साधु-संतों को समाज में नैतिकता, प्यार, स्नेह, सहिष्णुता, अपरिग्रह का बुनियादी संदेश, जो सनातन धर्म का आधार है, फैलाना चाहिए. उन्हें वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवन्ति सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया याद रखना चाहिए, जो भारतीय समाज का पांच हज़ार वर्ष से ज़्यादा समय से आधार रहा है, पर वे तो इसे भूलते जा रहे हैं.