सत्ता की चाहत में सला़खों के पीछे पहुंचे राजा पीटर

रमेश सिंह मुंडा हत्याकांड कभी झारखंड की राजनीति के एक शख्स की पहचान राजनीतिक गलियारे में अपने खुबसूरत बातों को

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चुनावी मुद्दा बनकर रह गए चूना-पत्थर के खदान

रोहतासः सीमेंट फैक्ट्री बन्द होने से नक्सलवाद ने पसारे पांव रोहतास जिला मुख्यालय सासाराम से करीब सौ किलोमीटर दक्षिण नौहट्‌टा

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बस्तर : यहां लाल कपड़ा, जूता, तार बेचना है मना गाना डाउनलोड करना भी खतरे से खाली नहीं

छत्तीसगढ़ में दंतेवाड़ा के बचेली पंचायत में रहने वाले मोहम्मद फिरोज़ को छत्तीसगढ़ पुलिस ने गिरफ़्तार कर लिया. उसपर आरोप

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नक्सलवाद पर सरकार की नई नीति: थोड़ी सख्त,थोड़ी नरम

लोकसभा चुनाव के दौरान प्रचार करते हुए नरेंद्र मोदी ने नक्सलवाद को किसी भी क़ीमत पर बर्दाश्त न करने का

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कॉरपोरेट सेक्टर अपनी सामाजिक ज़िम्मेदारी को समझे

बीती 27 फरवरी को बंगलुरू में ईटीवी उर्दू और ईटीवी कन्नड़ ने एक सेमिनार किया, जिसका विषय था-फ्यूचर ऑफ कॉरपोरेट्‌स इन इंडिया. मुख्य वक्ता कंपनी मामलों के केंद्रीय मंत्री वीरप्पा मोइली थे और मुख्य अतिथि थे कर्नाटक के मुख्यमंत्री सदानंद गौड़ा. सेमिनार में जाफर शरीफ, एम वी राजशेखर एवं जमीर पाशा भी शामिल थे, जो कर्नाटक की बड़ी हस्तियां हैं.

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मध्य प्रदेश : नक्सल प्रभावित क्षेत्र घोषित होने का फ़ायदा किसे

राज्य में पूर्व के तीन ज़िलों मंडला, डिंडोरी एवं बालाघाट के मुक़ाबले 5 अन्य नए ज़िलों सीधी, सिंगरौली, उमरिया, शहडोल एवं अनूपपुर में नक्सलियों का प्रभाव बढ़ गया है. राज्य सरकार की लगातार कोशिशों के बाद प्रदेश के इन सभी आठ ज़िलों को नक्सल प्रभावित घोषित कराने में कामयाबी मिल गई और ऐसे प्रत्येक ज़िले के लिए 25 करोड़ रुपये की सालाना केंद्रीय सहायता हाल में शुरू भी हो गई है.

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चिदंबरम जी, आप किसके साथ हैं?

नक्सलियों के ख़िला़फ सेना उतारने पर आमादा केंद्रीय गृह मंत्रालय नक्सली संगठनों को अरबों रुपये का फंड देने वाले उद्योगपतियों और पूंजीपतियों की लिस्ट वर्ष 2007 से दबाए बैठा है और उस पर कोई कार्रवाई नहीं कर रहा. हैरत की बात यह है कि नक्सलियों को फंडिंग करने वालों में सरकारी महकमे और उपक्रम भी शामिल हैं.

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नक्‍सलवाद, मीडिया और पुलिसः मीडिया को धमकी हद में रहो

सीपीआई (माओवादी) के प्रवक्ता आज़ाद की मुठभेड़ के नाम पर आंध्र प्रदेश पुलिस द्वारा की गई हत्या के बाद अमन एवं इंसाफ़ के पैरोकार सदमे और गुस्से में हैं. इनमें बहुतेरे माओवादियों के हिंसा के रास्ते पर उंगली भी उठाते रहे हैं, लेकिन उससे पहले सरकारों की जनविरोधी नीतियों और उसके प्रतिरोध के बर्बर दमन को ज़रूर कठघरे में भी खड़ा करते रहे हैं.

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अवैध खनन के लिए नक्‍सली डर पैदा करने की कोशिश

कटनी ज़िले में नक्सलियों की उपस्थिति का दावा नहीं किया जा सकता है, यह भी नहीं कहा जा सकता है कि भविष्य में इस ज़िले में नक्सली अपनी धमक दे सकते हैं. हालांकि मध्य प्रदेश पुलिस द्वारा किए गए दावों पर भरोसा किया जाए तो कटनी नक्सलियों के लिए राज्य में पहली पसंदीदा जगह है.

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सार-संक्षेपः गृहयुद्ध का रूप है नक्सलवाद

पुरी पीठ के शंकराचार्य जगतगुरू निश्चलानंद सरस्वती देश में बढ़ते नक्सलवादी प्रभाव और आतंक को भारत में गृहयुद्ध का एक रूप मानते हैं. इनका कहना है कि नेपाल की तरह ही हिन्दू बहुल भारत राष्ट्र की एकता अखंडता और सुरक्षा को विदेशी षड़यंत्रकारी नष्ट करना चाहते हैं और इसके लिए वह नक्सलवादियों को खुला प्रोत्साहन देने के साथ हर तरह की मदद भी कर रहे हैं.

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भैरो सिंह शेखावत और आचार्य राममूर्ति का जाना

मई दो हज़ार दस ने दो ऐसे लोगों को हमसे छीन लिया, जिन्होंने भारत की राजनीति और सामाजिक विकास के संघर्ष में बड़ा योगदान दिया था. भैरो सिंह शेखावत ने राजस्थान की राजनीति में सामान्य परिवार के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया और रजवाड़ों तथा सामंतों की मानसिकता वाले प्रदेश में अपना ऐसा स्थान बना लिया, जो किसी के लिए भी ईर्ष्या का कारण बन सकता है.

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दो डीजीपी की जंग में शहीद हो रहे जवान

नक्सलवाद को नेस्तनाबूद करने की ख़ातिर छत्तीसगढ़ में तैनात किए गए दो पुलिस महानिदेशक नक्सलियों को मटियामेट करने के बजाय आपस में ही धींगामुश्ती कर रहे हैं. नक्सलियों का सफाया करने की जगह उनमें इस बात की होड़ मची है कि नक्सलियों के ख़िला़फ चल रहे ऑपरेशन ग्रीन हंट की डोर किसके हाथ रहे और इसका सेहरा किसके सिर बंधे.

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आंखों देखा नक्‍सलवाद

विदेशी हथियारों से लैस नक्सलवादी समूहों के पास सरकार से अधिक मज़बूत सूचनातंत्र है. गहराई तक जानें तो, इन नक्सलवादी समूहों के पास पैसा, हथियार, योजना सभी कुछ उम्मीदों से कहीं ज़्यादा है. लेकिन, ये समूह जन विश्वास और जन आस्था धीरे-धीरे खोते जा रहे हैं. उड़ीसा, आंध्र प्रदेश और छत्तीसगढ़ जैसे राज्य के मध्य पड़ने वाले कुछ ऐसे भूभाग हैं जहां से नक्सलवादियों को लगातार गुज़रना पड़ता है.

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मतदाताओं के साथ नक्सली भी रखेंगे वजन

सासाराम ज़िले के सात विधानसभा क्षेत्रों में से अनुसूचित जाति के लिए सुरक्षित, चेनारी विधानसभा का आगामी चुनाव किसी भी दल एवं प्रत्याशी के लिए आसान नहीं होगा. बात पहले वाली नहीं रही, क्योंकि नए परिसीमन में इस विधानसभा क्षेत्र से शिवसागर एवं कोचस का आधा हिस्सा तथा करगहर का पूरा प्रखंड कटकर अलग हो गया है.

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