खत्म नहीं हो रहा नक्सलियों का खौ़फ

केंद्रीय सुरक्षा बलों तथा राज्य पुलिस के लाख प्रयासों के बाद भी झारखंड की सीमा से लगे बिहार के गया

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लेवी वसूल नक्सली बन रहे अरबपति

नक्सल अभियान के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक आरके मल्लिक का मानना है कि टीपीसी नक्सलियों के खिलाफ लगातार अभियान चला रहा

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बिहार के पहले सोलर पार्क को नक्सलियों ने उड़ाया, थम नहीं रहे नक्सली हमले

झारखंड से लगे बिहार के सीमावर्ती क्षेत्रों में प्रशासन की लाख कोशिशों के बाद भी लेवी के लिए होने वाली

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विकास पर लेवी की मार

बिहार  में नक्सली अपने प्रभाव क्षेत्र वाले इलाकों में सुरक्षा बलों को पैठ नहीं जमाने देना चाहते हैं, इसके अलावा

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नक्सलियों ने जारी किया ऑडियो, बताया क्यों किया सुकमा में हमला

नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया)। छत्तीसगढ़ में नक्सलियों के हमले में 25 जवान शहीद हो गए थे। मामला तब और

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नक्सली हमले में घायल जवान शेर महम्मद ने बताया वो मंजर जब हमला हुआ

नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया)। छत्तीसगढ़ में नक्सिलयों ने सीआरपीएफ के जवानों पर घात लगाकर हमला कर दिया। छिप कर

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नक्सलियों के निशाने पर माननीय

  बिहार में राजनीति को सशक्त बनाने में जितना योगदान मगध का है, उससे कहीं ज्यादा योगदान प्रतिबंधित नक्सली संगठनों

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वतन पर मरने वालों का क्या यही बाकी निशां होगा!

28 दिसंबर की सुबह मलाक बलऊ गांव वालों के लिए हैरान कर देने वाली थी. इसका कारण यह है कि

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सरकार आदिवासियों की सुध कब लेगी

छत्तीसगढ़ को क़ुदरत ने अपार संपदा से नवाज़ा है, जिसका उपयोग यदि सही ढंग से किया जाए तो यह क्षेत्र के विकास में का़फी सहायक सिद्ध हो सकता है. इस नक्सल प्रभावित क्षेत्र में नाममात्र विकास हो पा रहा है.

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सुशासन के बावजूद नक्‍सलवाद हावी

विकास और नक्सलवाद के बीच क्या संबंध हो सकता है? सरकारी जवाब तो यही होता है कि नक्सलवादी विकास की राह में सबसे बड़ी बाधा हैं, लेकिन चौथी दुनिया की तहक़ीक़ात से एक आश्चर्यजनक सत्य का ख़ुलासा होता है. वैसे तो देश के क़रीब 12 राज्य और लगभग 200 ज़िले नक्सलवाद की गिरफ़्त में हैं. बिहार के भी अधिकांश ज़िले नक्सलवाद की चपेट में हैं.

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बिनायक सेन का मीडिया ट्रायल

डॉ. बिनायक सेन के मामले में आए अदालती फैसले के बाद लोकतांत्रिक ढांचे के तीन स्तंभ न्यायपालिका, कार्यपालिका एवं विधायिका राष्ट्रीय स्तर पर आलोचना के केंद्र में हैं, पर चौथा स्तंभ मीडिया अब तक इस चर्चा से बाहर है.

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औरंगाबादः सब कुछ दांव पर लगा है

चित्तौड़गढ़ के नाम से प्रसिद्ध नक्सल प्रभावित औरंगाबाद ज़िले के छह विधानसभा क्षेत्रों में इस बार विधानसभा चुनाव की जंग कम रोचक नहीं है. प्रत्याशियों के साथ-साथ उनके आकाओं की साख भी दांव पर लगी है. औरंगाबाद के मतदाता भी यह स्वीकार करते हैं.

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नालंदाः जातीय समीकरण हावी रहेगा

भगवान महावीर और बुद्ध की नगरी नालंदा में मतदाताओं को रिझाने में प्रत्याशियों के पसीने छूट रहे हैं. ज़िले में नए परिसीमन के बाद आठ विधानसभा क्षेत्रों में से चंडी विधानसभा क्षेत्र विलोपित होने से अब केवल सात विधानसभा क्षेत्र रह गए हैं. यह क्षेत्र नीतीश कुमार का गृह ज़िला है, इसलिए लोगों का इस पर विशेष ध्यान है.

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पुस्‍तक अंशः मुन्‍नी मोबाइल- 41

मुन्नी तैयार होकर इटाड़ी बाज़ार पहुंच गई. यहीं उसका बैंक है. बैंक में जब उसने बीस हज़ार रुपये निकालने के लिए फॉर्म भरा तो मैनेजर ने इतने पैसे एक साथ देने से मना कर दिया. वह मैनेजर पर झुंझलाई, लेकिन बात नहीं बनी. मैनेजर ने साफ कहा, किसी की गारंटी लाओ, तभी इतने पैसे मिलेंगे. मुन्नी को उसी दिन वापस साहिबाबाद लौटना था.

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नेताओं के हथियार से नक्‍सली कर रहे प्रहार

बिहार-झारखंड में नक्सली संगठनों की बढ़ी सक्रियता और बेलगाम हरकतों ने जहां सुरक्षा तंत्र को पूरी तरह से हलकान कर रखा है, वहीं आम-अवाम भी उनकी गतिविधियों से पस्त दिख रहा है. बस्तियों-जंगलों में गोलियों की बौछार कर या फिर सड़कों पर बारूदी सुरंगों का विस्फोट कर दहशत फैलाने वाले नक्सलियों ने आम जनता और सरकारी मशीनरी को आतंकित करने का एक नया तरीका ईजाद किया है.

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प्रधानमंत्री काग़ज़ की नाव के कप्तान न बन जाएं

इसे मनमोहन सिंह का सबसे बड़ा विरोधाभास कहिए या फिर उनकी सबसे बड़ी मजबूरी, लेकिन सच्चाई यही है कि उनकी गठबंधन सरकार की शक्ति उनकी कमज़ोरी में ही निहित है. गठबंधन इसी वजह से टिका है कि प्रधानमंत्री का अपने सहयोगियों पर कोई नियंत्रण नहीं है. एक मंत्री के हाथ टेलीकॉम घोटाले में सने मिलते हैं, लेकिन वह बेशर्मी से आरोपों से इंकार कर देता है.

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सेना के शीर्ष अधिकारी सामने आए: फौज का इस्‍तेमाल न हो

पहले सेना ने और अब सेवानिवृत्त हो चुके वरिष्ठ सेना अधिकारियों ने सरकार की प्रस्तावित सेना तैनाती नीति को लेकर अपना विरोध प्रगट किया है. जो बात सरकार को समझनी चाहिए, उसे भारत की सेना सरकार को समझाने की कोशिश कर रही है कि विकास के काम में युद्ध स्तर की तेज़ी लाए और भ्रष्टाचार के दोषी सिविल पुलिस व प्रशासन के अधिकारियों-कर्मचारियों को मध्यकालिक सख्ती वाली सज़ा दिए बिना,

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गैरजिम्‍मेदार मीडिया ताक पर साख

ऐसे ढेर सारे उदाहरण देश के सामने हैं जो यह संकेत देते हैं कि मानव अधिकार और देश हित की समझ को लेकर मीडिया या तो बिल्कुल नासमझ है या हिंदुस्तान की एकता और सामाजिक तानेबाने को तहस-नहस करने की साज़िश में लगी शक्तियों के साथ मिलीभगत का हिस्सा है.

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अवैध खनन के लिए नक्‍सली डर पैदा करने की कोशिश

कटनी ज़िले में नक्सलियों की उपस्थिति का दावा नहीं किया जा सकता है, यह भी नहीं कहा जा सकता है कि भविष्य में इस ज़िले में नक्सली अपनी धमक दे सकते हैं. हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा किए गए दावों पर भरोसा किया जाए तो कटनी नक्सलियों के लिए राज्य में पहली पसंदीदा जगह है.

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देश के लोगों पर गोली नहीं चलाएंगे

भारत की सेना ने भारत की सरकार से सवाल पूछे हैं, सवाल बुनियादी हैं और पहली बार पूछे गए हैं. भारत सरकार इन सवालों के दायरे में उलझ गई है, या कहें कि घबरा गई है. इन सवालों को सरकार के सामने उठा सेना ने साफ संकेत दिया है कि नक्सल विरोधी अभियान के नाम पर अपने ही देश के लोगों पर गोली चलाना उसे पसंद नहीं है.

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नक्सल समस्या : राष्ट्रीय स्तर पर नीति बनाने की ज़रूरत

छत्तीसगढ़ के दंतेवाड़ा ज़िले में नक्सली हमले में एक साथ 76 लोगों की मौत ने देश में लगातार गंभीर बनती जा रही इस समस्या की ओर फिर से ध्यान खींचा है. नक्सलियों की बढ़ती ताक़त, उनके प्रभाव क्षेत्र में विस्तार और मारक क्षमता के मद्देनज़र यह ज़रूरी है कि हम इस समस्या की गंभीरता पर नए सिरे से विचार करें.

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नक्‍सल क्रांति का एक जनक हताशा से हार गया

हताशा ने न जाने कितनी जानें ली हैं, पर अभी हाल में इसने एक ऐसे नेता को अपना शिकार बनाया है, जिसने आज से 43 साल पहले हथियारों के बल पर उस व्यवस्था को बदलने का सपना देखा था, जो किसानों व मज़दूरों का शोषण करती है, उनका हक़ मारती है. इस हताशा के ताजा शिकार हैं, कानू सान्याल.

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नक्सलियों के प्रभाव क्षेत्र ब़ढते जा रहे हैं

मध्य प्रदेश सरकार राज्य में क़ानून व्यवस्था की स्थिति अच्छी होने के लाख दावे करे, लेकिन इस हकीकत को सरकार छिपा नहीं सकी है कि राज्य में उग्रवादी नक्सली संगठन अपने पांव पसार रहे हैं. इसी कारण उनका प्रभाव क्षेत्र लगातार बढ़ रहा है. सन्‌ 2000 में मध्य प्रदेश के पुनर्गठन की प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ के अलग राज्य बनने के बाद राज्य में केवल बालाघाट ज़िला ही नक्सल प्रभावित क्षेत्र माना जाता था, लेकिन अब राज्य सरकार के गृह विभाग ने भारत सरकार के गृह मंत्रालय को जो रिपोर्ट भेजी है, उसमें मंडला, डिंडोरी, सीधी और सिंगरौली जिलों को भी नक्सल प्रभावित मानने का प्रस्ताव भेजा है.

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खून बहाने का जुनून

नक्सलियों के सिर पर रोज खून बहाने का जुनून सवार होता है, तो पुलिस के जवानों पर नक्सलवाद के नासूर को खत्म करने का. इसी चक्कर में शायद ही कोई ऐसा दिन गुजरता हो, जब निरीह जनता के खून से यहां की धरती लाल न होती हो. कहीं नक्सली मारे जा रहे हैं तो कहीं सुरक्षाबल के जवान शहीद हो रहे हैं. हालात यह हैं कि कुछ इलाक़ों में नक्सलियों को लेवी देने के बाद ही विकास के काम का पहला पत्थर लग पाता है. दोनों राज्यों के कई इलाक़ों में रेलगाड़ियों का परिचालन नक्सलियों की मर्ज़ी पर निर्भर है

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होली पर खुशियों के रंग बिखरें

ईद पर हमने प्रार्थना की थी कि सभी के घर ख़ुशियां दस्तक दें, लेकिन दस्तक महंगाई ने दी, दरवाज़ा ऩफरत ने खटखटाया, यहां तक कि देश में होने वाले कॉमन वेल्थ खेलों को न होने देने की धमकी बाहर से भी मिली और अंदर से भी.

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नक्सली राजधानी तक आ गए हैं

छत्तीसगढ़ राज्य में नक्सलियों के हौंसले बुलंद हैं. तमाम कोशिशों के बाद भी प्रशासन और पुलिस उन पर नकेल लगाने में सफल नहीं हुई है. राज्य सरकार ही नहीं, बल्कि भारत सरकार भी नक्सलवादी गतिविधियों पर नियंत्रण पाने के लिए पूरी कोशिश कर रही है लेकिन फिर भी छोटे-छोटे दलों में बंटे नक्सली अपने प्रभाव क्षेत्र को बढ़ाने में सफल हो रहे हैं.

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रणवीर सेना के पसरते पांव

एक तऱफ झारखंड के वन बाहुल्य, औद्योगिक एवं ग्रामीण क्षेत्रों में नक्सलियों ने उत्पात मचा रखा है, वहीं अब दूसरी ओर शहरी क्षेत्रों में प्रतिबंधित रणवीर सेना के नाम पर अपराधियों को संगठित करने का प्रयास किया जा रहा है. बिहार में नक्सलियों के साथ लड़ते-लड़ते टूटकर बिखर चुकी इस सेना ने झारखंड को अपना नया चारागाह बनाने की तैयारी शुरू कर दी है.

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श्रमदान से बंजर भूमि में आई बहार

मगध प्रमंडल के गया ज़िले के अतरी प्रखंड में नरावट पंचायत के साठ दलित परिवारों ने दृढ़ इच्छाशक्ति, सामूहिकता एवं एकता की जो मिसाल क़ायम की है, वह समाज के सभी वर्गों के लिए प्रेरणाप्रद है. मुरली पहाड़ी की तलहटी में बसा है नरावट पंचायत का टोला वनवासी नगर.

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नक्सल विरोधी अभियान का भंवरजाल

झारखंड में नक्सल विरोधी अभियान ऑपरेशन ग्रीन हंट को लेकर अजीबोग़रीब स्थिति बनी हुई है. देश के अन्य राज्यों में नवंबर 2009 से ही इसकी शुरुआत हो गई है. इसके लिए पारा मिलिट्री फोर्स के पचास हज़ार जवान लगाए गए हैं. माओवादियों का रेड कॉरिडोर इसका मुख्य निशाना है. ग़ौरतलब है कि झारखंड में विधानसभा चुनाव के कारण इस अभियान को रोका गया था.

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