नक्सलियों से मुठभेड़ : अर्द्धसैनिक बल के जवान ही क्यों मरते हैं?

बिहार के गया-औरंगाबाद जिले की सीमा से लगे नक्सल प्रभावित डुमरी नाला में 18 जुलाई 2016 को पुलिस-नक्सलियों की मुठभेड़

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झारखंड पुलिस की विशेष शाखा ने किया खुलासा : धन कमाने में लगे हैं नक्सली

बन्दूक की नली से सत्ता की राह निकालने की बात करने वाले नक्सली अब अपने तमाम सिद्धांतों को दरकिनार कर

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नेपाल के पूर्व नरेश की जान खतरे में

माओवादी नेपाल राजवंश के अकेले वारिस पूर्व नरेश ज्ञानेंद्र वीर विक्रम शाह की यत्र-तत्र-सर्वत्र बिखरी पड़ी अथाह संपत्ति बटोरने की

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शक का लाभ

ओसामा बिन लादेन का कहना था कि अमेरिका के खिला़फ उसके जिहाद को रोकने का एकमात्र रास्ता है कि अमेरिका के लोग इस्लाम कबूल कर लें. इसके अलावा कोई और रास्ता नहीं है. लादेन को यह विश्वास उसके क़ुरान पढ़ने से आया. उसने इतिहास से भी यह पाठ सीखा. उसका सोचना था कि अगर सोवियत संघ को अ़फग़ानिस्तान में विफल किया जा सकता है तो अमेरिका को क्यों नहीं हराया जा सकता है.

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ये मुख़बिरों की बस्ती है

देश में आज भी धर्म और जाति के आधार पर बस्ती, पारा और मोहल्लों का बसना और इनकी पहचान न स़िर्फ मौजूद है, बल्कि स्वीकार्य भी है. परंतु इसी देश में मु़खबिरों की एक बस्ती भी है, यह सुनकर कोई भी चौंक सकता है.

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नेपालः शांति के लिए समझौता

नेपाल की राजनीतिक पार्टियों के बीच का समझौता एक सराहनीय क़दम कहा जा सकता है. इस समझौते के तहत पूर्व माओवादियों में से कुछ को सेना में भर्ती किया जाएगा. जिन्हें सेना में नहीं लिया जा रहा है उन्हें सहयोग राशि दी जाएगी, ताकि वे नए जीवन की शुरुआत कर सकें.

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बिहारः पांच हजार एकड़ भूमि पर माओवादी प्रतिबंध

प्रतिबंधित नक्सली संगठन भाकपा माओवादी ने ज़िले के विभिन्न प्रखंडों में सौ से अधिक लोगों की लगभग पांच हज़ार एकड़ भूमि पर आर्थिक नाकेबंदी लगा रखी है, जिसके कारण पिछले कई वर्षों से इस भूमि पर खेती नहीं हो पा रही है. माओवादियों के डर से प्रतिबंधित भूमि पर कोई भी व्यक्ति बटाई खेती करने के लिए भी तैयार नहीं है. जिन लोगों की भूमि पर खेती प्रतिबंधित की गई है, उनमें अधिकांश अपने-अपने गांव छोड़कर ज़िला मुख्यालय गया अथवा अन्य शहरों में रह रहे हैं.

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नक्सलियों की रोकने की कवायद

अभी कुछ दिनों पहले केंद्र सरकार की तऱफ से वनवासियों एवं आदिवासियों के कल्याण और उनके हितों का ध्यान रखने के लिए कई सकारात्मक क़दम उठाए गए हैं तथा अनेक पहल के संकेत भी मिले हैं. भ्रष्टाचार के आरोपों से चौतरफा घिरी और विपक्ष के हमलों से हलकान केंद्र सरकार को अब देश के जंगलों और पिछड़े इलाक़ों में रहने वाले आदिवासियों और जंगल आधारित उत्पादों के सहारे जीवन बसर करने वाले लोगों की याद आई है.

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दिल्‍ली का बाबूः बाबुओं का पलायन

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में राजनीतिक बदलाव होते ही, उम्मीद के मुताबिक़ राजधानी समेत राज्य के कई हिस्सों में प्रशासनिक फेरबदल की कवायद शुरू हो गई है. अफसरों के ट्रांसफर-पोस्टिंग का दौर शुरू हो गया है.

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आखिर कब तक बहेगा खून

खनिज बहुल प्रदेश झारखंड अपने गठन से ही नक्सली हिंसा का शिकार होता आया है. स्थापना वर्ष 2000 से अब तक सूबे में जितनी सरकारें आईं, सभी ने नक्सलियों पर नकेल कसने की बातें दोहराईं, मगर समस्या विकराल होती गई और नक्सली बलशाली होते गए.

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बंगाल ने बढ़ाई चुनाव आयोग की चिंता

बंगाल की लड़ाई के मैदान में आजकल मेडिकल टीमों के दौरे तो ख़ूब हो रहे हैं, पर युद्ध विराम का कोई संकेत नहीं मिल रहा है. हत्याओं के बाद परिजनों के आंसू पोछने के लिए सत्तारूढ़ एवं विपक्षी दलों के नुमाइंदे तांता लगाए हुए हैं तो संवैधानिक प्रमुख राज्यपाल यह जान रहे हैं कि हालात कैसे हैं? उधर चुनावी चिंता में दुबले हो रहे चुनाव आयोग की टीमें भी गांवों की धूल फांक रही हैं.

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नक्सली बनाम भारतीय राज्य व्यवस्था

आप बसें जलाएं, सार्वजनिक संस्थानों को क्षति पहुंचाएं, दुकानदारों की दुकान लूट लें, मज़दूरों की रोज़ी-रोटी पर लात मार दें, क़ानून-व्यवस्था का पालन करने वाले सामान्य नागरिकों का जीवन अस्त-व्यस्त कर दें और पुलिस वालों का जीवन संकट में डाल दें, लेकिन डरने की कोई बात नहीं.

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भीख मांगता है महादलित

कहने को तो नीतीश के सुशासन की सरकार ने महादलितों के लिए कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई हैं. ये योजनाएं कितनी साकार हुईं हैं, इस बात का सही आकलन इस महादलित विकलांग को देखकर ही किया जा सकता है.

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जनता के संकेत को समझें

बिहार में दूसरे और तीसरे चरण का चुनाव ऐसे क्षेत्रों में था, जो माओवादियों के प्रभाव वाले माने जाते हैं. पोस्टर एवं पर्चों के ज़रिए माओवादी पहले से ही आम मतदाता को मतदान केंद्र तक न पहुंचने की धमकी दे चुके थे. दूसरे चरण के चुनाव के ठीक दो दिन पहले शिवहर ज़िले के श्यामपुर भटहा में माओवादियों ने एक पुल पर विस्फोट कर पुलिस जीप को उड़ा दिया.

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आदिवासी आज भी गुलाम है

आज देश के अधिकांश जंगलक्षेत्र एक ऐसी हिंसा की आग से धधक रहे हैं, जिसकी आंच को कहीं न कहीं पूरा देश महसूस कर रहा है. इस आग का कारण इन क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों का तेज होना है. देश की आज़ादी के बाद से ही सुलग रही इस आग ने आज एक विकराल ज्वालामुखी का रूप धारण कर लिया है.

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पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल- 41

मुन्नी तैयार होकर इटाड़ी बाज़ार पहुंच गई. यहीं उसका बैंक है. बैंक में जब उसने बीस हज़ार रुपये निकालने के लिए फॉर्म भरा तो मैनेजर ने इतने पैसे एक साथ देने से मना कर दिया. वह मैनेजर पर झुंझलाई, लेकिन बात नहीं बनी. मैनेजर ने साफ कहा, किसी की गारंटी लाओ, तभी इतने पैसे मिलेंगे. मुन्नी को उसी दिन वापस साहिबाबाद लौटना था.

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पश्चिम बंगालः राजनीतिक उठापटक का दौर जारी

देश में माओवादियों के ख़िला़फ चल रही जंग को बंगाल की राजनीतिक उठापटक ने काफ़ी उलझा दिया है. आदिवासियों के हितैषियों एवं मानवाधिकारों के बड़े-बड़े झंडाबरदारों का मुखौटा उतर रहा है. बंगाल में हो रही इस हलचल का ख़ामियाज़ा देश के दूसरे हिस्सों को भी भुगतना पड़ रहा है.

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नेताओं के हथियार से नक्‍सली कर रहे प्रहार

बिहार-झारखंड में नक्सली संगठनों की बढ़ी सक्रियता और बेलगाम हरकतों ने जहां सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह से हलकान कर रखा है, वहीं आम-अवाम भी उनकी गतिविधियों से पस्त दिख रहा है. बस्तियों-जंगलों में गोलियों की बौछार कर या फिर सड़कों पर बारूदी सुरंगों का विस्फोट कर दहशत फैलाने वाले नक्सलियों ने आम जनता और सरकारी मशीनरी को आतंकित करने का एक नया तरीका ईजाद किया है.

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आजाद कौन है?

सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता कामरेड आज़ाद यानी गहरे रंग के और लंबे-दुबले चेरुकुरी राजकुमार नहीं रहे. आंध्र प्रदेश की पुलिस ने अपनी पीठ थपथपाते हुए बताया कि उन्हें आदिलाबाद के जोगपुर जंगल में हुई मुठभेड़ में मार गिराया गया. पुलिस के मुताबिक़, मुठभेड़ सरकेपल्ली गांव इलाक़े में हुई और लगभग चार घंटे तक चली.

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बंगाल को खाक कर देगी नानूर की चिंगारी

बंगाल के माथे पर देश की सांस्कृतिक राजधानी होने का ताज है, पर हाल के वर्षों में इसने कई और रिकार्ड बनाए हैं. किसी दल के लगातार 33 साल शासन में रहने का रिकॉर्ड इसके नाम है तो राजनीतिक हत्याओं के मामले में भी यह देश का सबसे कुख्यात राज्य बन गया है.

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गांजे के खेतों में पनप रहा माओवाद

भारत-नेपाल सीमा से सटे हिस्सों में गांजे और अफीम की खेती माओवादियों के संरक्षण में इन दिनों खूब फल-फूल रही है. यहां से दुनिया भर में गांजे और अफीम की तस्करी होती है. इससे जुड़े लोग अकूत धन कमा रहे हैं. गांजे और अफीम की खेती करने वालों से माओवादी लेवी वसूलते हैं.

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बीजेपी के अस्तित्‍व पर संकट

मुसीबतें हर आम इंसान और समाज पर आती हैं. हम लड़ते भी हैं. इस लड़ाई में अगर कोई हमदर्द न मिले तो लोग असहाय और बेसहारा महसूस करने लगते हैं. ऐसा लगने लगता है कि सब कुछ ख़त्म हो रहा है. इससे भी ख़तरनाक स्थिति तब पैदा होती है जब कोई ख़ुदगर्ज हमदर्द बनने का नाटक करता है.

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सांसत में विकास

माओवादी नहीं चाहते कि आदिवासियों का भला हो और वे मुख्यधारा में आएं. यह तो बेचारे आदिवासियों को पिछड़ेपन की गिरफ्त में बनाए रखने की साजिश है. उनका इरादा नेक नहीं है. उनके लिए आदिवासी केवल ढाल हैं, मोहरा हैं. उनका इकलौता मक़सद हिंसा के रास्ते सत्ता हासिल करना है.

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नक्‍सलियों का रेड हंट अभियान

देश के अन्य राज्यों में नक्सली संगठनों के खिला़फ केंद्र सरकार भले ही ऑपरेशन ग्रीन हंट चला रही हो, लेकिन मजे की बात यह है कि बिहार के रोहतास ज़िले में पुलिस के ख़िला़फ नक्सलियों का रेड हंट अभियान अपने चरमोत्कर्ष पर है. नक्सलियों ने पहले तिलौथू प्रखंड परिसर में निर्माणाधीन थाना भवन एवं नरेगा कार्यालय को बम से उड़ा दिया.

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नक्सल समस्या : राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने की ज़रूरत

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले में नक्सली हमले में एक साथ 76 लोगों की मौत ने देश में लगातार गंभीर बनती जा रही इस समस्या की ओर फिर से ध्यान खींचा है. नक्सलियों की बढ़ती ताक़त, उनके प्रभाव क्षेत्र में विस्तार और मारक क्षमता के मद्देनज़र यह ज़रूरी है कि हम इस समस्या की गंभीरता पर नए सिरे से विचार करें.

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गृहमंत्री जी, आप अपनी ज़िम्मेदारियों से भाग नहीं सकते

अधिकतर ग़लतियां अक्सर दिमाग़ से शुरू होती हैं. यह सभी जानते हैं कि सुरक्षा मामलों में गृहमंत्री पी चिदंबरम अमेरिकी नीति के बड़े हिमायती हैं. इस नीति में अपनी कमियों पर ख़ास ध्यान नहीं दिया जाता, लेकिन सुरक्षा का यह फार्मूला अमेरिका में मुख्य रूप से विदेशी चुनौतियों से निबटने के लिए तैयार किया गया था, न कि अंदरूनी समस्याओं से मुक़ाबला करने के लिए.

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संभलिए, अभी संभलने का मौक़ा है

किसी भी सरकार को सरकार की तरह व्यवहार करना चाहिए. सरकार का मतलब होता है कि वह देश में रहने वालों के जीवन की, भोजन की, काम की, स्वास्थ्य की और उनके सुख-शांति से रहने की आज़ादी की गारंटी दे. जो सरकार इसे जितना ज़्यादा पूरा करती है, वह उतनी ही अच्छी सरकार मानी जाती है.

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आंखों देखा नक्‍सलवाद

विदेशी हथियारों से लैस नक्सलवादी समूहों के पास सरकार से अधिक मज़बूत सूचनातंत्र है. गहराई तक जानें तो, इन नक्सलवादी समूहों के पास पैसा, हथियार, योजना सभी कुछ उम्मीदों से कहीं ज़्यादा है. लेकिन, ये समूह जन विश्वास और जन आस्था धीरे-धीरे खोते जा रहे हैं. उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य के मध्य पड़ने वाले कुछ ऐसे भूभाग हैं जहां से नक्सलवादियों को लगातार गुज़रना पड़ता है.

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ऑपरेशन ग्रीन हंट सफलता पर सवालिया निशान

काफी जद्दोजहद के बाद झारखंड में ऑपरेशन ग्रीन हंट शुरू हुआ. केंद्र सरकार के दिशानिर्देश पर सूबे में उग्रवादी गतिविधियों पर अंकुश लगाने और नक्सलियों पर नकेल कसने के उद्देश्य से यह अभियान जारी है.

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जो बोलेगा, सो झेलेगा

हिंदी के मशहूर लेखक एवं नाटककार मुद्राराक्षस बेहद गुस्से में थे. आक्रामक मुद्रा और तीखे स्वरों में लगभग चीखते हुए उन्होंने सवाल किया कि यह देश किसका है, किसके लिए है. हत्यारे, लुटेरे, बलात्कारी, दलाल, तस्कर खुलेआम घूम रहे हैं. मुसलमानों का क़त्लेआम कराने वाला आदमी गुजरात का मुख्यमंत्री है. बाल ठाकरे मुसलमानों की हत्या किए जाने की लगातार अपील करता है और केंद्रीय मंत्री बेशर्म होकर उसके दरवाज़े मत्था टेकने पहुंच जाता है. लेकिन जो इस देश और देश की जनता को बचाने के लिए जुटते हैं, उन्हें देशद्रोही की कतार में खड़ा कर दिया जाता है.

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