विवादित सीडी मामले में कोर्ट ने खारिज की विनोद वर्मा की ज़मानत याचिका

विवादित सीडी मामले में फंसे वरिष्ठ पत्रकार विनोद वर्मा के लिए परिस्थितियां अब और भी खराब हो चुकी हैं. दरअसल

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कैबिनेट मंत्री की अनोखी पहल, हाइवे निर्माण के लिए छोड़ा आलीशान बंगला

केरल में हाईवे के लिए जमीन अधिग्रहण को लेकर लगातार बवाल चल रहा है ऐसे में यहाँ कैबिनेट मंत्री ने

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ये तो हद ही हो गई, योगी जी के मंत्री को ही नहीं पता GST का फुल फॉर्म

नई दिल्ली : देश में आज रात 12 बजे के बाद जीएसटी लागू होने वाला है ऐसे में केंद्र सरकार

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मनीष सिसोदिया के बाद अब सत्येन्द्र जैन के घर पर CBI का छापा

नई दिल्ली: अभी हाल ही में ‘टॉक तो AK’ मामले में पूँछतांछ करने के लिए CBI की टीम दिल्ली के

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UP : मंत्री के गनर की दबंगई, लोडेड पिस्टल लेकर MRI रूम में घुस आया

नई दिल्ली : जब से उत्तर प्रदेश में योगी सरकार बनी है तभी से प्रदेश की जनता ये उम्मीद लगाए

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सिंहस्थ में श्रद्धालुओं की कम आमद भी अलमबरदारों को कर रही चिंतित : अफरातफरी और अव्यवस्था का महाकुम्भ

मध्य प्रदेश शासन ने उज्जैन में प्रारंभ हुए सिंहस्थ पर करोड़ों रुपये खर्च तो कर दिए, परंतु पहले शाही स्नान

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चुनौतियां ही चुनौतियां

बहुत पुराना शेर है और आपको जरूर याद होगा… ये इश्क नहीं आसां, बस इतना ही समझ लीजे, इक आग

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दिल्ली का बाबू : नौकरशाही में समय निष्ठा

पंजाब में प्रकाश सिंह बादल सरकार केंद्र में बदल रहे वर्क कल्चर को अपनाने में काफी त़ेजी दिखा रही है.

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मोदी की जीत के मायने

मोदी को जीतना था, क्योंकि विपक्ष ने विकल्प नहीं दिया. जीत का अंतर घटता या बढ़ता, जीतना मोदी को ही था. लेकिन जीत के साथ ही भारतीय राजनीति और ख़ासकर भाजपा के भीतर एक नई किस्म की राजनीति ज़रूर शुरू होने वाली है. यह राजनीति राहुल बनाम मोदी के नाम पर हो सकती है. यह राजनीति मोदी बनाम गडकरी की हो सकती है. यह राजनीति एनडीए के भीतर भी हो सकती है.

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इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

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फर्रु़खाबाद को अब धोखा बर्दाश्त नहीं

अरविंद केजरीवाल फर्रु़खाबाद गए भी और दिल्ली लौट भी आए. सलमान खुर्शीद को सद्बुद्धि आ गई और उन्होंने अपनी उस धमकी को क्रियान्वित नहीं किया, जिसमें उन्होंने कहा था कि केजरीवाल फर्रु़खाबाद पहुंच तो जाएंगे, लेकिन वापस कैसे लौटेंगे. इसका मतलब या तो अरविंद केजरीवाल के ऊपर पत्थर चलते या फिर गोलियां चलतीं, दोनों ही काम नहीं हुए.

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यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

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बिना ब्‍याज का कर्ज और सस्‍ती जमीन: यह रिश्‍वत नहीं तो क्‍या है

नए-नए बने राजनीतिक दल (अरविंद केजरीवाल द्वारा घोषित) ने सोनिया गांधी के दामाद रॉबर्ट वाड्रा पर एक साथ कई आरोप लगाए हैं. इन तमाम आरोपों में कई चीजें शामिल हैं और इनमें कई तथ्य एवं आंकड़े बहुत ही बड़े हैं, लेकिन इस सबके बीच अगर सिद्धांत की बात की जाए तो दो चीजें एकदम स्पष्ट हैं. पहला यह कि रॉबर्ट वाड्रा की कुल पहचान यही है कि वह सोनिया गांधी के दामाद हैं.

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बड़ी कठिन है न्‍याय की डगर

सब मानते हैं कि देर से मिला इंसा़फ भी नाइंसा़फी के बराबर होता है. इसके बावजूद हमारे देश में म़ुकदमे कई पीढि़यों तक चलते हैं. हालत यह है कि लोग अपने दादा और परदादा के म़ुकदमे अब तक झेल रहे हैं. इंसान खत्म हो जाता है, लेकिन म़ुकदमा बरक़रार रहता है. इसकी वजह से बेगुनाह लोग अपनी ज़िंदगी जेल की सला़खों के पीछे गुज़ार देते हैं. कई बार पूरी ज़िंदगी क़ैद में बिताने या मौत के बाद फैसला आता है कि वह व्यक्ति बेक़सूर है.

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सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

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सीएजी के प्रति कांग्रेस का रवैया यह प्रजातंत्र पर हमला है

सीएजी (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आई तो राजनीतिक हलक़ों में हंगामा मच गया. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2006-2009 के बीच कोयले के आवंटन में देश को 1.86 लाख करोड़ का घाटा हुआ. जैसे ही यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई, कांग्रेस के मंत्री और नेता सीएजी के खिला़फ जहर उगलने लगे. पहली प्रतिक्रिया यह थी कि सीएजी ने अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लंघन किया.

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पिछले चार साल में अनाज नहीं सड़ा: एफसीआई

जुलाई 2010 में सरकार ने एक आरटीआई के अंतर्गत पूछे गए सवाल के जवाब में कहा था कि देश में एफसीआई के विभिन्न गोदामों में 1997 से 2007 के बीच 1.83 लाख टन गेहूं, 6.33 लाख टन चावल और 2.2 लाख टन धान खराब हो गया था. जुलाई 2012 में एक अन्य आरटीआई के जवाब में एफसीआई ने कहा है कि 2008 से लेकर अब तक देश में एफसीआई के किसी भी गोदाम में अनाज खराब नहीं हुआ है.

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आडवाणी जी बधाई के पात्र हैं

श्री लालकृष्ण आडवाणी ने अपने ब्लॉग पर एक कमेंट लिखा और उस कमेंट पर कांग्रेस एवं भाजपा में भूचाल आ गया. कांग्रेस पार्टी के एक मंत्री, जो भविष्य में महत्वपूर्ण कैबिनेट मंत्री बन सकते हैं, ने कहा कि भाजपा ने अपनी हार मान ली है. मंत्री महोदय यह कहते हुए भूल गए कि उन्होंने अपनी बुद्धिमानी से लालकृष्ण आडवाणी जी के आकलन को वैधता प्रदान कर दी.

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फैसले न लेने की कीमत

मनमोहन सिंह की बुनियादी समस्या यह है कि वह खुद फैसले नहीं लेना चाहते, लेकिन प्रधानमंत्री हैं तो फैसले तो लेने ही थे. जब उनके पास फाइलें जाने लगीं तो उन्होंने सोचा कि वह क्यों फैसले लें, इसलिए उन्होंने मंत्रियों का समूह बनाना शुरू किया, जिसे जीओएम (मंत्री समूह) कहा गया. सरकार ने जितने जीओएम बनाए, उनमें दो तिहाई से ज़्यादा के अध्यक्ष उन्होंने प्रणब मुखर्जी को बनाया.

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बिगड़े रिश्‍ते, बिगड़ी अर्थव्‍यवस्‍था

अब प्रणब मुखर्जी के दूसरे मंत्रियों और प्रधानमंत्री से रिश्ते की बात करें. वित्त मंत्री माना जाता है कि आम तौर पर कैबिनेट में दूसरे नंबर की पोजीशन रखता है. वित्त मंत्रालय इन दिनों मुख्य मंत्रालय (की मिनिस्ट्री) हो गया है, क्योंकि हर पहलू का महत्वपूर्ण पहलू वित्त होता है, इसलिए बिना वित्त के क्लीयरेंस के कोई भी फैसला हो ही नहीं सकता.

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मत भूलिए, आप सरकार के चेहरे हैं

बीते 5 जून को उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद में बीडीसी की बैठक के दौरान ब्लॉक प्रमुख राजेश यादव से कहासुनी हो जाने पर समाजवादी पार्टी के विधायक हाजी इऱफान के भाई हाजी उस्मान एवं उनके समर्थकों ने गोलीबारी कर दी, जिससे कई लोग जख्मी हो गए.

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दिल्‍ली का बाबूः ईमानदारी की सज़ा

हरियाणा कैडर के भारतीय वन सेवा के अधिकारी संजीव चतुर्वेदी को भ्रष्टाचार उजागर करने की क़ीमत चुकानी पड़ रही है. संजीव चतुर्वेदी ने पिछले साल ही केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर जाने के लिए राज्य सरकार से अनुमति मांगी थी, लेकिन हरियाणा सरकार ने उन्हें अनुमति नहीं दी, जबकि केंद्र सरकार ने हरियाणा सरकार से उन्हें अनुमति देने के लिए कहा था.

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बिहारः सेवा यात्रा में सुशासन की पोल खुली

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार की चार दिवसीय चंपारण सेवा यात्रा ने सुशासन की पोल खोल दी है. मुख्यमंत्री के मोतिहारी पहुंचते ही पंचायत शिक्षकों द्वारा मानदेय भुगतान के लिए किया गया हंगामा, पुतला दहन, बिजली का ग़ायब होना, पंचायती राज के जन प्रतिनिधियों का आंदोलन एवं अभियंत्रण महाविद्यालय में व्याप्त कुव्यवस्था को लेकर छात्रों का हंगामा तथा सभाओं में जनता के बीच उत्साह न होना साबित करता है कि लोग सरकार से खुश नहीं हैं.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सवाल देश की सुरक्षा का है, फिर भी चुप रहेंगे? अन्‍ना हजारे ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब…

आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी,

पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश की जनता को का़फी चिंतित किया है. लेकिन अधिक चिंता का विषय यह है कि क्या इतनी चिंताजनक घटनाएं हो जाने के बावजूद कुछ सुधार होगा? अभी तक की भारत सरकार की कार्रवाई से ऐसा लगता नहीं कि कुछ सुधरेगा.

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महाराष्‍ट्रः चंदे के फंदे में मंत्री

पावर और पैसा आज हर महत्वाकांक्षी व्यक्ति की चाहत है. जिसके पास पावर है, उसके पास पैसे वाले स्वयं चले आते हैं. व्यवसायी, ठेकेदार एवं उद्योगपति पावर के चारों ओर सौर मंडल के ग्रहों की तरह चक्कर लगाते नज़र आते हैं. उनकी निकटता पाकर मंत्री-संतरी भी उनसे अपना उल्लू सीधा करने में गुरेज़ नहीं करते.

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सत्ता का दुरुपयोग रोकना होगा

क्या यह चौंकाने वाली बात नहीं है कि गुजरात के दो विधायक अहमदाबाद के पास उत्पात मचाते हुए पाए गए. जब पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार कर लिया तो वे हिंसा पर उतारू हो गए. इसकी खबर जब नरेंद्र मोदी तक पहुंची तो वह पुलिस स्टेशन गए तथा विधायकों को गिरफ्तार करने वाले पुलिस कर्मियों को डांट लगाई और विधायकों को छुड़ाया.

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यह पूरे देश का आंदोलन है

अन्ना हज़ारे इतिहास में सुनहरा पन्ना बनकर जुड़ गए हैं. आज़ादी के बाद कई नेताओं ने आंदोलन किए, लोग उनके साथ जुड़े, उन्होंने अपनी बातें भी मनवाईं. अनशन हुए, आमरण अनशन हुए, उनमें लोग शहीद भी हुए, लेकिन अन्ना का क़िस्सा इन सबसे अलग है. एक ऐसा आदमी, जो देश में कहीं घूमा नहीं, जिसने राज्यों में सभाएं नहीं कीं, लोगों को तैयार नहीं किया, उनके पास अपना मुद्दा नहीं पहुंचाया, कोई संगठन नहीं बनाया, उसके साथ आज़ादी के बाद का सबसे बड़ा जनसैलाब खड़ा है.

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Rahul Gandhi on Lokpal – II

Rahul Gandhi on Lokpal – II

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