प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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लोकपाल समस्या का समाधान नहीं है

जब हमने समाज में सुधार के लिए संसदीय लोकतंत्र को स्वीकार कर लिया है तो फिर इसके लिए किसी तरह की कोई जल्दबाज़ी करने की आवश्यकता नहीं है. हमें सांसदों और विधायकों की गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार प्रयास करना है, जिससे शासन की गुणवत्ता में सुधार होगा.

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नौकरशाहों की लोकतंत्र में आस्था नहीं

देश के आला अफसरों की लोकतांत्रिक व्यवस्था में कोई आस्था नहीं है. नौकरशाह मनमाने ढंग से प्रशासन चलाना चाहते हैं और चला भी रहे हैं. संवैधानिक बाध्यता के कारण विधानसभा एवं मंत्री परिषद आदि संस्थाओं की कार्यवाही में वे औपचारिकता ही पूरी करते हैं.

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