अपनी दवा के बारे में जानना क्यों जरूरी है

किसी चीज को जानना मनुष्य का स्वभाविक गुण है. अमूमन वो अपने आस-पास होने-वाली हलचलों के कारणों को जानना चाहता

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हाइपो-ग्लाइसीमिया के मरीज रखें खास ख्याल

खून में ग्लूकोज की कमी से सबसे पहले मस्तिष्क की कार्यप्रणाली प्रभावित होती है. मरीज़ को सिरदर्द होता है, चक्कर

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संभल कर करें एंटीबायोटिक्स का इस्तेमाल

शोध के अनुसार अधिकांश मरीजों का मानना था कि एंटीबायोटिक्स लेने से बीमारी पर जल्दी असर होता है और उनकी

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आवश्यक दवाओं की सूची में नई दवाएं शामिल

विश्‍व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा 1977 में आवश्यक दवाओं को परिभाषित किया गया. ऐसी दवाएं जो बहुसंख्यक लोगों की स्वास्थ्य

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दवा कंपनियां, डॉक्‍टर और दुकानदार: आखिर इस मर्ज की दवा क्‍या है

दवा, डॉक्टर एवं दुकानदार के प्रति भोली-भाली जनता इतना विश्वास रखती है कि डॉक्टर साहब जितनी फीस मांगते हैं, दुकानदार जितने का बिल बनाता है, को वह बिना किसी लाग-लपेट के अपना घर गिरवी रखकर भी चुकाती है. क्या आप बता सकते हैं कि कोई घर ऐसा है, जहां कोई बीमार नहीं पड़ता, जहां दवाओं की ज़रूरत नहीं पड़ती? यानी दवा इस्तेमाल करने वालों की संख्या सबसे अधिक है. किसी न किसी रूप में लगभग सभी लोगों को दवा का इस्तेमाल करना पड़ता है, कभी बदन दर्द के नाम पर तो कभी सिर दर्द के नाम पर.

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सेहत से खिलवाड़

भारत दवाओं का एक ब़डा बाज़ार है. यहां बिकने वाली तक़रीबन 60 हज़ार ब्रांडेड दवाओं में महज़ कुछ ही जीवनरक्षक हैं. बाक़ी दवाओं में ग़ैर ज़रूरी और प्रतिबंधित भी शामिल होती हैं. ये दवाएं विकल्प के तौर पर या फिर प्रभावी दवाओं के साथ मरीज़ों को ग़ैर जरूरी रूप से दी जाती हैं. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए गठित संसद की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दवाओं के साइड इफेक्ट की वजह से जिन दवाओं पर अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों में प्रतिबंधित लगा हुआ है, उन्हें भारत में खुलेआम बेचा जा रहा है.

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इंडिया इन ट्रांजिशनः एंटी बायोटिक और अनिवार्य दवाएं न मिल पाने की चुनौतियां

जहां तक एंटी बायोटिक दवाओं का संबंध है, भारत में इस संदर्भ में दो बिल्कुल अंतर्विरोधी समस्याएं हैं. बहुत से लोग इसलिए मरते हैं, क्योंकि उन्हें एंटी बायोटिक दवाएं नहीं मिल पातीं और दूसरे लोग ऐसे हालात में भी इनका प्रयोग करते हैं, जब उन्हें इनकी ज़रूरत नहीं होती और इस प्रकार वे एंटी बायोटिक प्रतिरोध को बढ़ाने में मदद करते हैं.

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कैमरा बोले तो डॉक्टर

हाल में हुए एक अध्ययन में यह ख़ुलासा हुआ है कि कैमरा फोन चिकित्सा निदान में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है. नीदरलैंड के रॉयल ट्रापिकल इंस्टीट्यूट के शोधकर्ता कोसजे तुईज्न ने बताया कि दो मेगा पिक्सल कैमरा स्पष्ट माइक्रोस्कोपी छवियां लेने में सक्षम है, जिन्हें विशेषज्ञों द्वारा विश्लेषण के लिए वेबसाइट पर भेजा जा सकता है.

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बेहतर स्वास्थ्य सेवा कैसे मिलेगी

पिछले अंक में हमने आपको बताया था कि सूचना अधिकार क़ानून का इस्तेमाल करके आप किस तरह सरकारी अस्पतालों से मुफ्त या कम दामों पर दवाइयां प्राप्त कर सकते हैं. इस बार हम आपको बता रहे हैं कि सरकारी अस्पतालों से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर सूचना अधिकार क़ानून किस तरह आपकी मदद कर सकता है.

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दिल्‍ली का बाबूः उत्तर प्रदेश के बाबू परेशान

उत्तर प्रदेश की राजनीति अपराध और भ्रष्टाचार के लिए कुख्यात रही है. इस वजह से वहां काम करने वाले कई बाबुओं को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. हाल में वहां कई करोड़ रुपये का चिकित्सा घोटाला हुआ.

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डोपिंग का जाल : सिर्फ खिलाडी और कोच दोषी नहीं

भारत के ज़्यादातर खेल पहले से ही क्रिकेट के मायाजाल में फंसकर खुद के अस्तित्व के लिए तरस रहे हैं, ऐसे में डोपिंग के बढ़ते मामलों ने उन उभरते हुए खेलों और खिलाड़ियों को हाशिए पर डालने का काम किया है, जो किसी तरह क्रिकेट के बाज़ार के बीच अपने स्वर्ण पदकों की बदौलत अपनी उपस्थिति दर्ज करा रहे थे.

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मिलावटख़ोरों को फांसी हो

हमारे देश में इन दिनों भ्रष्टाचार को लेकर व्यापक बहस छिड़ी हुई है. देश में फैला मिलावटख़ोरी व नक़ली वस्तुएं बेचने वालों का नेटवर्क भी इसी भ्रष्टाचार का एक सर्वप्रमुख अंग है, परंतु बावजूद इसके कि लगभग प्रत्येक भारतीय इस समय कहीं न कहीं मिलावटख़ोरी या नक़ली वस्तुओं की ख़रीद फरोख्त का स्वयं शिकार हो रहा है.

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सारणः एक अस्‍पताल के भरोसे पूरा जिला

आम आदमी की बुनियादी सुविधाओं में स्वास्थ्य और चिकित्सा बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसकी ज़रूरत कब पड़ जाए, कहना मुश्किल है. धनी लोग तो ज़्यादातर निजी चिकित्सालयों में जाना मुनासिब समझते हैं, मगर ग़रीबों के लिए तो सरकारी अस्पताल ही एकमात्र सहारा होता है.आम आदमी की बुनियादी सुविधाओं में स्वास्थ्य और चिकित्सा बेहद महत्वपूर्ण होती है. इसकी ज़रूरत कब पड़ जाए, कहना मुश्किल है. धनी लोग तो ज़्यादातर निजी चिकित्सालयों में जाना मुनासिब समझते हैं, मगर ग़रीबों के लिए तो सरकारी अस्पताल ही एकमात्र सहारा होता है.

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आंखों का रखें ध्‍यान

आयुर्वेदिक दवाइयों के प्रति पूरी दुनिया में बढ़ते विश्वास को देखते हुए लॉस एंजेल्स स्थित कंपनी डोहेनी रेटिना इंस्टीट्यूट ने भारत के इंस्टीट्यूट ऑफ आयुर्वेद और इंटीग्रेटिव मेडिसिन (आईएआईएम) के साथ गठजोड़ किया है.

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सरकारी अस्पताल में दवाई नहीं मिलती!

देश के कुछ राज्यों में सरकारी अस्पताल का नाम लेते ही एक बदहाल सी इमारत की तस्वीर जेहन में आ आती है. डॉक्टरों की लापरवाही, बिस्तरों एवं दवाइयों की कमी, चारों तऱफ फैली गंदगी के बारे में सोच कर आम आदमी अपना इलाज सरकारी अस्पताल के बजाय किसी निजी नर्सिंग होम में कराने का फैसला ले लेता है.

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केंद्र ही भूल गया पातालकोट

छिंदवाड़ा ज़िले में स्थित पातालकोट क्षेत्र प्राकृतिक संरचना का एक अजूबा है. सतपुड़ा पर्वत श्रेणियों की गोद में बसा यह क्षेत्र भूमि से एक हज़ार से 1700 फुट तक गहराई में बसा हुआ है. इस क्षेत्र में 40 से ज़्यादा मार्ग लोगों की पहुंच से दुर्लभ हैं और वर्षा के मौसम में यह क्षेत्र दुनिया से कट जाता है.

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आतंक के साए में जी रहा है कटनी

कटनी ज़िला इन दिनों विभिन्न आपराधिक वारदातों का केंद्र बनता जा रहा है. इस क्षेत्र में जुए, सट्टे और नशीली दवाओं से संबंधित अपराधों का खूब बोलबाला है. पुलिस की निष्क्रियता के वज़ह से यहां अवैध शस्त्रों का आवागमन और व्यापार भी आम है. पिछले दिनों राज्य के गृहमंत्री उमाशंकर गुप्ता के प्रवास के दौरान भी इन समस्याओं से निपटने की दिशा में कोई विशेष कदम नहीं उठाया गया.

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जहरीला हो गया दूध

कल जहां अमृत समान दूध की नदियां बहती थी आज वहां का दूध ज़हरीला हो गया है. शायद यह सुनकर आप चौंक जाएं, लेकिन यह सौ फीसदी सत्य है. जी हां, यहां हम बात कर रहे हैं बिहार के कोसी इलाक़े की. जहां आज भी मां कात्यायनी को दूध से स्नान कराने की परंपरा है, लेकिन इस इलाके में दूध को अधिक देर तक सुरक्षित रखने के लिए एक भी शीतगृह अथवा अन्य कोई ठोस साधन नहीं है.

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विंध्‍य हर्बल सफल सहकारी संस्‍था

सरकारी प्रयासों से जनकल्याण के काम बिना रुकावट पूरे होते रहें, यह लगभग असंभव बात मानी जाती है. पर जब आप मध्य प्रदेश लघु वनोपज संघ के द्वारा बनाई गई विंध्य हर्बल संस्था के कामकाज को देखेंगे तो मानेंगे कि जनकल्याण के लिए सरकारी प्रयासों की कमी नहीं है. विंध्य हर्बल संस्था प्रदेश स्तर पर ही नहीं, राष्ट्रीय स्तर पर भी आयुर्वेदिक औषधियों से संबंधित संग्रहण, उत्पादन, शोधन, दवा निर्माण एवं उसकी बिक्री का काम करती है.

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अस्पताल की तस्वीर नहीं बदली

अस्पताल के बाह्य कक्ष और अंत:कक्ष में मुफ़्त दी जाने वाली दवाओं की वजह से सरकारी अस्पतालों में मरीजों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन बुनियादी संसाधनों में कोई सुधार नहीं हुआ है. नतीजतन, अस्पताल में इलाज कराने आए लोगों को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है. सदर अस्पताल, रेफरल अस्पताल एवं प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र की बात छोड़ भी दें, तो मगध प्रमंडल का इकलौता और ग़रीब एवं लाचार मरीजों के लिए संजीवनी के रूप में प्रसिद्घ अनुग्रह नारायण मगध मेडिकल कॉलेज अस्पताल की स्थिति किसी से छिपी नहीं है.

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दुर्लभ संजीवनी बूटी मिलने का दावा

मध्य प्रदेश के वन विभाग ने विंध्य के जंगलों में संजीवनी बूटी के मिलने का दावा किया है. रामायण में संजीवनी बूटी के बारे में यह उल्लेख है कि बाण लगने से मूर्छित लक्ष्मण को संजीवनी बूटी के प्रयोग से ही मूर्छित किया जा सका था.

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हैती: बदहाल स्‍वास्‍थ्‍य सेवाओं के लिए जिम्‍मेदार कौन?

तऱक्की का मापदंड अगर स्वास्थ्य को माना जाए तो कैरेबियाई देश हैती इस मामले में सबसे निचले पायदान पर होगा. यह विकासशील देशों का एक दुखद पहलू है, जो सा़फ करता है कि विकासशील मुल्क खाद्य सुरक्षा और स्वास्थ्य का अधिकार खोते जा रहे हैं.

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