नालंदा : अधिकारी-कर्मी मिलकर खा गए सात हज़ार क्विंटल चावल

सुशासन के तमाम दावों के बावजूद, बिहार के सरकारी सिस्टम में सेंधमारी रुक नहीं रही है. सरकारी अधिकारियों-कर्मचारियों की मिलीभगत

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सामने आएंगे नालंदा भग्नावशेष के कई सच

प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय का भग्नावशेष विश्व धरोहर में शामिल हो गया. गत दिनों टर्की की राजधानी इस्ताम्बूल में वर्ल्ड हेरिटेज

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मगध विश्वविद्यालय : बंटवारे के सवाल पर बवाल

बिहार के प्रतिष्ठित विश्वविद्यालय के रूप में शुमार मगध विश्वविद्यालय के बंटवारे के सवाल पर हंगामा शुरू हो गया है.

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राजगीर की पहचान गर्म कुंड का अस्तित्व संकट में : गंगा-यमुना कुंड की धार हुई बंद

अन्तरराष्ट्रीय पर्यटन स्थल राजगीर पूरी दुनिया में अपने प्राकृतिक रूप और ऐतिहासिक महत्व के लिए चर्चित रहा है. कभी दुनिया

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विधान परिषद स्थानीय निकाय चुनाव : धन और बाहुबल की आजमाइश

पिछले विप चुनाव में जिस दल ने अधिक संख्या में धनबलियों-बाहुबलियों का समर्थन किया, उसका सफलता का प्रतिशत उतना ही

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मई में होंगे मध्‍यावधि चुनाव

अंतत: कांग्रेस पार्टी और सरकार ने फैसला कर लिया कि उन्हें बजट सत्र के दौरान या बजट सत्र समाप्त होते ही चुनाव में चले जाना है. देश की आर्थिक स्थिति तेज़ी से बिगड़ रही है. इसलिए यह फैसला लिया गया. यह भी फैसला लिया गया कि क़डा बजट लाया जाए. जितने भी उपाय आम जनता को परेशानी में डालने वाले हो सकते हैं, उन उपायों को लागू कर दिया जाए. आने वाला बजट भारत के संविधान में दिए गए सारे आश्वासनों और विश्वासों के खिला़फ होने वाला है.

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नालंदा के गौरव के साथ खिलवाड़: यह विश्वविधालय भ्रष्टाचार का अड्डा बन गया है

हिंदुस्तान को सचमुच किसी की नज़र लग गई है. ईमानदारी से कोई काम यहां हो नहीं सकता है. निचले स्तर के अधिकारी अगर भ्रष्टाचार करते हैं तो ज़्यादा दु:ख नहीं होता है, लेकिन जिस प्रोजेक्ट के साथ प्रोफेसर अमर्त्य सेन एवं पूर्व राष्ट्रपति अब्दुल कलाम जैसे लोग जुड़े हों और वहां घपलेबाजी हो, बेईमानी हो, ग़ैरक़ानूनी और अनैतिक काम हों तो दु:ख ज़्यादा होता है.

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पाटलिपुत्र का दर्द

ईसा से 304 वर्ष पूर्व भारत आए प्रसिद्ध ग्रीक राजदूत मेगास्थनीज ने यदि यह न लिखा होता कि भारत के इस महानतम नगर पाटलिपुत्र (पटना) की सुंदरता और वैभव का मुक़ाबला सुसा और एकबताना जैसे नगर भी नहीं कर सकते, तो शायद आज भारत के गंदे नगरों में गिना जाने वाला पटना कभी इतना सुंदर था, यह मानने के लिए लोग तैयार न होते.

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मगध विश्‍वविद्यालयः बेहतर भविष्‍य की ओर अग्रसर

जिस प्रकार प्राचीन नालंदा विश्वविद्यालय अपनी शैक्षणिक व्यवस्था तथा पठन-पाठन के उच्च मापदंड के कारण पूरी दुनिया में प्रसिद्ध था, ठीक उसी प्रकार अब मगध विश्‍वविद्यालय भी देश-दुनिया में उच्च शिक्षा के अंतरराष्ट्रीय मानक पर खरे उतरते हुए अपनी पहचान बनाने में सफल हो रहा है.

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नालंदा:एनडीए की हैट्रिक

नीतीश कुमार के गृह ज़िले नालंदा में इस बार एनडीए ने जीत की हैट्रिक बनाकर सूबे में एक नया कीर्तिमान स्थापित किया है. ग़ौरतलब है कि फरवरी 2005 और अक्टूबर 2005 में ज़िले में हुए विधानसभा चुनाव में एनडीए ने सभी आठों सीटों पर अपनी जीत दर्ज कर कीर्तिमान स्थापित किया था.

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नालंदाः जातीय समीकरण हावी रहेगा

भगवान महावीर और बुद्ध की नगरी नालंदा में मतदाताओं को रिझाने में प्रत्याशियों के पसीने छूट रहे हैं. ज़िले में नए परिसीमन के बाद आठ विधानसभा क्षेत्रों में से चंडी विधानसभा क्षेत्र विलोपित होने से अब केवल सात विधानसभा क्षेत्र रह गए हैं. यह क्षेत्र नीतीश कुमार का गृह ज़िला है, इसलिए लोगों का इस पर विशेष ध्यान है.

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अरुण कुमार को जदयू में लाने की तैयारी

बिहार की राजनीति में मौक़ा और लाभ-हानि के हिसाब से दल-परिवर्तन नेताओं का पुराना शगल रहा है. हालात यह हैं कि दलबदल, अवसरवादिता और मौक़ापरस्ती से शायद ही कोई अछूता रहा हो. इस इतिहास और परंपरा को फिर से दोहराया जा रहा है. इस परंपरा के नए ध्वजवाहक बने हैं जहानाबाद के पूर्व सांसद डॉ. अरुण कुमार.

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अस्थावां विधानसभा क्षेत्र : आसान नहीं विधायक की राह

बिहार विधान सभा के आगामी चुनाव में नए परिसीमन के अनुसार अब नालंदा ज़िले के आठ विधान सभा की जगह सात विधान सभा क्षेत्र में चुनाव होंगे. नए परिसीमन में जहां एक ओर चंडी विधान सभा क्षेत्र को विलोपित कर उसे हरनौत विधान सभा क्षेत्र में मिला दिया गया है, वहीं राजगीर (सुरक्षित) विधान सभा क्षेत्र के कतरीसराय प्रखंड के पांच पंचायत के लगभग तीस हज़ार मतदाताओं को अस्थावां विधान सभा से जोड़ दिया गया है.

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नालंदा में नीतीश को पसीना बहाना पड़ेगा

बिहार में विधानसभा चुनाव की धमक अब सा़फ सुनाई देने लगी है. सभी ज़िलों की तरह नालंदा में भी चुनावी सुगबुगाहट और कहीं-कहीं अकुलाहट दिखाई देने लगी है. जयंतियों और जातीय सम्मेलनों की धूम मची है. धरना-प्रदर्शन की बा़ढ आई हुई है. ज़िला मुख्यालय, बिहार शरीफ का अस्पताल चौक, टाउन हॉल, श्रम कल्याण मैदान, समाहरणालय परिसर एवं नगर की सड़कें नित नए नारों से रूबरू हो रही हैं.

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