पहले वादे अब शब्दजाल में फंसाने की कोशिश

देश की राजनीति में उथल-पुथल है, क्योंकि अंधराष्ट्रीयता के शब्दजाल ने तथ्यात्मक बहस की जगह ले ली है. सुरक्षा बल,

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यही न्याय है तो अन्याय क्या है

सवाल मुस्लिम संगठनों का भी है. मुसलमानों के नेता, मुसलमानों के संगठन सामाजिक हों या राजनीतिक हों, इनमें से किसी

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सुप्रीम कोर्ट ने दिखाई आशा

चलिए, आशा की किरण तो दिखाई दी. भारत में जैसा राजनैतिक माहौल है और जिस तरह राजनैतिक दल अपनी सोच बदल रहे हैं, उससे नहीं लगता कि कुछ बुनियादी बदलाव आसानी से हो पाएंगे. वाई एस आर ने आंध्र प्रदेश में मुसलमानों को चार प्रतिशत आरक्षण दिया था, जिसका वायदा उन्होंने अपने घोषणापत्र में किया था.

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