चाणक्य नीति: जिनकी जेब में होते हैं पैसे उन्हीं को मिलती है ये चार चीजें

चाणक्य नीति, जिसके बारे में शायद ही ऐसा कोई होगा जो नहीं जानता होगा. अर्श से लेकर फर्श तक हर

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फारुख अब्दुल्ला ने कहीं बड़़ी बात

जम्मू-कश्मीर के पूर्व मुख्यमंत्री और नेशनल कॉन्फ्रेंस प्रमुख फारुख अब्दुल्ला ने कहा है कि राजनीति बुरी नहीं बल्कि राजनीतिज्ञ बुरे

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सहारा को SC की चेतावनी, 19 तारीख तक पैसे नहीं लौटाए तो जाना पड़ेगा जेल

नई दिल्ली : सहारा सेबी मामले में सुप्रीम कोर्ट ने सहारा प्रमुख सुब्रत रॉय को चेतावनी दी है जिसके तहात

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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इस बदहाली के लिए ज़िम्मेदार कौन है

आप जब इन लाइनों को पढ़ रहे होंगे तो मैं नहीं कह सकता कि रुपये की अंतरराष्ट्रीय बाज़ार में या डॉलर के मुक़ाबले क़ीमत क्या होगी. रुपया लगातार गिरता जा रहा है. अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसियों ने न केवल बैंकों की, बल्कि सभी वित्तीय संस्थाओं की रेटिंग घटा दी है. कुछ एजेंसियों ने तो हमारे देश की ही रेटिंग घटा दी है.

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बैंकों का राष्ट्रीयकरण

पिछले कुछ वर्षों से एक और क़िस्म की बैंकिंग प्रणाली भारत में चालू हुई है. यह है सहकारिता बैंक. कुछ किसान, मज़दूर अथवा उपभोक्ता अपने-अपने सीमित दायरे में सहकारिता बैंक खोल लेते हैं. सारे सदस्य थोड़ा-थोड़ा करके अपना फंड जमा करते हैं. शासन से मान्यता मिलने पर सरकार का सहकारी विभाग उस बैंक को पर्याप्त आर्थिक मदद दे देता है.

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शघांई

आए दिन खबरों के ज़रिए दौलत के प्रति ब़ढते नेताओं के लालच का प्रमाण मिलता रहता है. इसी विषय को लेकर डायरेक्टर दिबाकर बनर्जी ने एक फिल्म बनाई है. फिल्म राजनीतिज्ञों और उनकी धन कमाने की लालसा के इर्द-गिर्द घूमती है.

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सबसे आसान माध्यम

इतना सब कह चुकने के बाद एक मूल प्रश्न खड़ा होता है कि पैसा है क्या? किस चीज को हम पैसा कहें? कोई भला आदमी बहुत पैसे वाला है तो यह पैसा है क्या? अमुक व्यक्ति के पास बहुत रुपया है, यह रुपया है क्या? यानी रुपया-पैसा, धन-दौलत, रकम-वित्त, कुछ भी कहें, यह जानना ज़रूरी है कि इसका स्वरूप क्या है, इसकी रूपरेखा क्या है?

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सच बोलना अपराध नहीं है

सेवा में,

श्री वीरभद्र सिंह जी,

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री

1, जंतर मंतर रोड,

नई दिल्ली-110001

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सवाल देश की सुरक्षा का है, फिर भी चुप रहेंगे? अन्‍ना हजारे ने प्रधानमंत्री से मांगा जवाब…

आदरणीय डॉ. मनमोहन सिंह जी,

पिछले कुछ महीनों की घटनाओं ने भारत की सुरक्षा व्यवस्था को लेकर देश की जनता को का़फी चिंतित किया है. लेकिन अधिक चिंता का विषय यह है कि क्या इतनी चिंताजनक घटनाएं हो जाने के बावजूद कुछ सुधार होगा? अभी तक की भारत सरकार की कार्रवाई से ऐसा लगता नहीं कि कुछ सुधरेगा.

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अतिरिक्त धन का मायाचक्र

अब राष्ट्र के लिए महत्व की बात है-कि नई-नई कंपनियां खोलकर नए-नए काऱखाने या फैक्टरियां लगाई जाएं, उत्पादन बढ़ाया जाए, उसमें ही फालतू पड़े सब रुपयों का उपयोग होना चाहिए. मान लीजिए आपके पास 5 लाख रुपये फालतू पड़े हैं. आप शेयर बाज़ार में किसी कंपनी के शेयर ख़रीदते हैं.

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हथियार के दलालों का असली चेहरा

अवकाश प्राप्त सैन्य अधिकारी, बड़ी सी तोंद और काम हथियारों की ख़रीद-बिक्री, लेकिन हथियार के ऐसे सौदागर अब ग़ायब हो गए हैं. अब इनकी जगह युवा या कम से कम अधेड़, लेकिन सौम्य चेहरे वाले आर्म्स डीलरों ने ले ली है. ये नए आर्म्स डीलर अपनी फिटनेस का ख़ास ख्याल रखते हैं, गोल्फ क्लबों में जाते हैं, अपने पहनावे पर ख़ास ध्यान देते हैं और इनकी भाषा वैश्विक होती है.

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महाराष्‍ट्रः चंदे के फंदे में मंत्री

पावर और पैसा आज हर महत्वाकांक्षी व्यक्ति की चाहत है. जिसके पास पावर है, उसके पास पैसे वाले स्वयं चले आते हैं. व्यवसायी, ठेकेदार एवं उद्योगपति पावर के चारों ओर सौर मंडल के ग्रहों की तरह चक्कर लगाते नज़र आते हैं. उनकी निकटता पाकर मंत्री-संतरी भी उनसे अपना उल्लू सीधा करने में गुरेज़ नहीं करते.

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शो का मज़ेदार कॉन्सेप्ट

एक अजब-ग़ज़ब रियलटी शो आया है, जो शरणार्थियों और बेघरों के लिए है. नीदरलैंड में एक रियलिटी शो शरणार्थियों के लिए पैसा जीतने का मौक़ा लेकर आया है. इस शो के ज़रिए शरणार्थी पैसा तो जीत सकते हैं, लेकिन यह उनके अपने घर वापस जाने के काम आएगा.

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कांग्रेस को दोस्ती निभाना नहीं आता

वे सांसद कहां हैं, जो अन्ना हजारे को यह समझा रहे थे कि संसद की एक गरिमा होती है, उसे बाहर से डिक्टेट नहीं किया जा सकता है. वे आज चुप क्यों हैं? संसद की गरिमा बचाने के लिए, देश के लोकतंत्र को बचाने के लिए उन्हें अपनी चुप्पी तोड़नी चाहिए. कैश फॉर वोट भारत के इतिहास का सबसे शर्मनाक स्कैम है. देश के सांसद बिकते हैं, ऐसा सोचकर ही घिन होती है.

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समाज का अभिशाप, अमीरों का शौक

एक संयुक्त परिवार को ले लीजिए. आप परिवार के बड़े हैं. कई बच्चे हैं. रुपये आपके पास मान लीजिए 500 हैं. सबसे पहला प्रश्न उठेगा कि पहले-पहल क्या चीज़ खरीदी जाए, उसके बाद क्या? इस तरह परिवार की ज़रूरत की चीज़ों की सूची बनेगी और आप वस्तुएं उपलब्ध कर लेंगे. मान लीजिए, खाने के लिए घर में अन्न नहीं है.

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आय का सामान वितरण ही समाजवाद है

अब स़िर्फ आ़खिरी योजना यानी समाजवादी वित्त-वितरण की योजना का परीक्षण ही शेष रहा. आपको ध्यान होगा कि यह बात इस विषय पर विचारणीय हुई कि धन का बंटवारा किस ढंग पर संतोषप्रद या उपादेय हो सकता है. इस सिलसिले में जब हमने यह विचार किया कि हर आदमी को उतना ही मिले, जितना वह अर्जन करता है, बिना अर्जन किए नहीं मिले तो यह तरीक़ा बिल्कुल मूर्खतापूर्ण सिद्ध हुआ.

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वर्ग तंत्र और यथास्थितिवाद

पांचवीं योजना वर्ग विभाजन की है. राष्ट्र को या समाज को कई वर्गों में विभक्त मान लिया जाता है और प्राय: हर एक वर्ग की अलग-अलग आय निर्धारित होती है. मान लीजिए, एक वर्ग निम्न कोटि के काम करने वाले मज़दूरों, क़ुलियों, भारवाहकों का है, उन्हें औसतन 70 रुपये माहवार मिलता है. दूसरा वर्ग प्रोफेसर, डॉक्टर इत्यादि लोगों का है, जिन्हें क़रीब 1000 रुपये माहवार मिलता है.

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जिसकी लाठी उसकी भैंस

तीसरी योजना है कि जिसके पास ताक़त हो, वह ले ले. जो संभाल सके, वह रखे. यदि यह कार्यान्वित हुई तो विश्व में कहीं भी शांति या सुरक्षा का नामोनिशान ही नहीं रहेगा. अगर सब ताक़त में या चालाकी में समान हों तो संघर्ष और भी भयानक होंगे, परिणामस्वरूप कोई कुछ भी हथिया न सकेगा. बालक-वृद्ध कम ताक़त वाले हैं, युवा व्यक्ति अधिक ताक़त वाले हैं.

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जो जितने का पात्र है, उतना उसे क्यों न मिले

दूसरी योजना है कि हर एक को उतना मिले, जितने का वह पात्र है. बहुत से व्यक्ति, ख़ासकर जो आराम से हैं, कहते हैं और समझते हैं कि यही ठीक है. जो जितने का पात्र है, उतना उनको मिलता है, मिला हुआ है.

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आइवरी कोस्ट: सत्ता की लड़ाई में पिसी जनता

आइवरी कोस्ट के निर्वाचित राष्ट्रपति अलासान वाएतरा के समर्थक भारी हथियारों के साथ अबिजान में घूम रहे हैं. साथ ही आइवरी कोस्ट में संयुक्त राष्ट्र के हेलीकॉप्टरों ने भी निवर्तमान राष्ट्रपति लोरांग बैग्बो की सेनाओं पर गोलीबारी शुरू कर दी है. आइवरी कोस्ट में पिछले साल 28 नवंबर को हुए चुनावों में राष्ट्रपति पद के दोनों उम्मीदवारों, अलासान वाएतरा और लोरांग बैग्बो ने अपनी-अपनी जीत का ऐलान किया था.

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पैसा, ग्‍लैमर और फटाफट क्रिकेट

वर्ल्ड कप की जीत का खुमार उतरा भी नहीं कि आईपीएल ने दस्तक दे दी है. एक बार फिर पूरा देश क्रिकेट की खुमारी में डूबेगा, लेकिन इस बार मुक़ाबला थोड़ा अलग होगा. आईपीएल 4 में क्रिकेट के सूरमा अपने देश के लिए नहीं, बल्कि अपनी-अपनी स्टेट टीमों के लिए खेलेंगे. मसलन कोई किंग्स इलेवन तो कोई सुपरकिंग्स की दावेदारी के लिए मैदान में उतरेगा.

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भारत को भारतीयों ने ज्यादा लूटा

यह 19वीं शताब्दी की बात है. ब्रिटिश जमकर भारत को लूट रहे थे और सारा पैसा इंग्लैंड ले जा रहे थे. यानी भारत से धन की निकासी अपने चरम पर थी. तब कांग्रेस के पुरोधाओं के लिए ब्रिटिश शासन की आलोचना का यही मुख्य आधार रहा.

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तिरुपति होम्स कैंसर अस्पताल बनाएगा

तिरुपति होम्स ने अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारियों को पूरा करते हुए दरभंगा में एक कैंसर अस्पताल भवन के निर्माण की घोषणा की है. तिरुपति होम्स लिमिटेड के सीएमडी शशिभूषण सिन्हा ने बताया कि छह करोड़ की लागत से बनने वाले अस्पताल भवन का पूरा खर्चा कंपनी उठाएगी.

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आईपीएल- 4 : इंडियन पैसा लीग

पिछले साल आईपीएल को चौथी दुनिया ने इंडियन फिक्सिंग लीग बताया था. यह बात सही साबित हुई. टूर्नामेंट शुरू होने से एक महीने पहले ही आपको बता दिया था कि मुंबई फाइनल खेलने वाला है. यह बात भी सच साबित हुई. चौथी दुनिया ने खुलासा किया था कि आईपीएल विदेशी कंपनियों के पैसों चलाया जा रहा है.

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