आतंकवाद : वास्तविकता को पहचानने की ज़रूरत

सैन्य अभियान समस्या का कोई समाधान नहीं है. इस मुद्दे के साथ कई पहलू जुड़े हैं, जिनके लिए एक बहुआयामी

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प्रधानमंत्री जी, देश की ओर ईमानदारी से देखिए

लोकसभा और राज्यसभा में एक दिन का शोरशराबा और बात ख़त्म. केवल रस्म अदायगी हुई. एक पत्रिका ने छापा कि भारत सरकार की एक एजेंसी फोन टेप कर रही है. नाम आए, नीतीश कुमार और दिग्विजय सिंह के. पर यह सतही सच्चाई है. यह हमारा ध्यान बंटाने की सफल कोशिश हुई है. साजिश बहुत गहरी है, जिसके सिरे न्यायाधीशों, राजनीतिज्ञों और पत्रकारों तक पहुंचते हैं.

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सीआईए और मोसाद का स्माइल इंडिया 2015

यह अमेरिकी खु़फिया एजेंसी सीआईए का मिशन हिंदुस्तान 2015 है, जो भारत को टुकड़े-टुकड़े कर इसके वज़ूद को ख़त्म करने की ख़ौ़फनाक साज़िश है. इस मिशन पर अमेरिकी खु़फिया एजेंसी सीआईए ने अपनी पूरी ताक़त झोंक दी है. सीआईए की मंशा है कि

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सीआईए और मोसाद के खतरनाक खेल से सावधान रहें

हमारे देश के ऊपर एक गंभीर खतरा मंडरा रहा है. जिन पर इस ख़तरे से निपटने की ज़िम्मेदारी है, वे हाथ पर हाथ रखकर बैठे हैं. एक तरह से उनका साथ दे रहे हैं. हमारे सरकारी तंत्र को भी इस खतरे के बारे में पता है, लेकिन वह कुछ भी करने में असमर्थ है.

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मोसाद यानी ख़ौ़फ का दूसरा नाम

महिलाओं का सबसे बड़ा हथियार है सेक्स. इस दौरान इधर-उधर की बातें करना इनके लिए बड़ी समस्या नहीं है, लेकिन इसके लिए भी ख़ास साहस की ज़रूरत होती है. बात स़िर्फ दुश्मन के साथ सोने की नहीं, बल्कि ख़ु़फिया जानकारी हासिल करने की होती है.

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मोसाद का मिशन या युगांडा पर हमला

पिछले अंक में आपने पढ़ा कि किस तरह एयर फ्रांस के विमान का अपहरण किया गया और इस वारदात में कैसे एक राष्ट्रपति ने अपनी भूमिका निभाई. एक समय तो इज़रायली सरकार इन अपहरणकर्ताओं के सामने घुटने टेक चुकी थी, लेकिन मोसाद ने अपनी चालाकी से इज़रायल को न स़िर्फ मुसीबत से बाहर निकाला, बल्कि दुश्मनों को मुंहतोड़ जवाब भी दिया. आख़िर मोसाद ने कैसे इस मिशन को अंजाम दिया, आइए जानते हैं इस अंक में…

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जब राष्ट्रपति ने दिया अपहरणकर्ताओं का साथ!

तारीख़ 27 जून 1976 और एयर फ्रांस की फ्लाइट नंबर 139. बारह बजकर तीस मिनट पर यह विमान 248 यात्रियों एवं 12 क्रू मेंबर्स को लेकर एथेंस से पेरिस के लिए रवाना हुआ, लेकिन उड़ान भरने के कुछ समय बाद ही एक सनसनीखेज़ ख़बर आई. यह ख़बर थी विमान के अपहरण की. उसके बाद तो पूरे विमान में अफरातफरी मच गई. अपहरण की इतनी बड़ी वारदात हो चुकी थी, लेकिन किसी को अभी तक यह समझ में नहीं आ रहा था कि एयर फ्रांस के विमान का अपहरण आख़िर क्यों किया गया है?

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मोसाद का पाकिस्तानी मोहरा

2001 में आई एक ख़ु़फिया रिपोर्ट के मुताबिक़, मोसाद और रॉ पाकिस्तान के 20 से लेकर 30 साल तक के युवकों को भारत आने का झांसा दे रही थीं, ताकि उन्हें जासूसी और नक़ली नोटों के कारोबार के मामले से जुड़ा बताकर अपनी साज़िश के जाल में फंसाया जा सके. उसके बाद इन पाकिस्तानी युवकों का ब्रेनवॉश कर भारत और मोसाद के लिए जासूसी करने पर मजबूर किया जा सके.

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