शेखावाटी महोत्सव : राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत का सजीव चित्रण

  Photo credit : Prabhat Pandey  राजस्थान अपनी विरासत और संस्कृति के लिए जाना जाता है. यहां का हर जिला

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स्वच्छ पेयजल उपलब्ध कराने की मुहिम

जल मनुष्य की बुनियादी ज़रूरत है, इसके बगैर जीवन संभव नहीं है, लेकिन दुनिया भर में लगभग 100 करोड़ लोग

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जैविक खेती : और कारवां बढ़ता ही जा रहा है…

एक कहावत है कि कोई भी मुश्किल ऐसी नहीं है, जो आसान न हो जाए. बस किसी मुश्किल को आसान

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किसानों की सफलता और संस्कृति का संगम

भारत में हर जगह किसी न किसी तरह के मेले का आयोजन होता है. उस मेले का केंद्र कोई वस्तु

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ग्रामीण भारत में आधुनिक शिक्षा की अनूठी पहल

शेखावाटी शिक्षा समाज की नींव होती है, शिक्षा एक मजबूत एवं समृद्ध राष्ट्र का निर्माण करती है. शिक्षा मानव के

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पर्यावरण के अनुकूल है इनोवेटिव चूल्हा

सूर्यास्त होते ही एक बार फिर हर रसोई घर में हलचल शुरू हो जाती है, लेकिन यह कार्य पारंपरिक चूल्हों

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डेेयरी उद्योग फायदा ही फायदा

पशुपालन हमारे देश में ग्रामीणों के लिए स़िर्फ आमदनी का ज़रिया ही नहीं रहा, बल्कि यह देशवासियों की सेहत से

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हाईटेक खेती ने जीवन में बिखेरे खुशियों के रंग

शेखावाटी देश के ज़्यादातर किसान अब भी पारंपरिक तरीकों से खेती करते हैं, जो अक्सर घाटे का सौदा साबित होती

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कृषि क्षेत्र के कायाकल्प की जरुरत

देश में कृषि नीति के संबंध में जो राजनीतिक नेतृत्व की जरूरत थी या फिर किरदार होना चाहिए था वह

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सांझा चूल्हा से जलता है कई घरों का चूल्हा

कहते हैं जहां चाह वहां राह. शेखावाटी के झूंझूनू जिले के नवलगढ़ तहसील से कुछ ही दुरी पर बसे नाहरसिघानी

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स्वयं सहायता समूह से संवरते परिवार

राजस्थान के शेख़ावाटी क्षेत्र में स्वयं सहायता समूह का आग़ाज़ मोरारका फाउंडेशन ने वर्ष 1993 में किया था. पहले स्वयं

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मोरारका फाउंडेशन : सौर लालटेन से रोशन होती जिंदगी

एक तो गरीबी और बचपन से ही विकलांगता की मार झेल रहे व्यक्ति के लिए न तो कोई सरकारी योजना

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जैविक खेती से किसानों को मिली नई ज़िन्दगी

ऐसे दौर में जब भारत के विभिन्न क्षेत्रों के किसान तरह-तरह की समस्याओं से परेशान होकर आत्महत्या करने के लिए

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जुझारू महिला ने दिया खेती को नया आयाम

भारतीय समाज के लिए यह सुखद तस्वीर है कि देश की आधी आबादी अब चहारदीवारी से बाहर निकलकर पुरुषों की

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ट्रे-कल्टीवेशन तकनीक : किसानों में जगाती उम्मीद

मोरारका फाउंडेशन ने ट्रे-कल्टीवेशन की नई तकनीक के सहारे खेती को जो आयाम दिए हैं, उससे किसानों में एक नई

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शेखावटी- जैविक खेती : …और कारवां बनता जा रहा है

पंजाब में नहरों का जाल है. गुजरात और महाराष्ट्र विकसित राज्य की श्रेणी में हैं. बावजूद इसके यहां के किसानों को आत्महत्या करनी प़डती है. इसके मुक़ाबले राजस्थान का शेखावाटी एक कम विकसित क्षेत्र है. पानी की कमी और रेतीली ज़मीन होने के बाद भी यहां के किसानों को देखकर एक आम आदमी के मन में भी खेती का पेशा अपनाने की इच्छा जागृत होती है, तो इसके पीछे ज़रूर कोई न कोई ठोस वजह होगी. आखिर क्या है वह वजह, जानिए इस रिपोर्ट में:

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सेवानिवृत जवानों के पुनर्वास के लिए : भारतीय सेना का ऐतिहासिक क़दम

शहरों और गांवों में शांति से रहने वाले हम आप जैसे लोगों को शायद ही कभी यह ध्यान में आता है कि यह शांति और आज़ादी एक ही झटके में खत्म हो जाए, अगर देश के लाखों बहादुर जवान बॉर्डर पर तैनात न रहें. हम इंडियन आर्मी और सीमा पर तैनात लाखों जांबाज़ों को सलाम करते हैं, जो अपने परिवार से दूर, अपने गांव से दूर, अपने दोस्तों से दूर, हिमालय की ऊंचाइयों और रेगिस्तान की गर्मी में रहकर देश की सुरक्षा करते हैं.

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शेखावाटीः बदलाव और कामयाबी का सफर जारी है

करीब दो महीने से चौथी दुनिया आपको लगातार शेखावाटी के बदलते चेहरे के बारे में बता रहा है. अलग-अलग कहानियों के ज़रिए यह बताने की कोशिश की जा रही थी कि कैसे शेखावाटी विकास की नित नई इबारत लिख रहा है. जैविक खेती करने वाले किसानों ने अपनी सफलता की कहानी खुद अपनी ज़ुबानी बताई. महिलाओं और युवतियों की कामयाबी ने साबित किया कि घूंघट उनके विकास में बाधक नहीं है.

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शेखावटी उत्‍सव 2010

राजस्थान के अर्द्धशुष्क रेगिस्तानी क्षेत्र का भू-भाग शेखावाटी. ह इलाका सेठों की जन्मस्थली और वीरों की कर्मभूमि रहा है. रेतीले धारों के बीच यहां की हवेलियां और उन पर बने भित्ति चित्रों की भव्यता बेमिसाल है. इस क्षेत्र की प्रचलित लोक कलाएं, हस्तशिल्प और जीवनशैली पूरे देश में अपनी अमिट छाप रखती हैं.

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