और अपने प्रभाव से पुत्र समेत कई समर्थकों को टिकट दिलाने में कामयाब रहे हैं.

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मगधः घात-प्रतिघात का दौर

महत्वाकांक्षी नेताओं की बढ़ती फौज और कार्यकर्ताओं की घटती संख्या हर राजनीतिक दल के लिए चिंता का विषय बन गई है. चुनाव आते ही हर नेता की नज़र स़िर्फ टिकट पर रहती है. अपने दल का टिकट न मिलने पर वे दल बदलने में पल भर की देर नहीं लगाते.

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खगडि़याः जनता जवाब मांगने के लिए तैयार

बाढ़, कटाव, बिजली, शिक्षा, स्वास्थ्य और सिंचाई जैसी समस्याओं से आजिज़ खगड़िया की जनता इस बार प्रत्याशियों की चिकनी चुपड़ी बातों में फंसने से परहेज कर रही है. निवर्तमान विधायकों से पाई-पाई का हिसाब मांगने को जनता बेताब है. अन्य पार्टी प्रत्याशियों से उनकी बातों पर विश्वास करने का ठोस प्रमाण मांग रही है.

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राहुल को घेरेंगे तेजस्‍वी और चिराग

बिहार विधानसभा के चुनाव में राहुल फैक्टर की बात तो पहले से हो रही थी, पर चुनावी शंखनाद के बाद इसके तेज होते असर ने नीतीश, लालू एवं पासवान जैसे दिग्गजों की नींद उड़ा दी है. राहुल गांधी युवाओं से बार-बार अपील कर रहे हैं कि चुनिए उन्हें, जिन्हें देश ने चुना है. राहुल की सभाओं में युवाओं की बढ़ती भागीदारी यह महसूस करा रही है कि सूबे के युवा वोटरों के मन में क्या चल रहा है.

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चुनावी तड़काः पियरलेस एजेंट से बने मुख्यमंत्री

राजनीति में कौन कहां कब पहुंच जाए, कहा नहीं जा सकता. इसका प्रत्यक्ष उदाहरण नीतीश कुमार हैं, जो पियरलेस की एजेंटी करते-करते मुख्यमंत्री बन गए. इस बात का खुलासा उनके पुराने मित्र एवं राजद नेता राम बिहारी सिंह ने किया. नीतीश का दामन छोड़ लालू का दामन थामने के बाद राम बिहारी ने कहा कि एक ज़माने में हम और नीतीश सत्तू पीकर सोते थे और साथ में पियरलेस की एजेंटी भी करते थे.

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चुनावी तड़काः लेने के देने न पड़ जाएं

राजद को अलविदा कह नीतीश का तीर थामने वाले दलसिंह सराय के विधायक रामलखन महतो की परेशानी कम होने का नाम नहीं ले रही है. उनकी सीट नए परिसीमन में समाप्त हो जाने से उन्हें बगल के नवगठित उजियारपुर विधानसभा क्षेत्र से चुनाव लड़ना है. उजियारपुर से टिकट मिलने की गारंटी के बाद ही उन्होंने मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की सभा में जदयू की सदस्यता ग्रहण की थी, लेकिन नए घर में उन्हें सुकून नहीं मिल रहा है.

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बिहार विधानसभा चुनावः सज गई सेना

बिहार में चुनावी महासंग्राम के लिए अपनी-अपनी सेनाओं को सजाने और उसे चमकाने का काम सभी दिग्गजों ने लगभग पूरा कर लिया है. चुनावी हथियारों से लैस करके सेना को मैदान-ए-जंग में कूदने की हरी झंडी चरणबद्ध तरीके से दिखाई जा रही है. जहां पेच फंस रहा है, उसे रतजगा करके सुलझाया जा रहा है, ताकि एक-एक पल का फायदा उठाया जा सके.

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