अपने ही छोड़ रहे हैं ट्रम्प का साथ, मंत्रियों के इस्तीफे का सिलसिला जारी

तीन नॉमिनेट मंत्री दे चुके हैं इस्तीफा ट्रम्प के सत्ता संभालने के बाद से तीन मंत्री इस्तीफा दे चुके हैं.

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राज्य मंत्री के इशारे पर दी गई दबिश में झुलसे पत्रकार की मौत : भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाने का अंजाम

उत्तर प्रदेश में सोशल मीडिया पर ताकतवर नेताओं और मंत्रियों की करतूतों को उजागर करने वाले पत्रकारों या आम लोगों

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दिल्ली का बाबू: नए असमंजस

हाल ही में आंध्र प्रदेश से अलग होकर तेलंगाना साकार रूप ले चुका है. के. चंद्रशेखर राव ने नवगठित राज्य

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ऐसे जीती भाजपा

2014 लोकसभा चुनाव ने भारतीय राजनीति के कई मिथकों को तोड़ा है. सर्वे कराने वाली देश के सारी एजेंसियां फेल

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यह आम आदमी की पार्टी है

भारतीय राजनीति का एक शर्मनाक पहलू यह है कि देश के राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों की कमान चंद परिवारों तक सीमित हो गई है. कुछ अपवाद हैं, लेकिन वे अपवाद ही हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश के प्रजातंत्र के लिए खतरा पैदा हो जाएगा. राजनीतिक दलों और देश के महान नेताओं की कृपा से यह खतरा हमारी चौखट पर दस्तक दे रहा है, लेकिन वे देश की जनता का मजाक उड़ा रहे हैं.

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48 लाख करोड़ का महाघोटाला

जबसे यूपीए सरकार बनी है, तबसे देश में घोटालों का तांता लग गया है. देश के लोग यह मानने लग गए हैं कि मनमोहन सिंह सरकार घोटालों की सरकार है. एक के बाद एक और एक से बड़ा एक घोटाला हो रहा है. चौथी दुनिया ने जब 26 लाख करोड़ रुपये के कोयला घोटाले का पर्दाफाश किया था, तब किसी को यह यकीन भी नहीं हुआ कि देश में इतने बड़े घोटाले को अंजाम दिया जा सकता है.

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एक नहीं, देश को कई केजरीवाल चाहिए

साधारण पोशाक में किसी आम आदमी की तरह दुबला-पतला नज़र आने वाला शख्स, जो बगल से गुजर जाए तो शायद उस पर किसी की नज़र भी न पड़े, आज देश के करोड़ों लोगों की नज़रों में एक आशा बनकर उभरा है. तीखी बोली, तीखे तर्क और ज़िद्दी होने का एहसास दिलाने वाला शख्स अरविंद केजरीवाल आज घर-घर में एक चर्चा का विषय बन बैठा है. अरविंद केजरीवाल की कई अच्छाइयां हैं तो कुछ बुराइयां भी हैं. उनकी अच्छाइयों और बुराइयों का विश्लेषण किया जा सकता है, लेकिन इस बात पर दो राय नहीं है कि देश में आज भ्रष्टाचार के खिला़फ जो माहौल बना है, उसमें अरविंद केजरीवाल का बड़ा योगदान है.

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देशभक्तों और ग़द्दारों की पहचान कीजिए

जब बाबा रामदेव के अच्छे दिन थे, उस समय हिंदुस्तानी मीडिया के कर्णधार उनसे मिलने के लिए लाइन लगाए रहते थे. आज जब बाबा रामदेव परेशानी में हैं तो मीडिया के लोग उन्हें फोन नहीं करते. पहले उन्हें बुलाने या उनके साथ अपना चेहरा दिखाने के लिए एक होड़ मची रहती थी. आज बाबा रामदेव के साथ चेहरा दिखाने से वही सारे लोग दूर भाग रहे हैं. यह हमारे मीडिया का दोहरा चरित्र है.

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Who will Defeat ANNA & BABA

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दिल्‍ली का बाबूः वित्त मंत्रालय के बाबू

वित्त मंत्रालय में कुछ नई चीज़ें हो रही हैं. अकसर देखा जाता है कि जो अधिकारी किसी मंत्री या सरकार के नज़दीकी होते हैं या फिर उनके व़फादार होते हैं, उन्हें सेवानिवृत्ति के बाद कोई पद दे दिया जाता है. सामान्य तौर पर सचिव रैंक के अधिकारियों को सेवा विस्तार नहीं दिया जाता है, क्योंकि उनकी सेवानिवृत्ति के साथ कई लोग आस लगाए रहते हैं कि इस बार उनकी बारी आने वाली है.

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आजाद भारत के महान घोटाले

किसी भी लोकतंत्र का स्वास्थ्य इस बात पर निर्भर करता है कि उसके तीनों अंगों-विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के बीच संबंध कैसे हैं और इन तीनों में जवाबदेही बची है या नहीं. आज भारत की दुर्दशा भी इन्ही दो कारकों पर आंकी जा सकती है. पिछले साल भारत में भ्रष्टाचार और घोटालों का बोलबाला रहा.

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विधायकों की बल्‍ले-बल्‍ले

फंड खत्म करने को लेकर विधायकों के दिलों में जो मलाल था, वह अब बहुत जल्द दूर होने वाला है. नए साल के तोह़फे के तौर पर सरकार विधायकों के वेतन को लगभग दोगुना करने पर गंभीरता से विचार कर रही है. इसके साथ ही विधायकों को मिलने वाले रेल कूपन एवं हवाई यात्रा के लिए मिलने वाली राशि में भी इज़ा़फा किया जा रहा है.

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घोटाले के घेरे में गोगोई सरकार

जब से असम के उत्तर कछार पर्वतीय स्वशासी ज़िला परिषद में एक हज़ार करोड़ रुपये के घोटाले का मामला उजागर हुआ है, तबसे राज्य की तरुण गोगोई सरकार बचाव की मुद्रा में आ गई है. इस घोटाले से स्पष्ट हो गया है कि असम के शासन तंत्र में भ्रष्टाचार किस हद तक प्रभावी हो चुका है.

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थरूर का इस्ती़फा कहानी का अंत नहीं है

भारतीय मीडिया में अब तक के सबसे अनोखे सोप ओपेरा एवं सनसनीखेज क्राइम थ्रिलर से अचंभित और रोमांचित हो रहे लोगों के बारे में यही कहा जा सकता है कि उन्होंने शायद अगाथा क्रिस्टी की लिखी मर्डर ऑन द ओरिएंट एक्सप्रेस नहीं पढ़ी. उन्होंने इसके फिल्मी रूपांतरण में अल्बर्ट फिनी और पीटर उस्तीनोव को हरक्यूल पॉयरट के किरदार में भी नहीं देखा है.

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ताप बिजली घर: खपत ज़्यादा, बिजली उत्पादन कम

बिजली संकट झेल रहे मध्यप्रदेश में पिछले सात वर्षों में विद्युत उत्पादन दर में बारह प्रतिशत की कमी आई है. वर्ष 2002-03 से लेकर 2008-09 तक राज्य में विद्युत उत्पादन क्षमता 2772.5 से बढ़कर 2932.5 मेगावाट जरूर हो गई है, लेकिन कोयला और तेल की खपत बढ़ने से वास्तव में उत्पादन कम हो रहा है.

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दिल्‍ली का बाबूः फिज़ूल़खर्ची को ग्रीन सिग्नल

केंद्र सरकार के बदले रवैये से लगता है कि सरकारी बाबुओं और सुविधाभोगी मंत्रियों के दिन अब फिर से बहुरने वाले हैं. मितव्ययिता के भूत ने मंत्रियों और सरकारी बाबुओं को आरामतलबी से दूर रहने के लिए मजबूर कर दिया था. फाइव स्टार होटलों और एक्जीक्यूटिव क्लास में यात्रा पर रोक लगा दी गई थी, लेकिन मंदी से उबरने के बाद अर्थव्यव्स्था में जान लौटी तो केंद्र अब इन पाबंदियों को हटाने पर विचार कर रहा है.

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सीवान : राजग में घमासान

सीवान में विकास से ज़्यादा विरोध की राजनीति होने लगी है. विरोध की राजनीति विकास मद की राशि को लेकर शुरू हुई है. इस विरोधाभाषी राजनीति से यहां एनडीए में घमासान मचा हुआ है, जो सड़कों पर उग्र प्रदर्शन और चौक-चौराहों पर नेताओं द्वारा एक-दूसरे के पुतला दहन तक पहुंच गया है.

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नौकरशाहों की लोकतंत्र में आस्था नहीं

देश के आला अफसरों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई आस्था नहीं है. नौकरशाह मनमाने ढंग से प्रशासन चलाना चाहते हैं और चला भी रहे हैं. संवैधानिक बाध्यता के कारण विधानसभा एवं मंत्री परिषद आदि संस्थाओं की कार्यवाही में वे औपचारिकता ही पूरी करते हैं.

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तीन चौथाई कुंभ ऐसे ही निबट गया है

हरिद्वार का महाकुंभ 2010 जैसे तैसे तीन चौथाई निबट चुका है. मुख्य स्नान शेष है जो अगले पंद्रह दिनों में संपन्न हो जाएगा और तब मेले का प्रशासन और पुलिस दोनों ही लंबी तान लेंगे.

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भ्रष्टाचार के महासागर की छोटी मछलियों का शिकार

मध्य प्रदेश सरकार ने भ्रष्टाचार से हो रही बदनामी से त्रस्त होकर प्रशासन को सा़फ-सुथरी छवि देने का अभियान चला रखा है. पिछले दिनों राज्य भर में साठ से अधिक छोटे कर्मचारी दंडित किए जा चुके हैं. अब तक पुलिस आरक्षक, पटवारी, कार्यालयों के बाबू एवं वनरक्षक जैसे छोटे कर्मचारी रिश्वत लेते या जबरन उगाही करते पकड़े गए और उन्हें तत्काल निलंबित कर दिया गया.

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