नोटबंदी का जिन्न एक बार फिर बाहर, बैंक अमित शाह का पैसा किसका!

नोटबंदी लागू करने का उद्देश्य आतंकवाद, नकली नोट और कालाधन पर हमला बताया गया था. लेकिन जल्द ही यह पता

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शत्रु संपदा क़ानून में पिस रहे बांग्लादेशी हिंदू

बांग्लादेश में रहने वाले अल्पसं‘यक समुदाय, खासकर हिंदुओं की जान-माल की सुरक्षा से संबंधित खबरें भारतीय मीडिया की सुर्खियों में

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मेरे खिलाफ लिखना मना है

सरकार की योजनाओं और कामों को प्रचारित करने के लिए जनसंपर्क विभाग होता है. हर सरकार यही चाहती है कि उसके अच्छे कामों का प्रचार हो और सरकार की कमज़ोरियां बाहर न आएं. सरकार की विफलताओं और कमज़ोरियों को जनता के सामने लाना मीडिया का काम है. लेकिन बिहार में स्थिति अलग है.

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धुंधली छवि का विशेषांक

टीवी पत्रकारों पर लिखते हुए चमड़िया ने लिखा- पूंजीवाद ने उनके बीच कई हिस्से तैयार कर दिए. एक हिस्सा वह है जो चांदी काट रहा है. मीडिया मालिकों की तरह राजसभा (संभवत : वो राज्यसभा लिखना चाह रहे हों ) में रंगरलियां मना रहा है. इनकी रंगरलियों का अंदाज़ा इससे लगाया जा सकता है कि ये चंद वर्षों में सैकड़ों-करोड़ों डॉलर के मालिक बन गए. वे चैनल चला रहे हैं और उसी तरह से चला रहे हैं जैसे रुपर्ट मर्डोक और दूसरे साम्राज्यवाद समर्थक चैनल चलाते हैं. जो चैनल मालिक नहीं बन पाया, वह जिस तरह से चैनल चला रहा है, उनके उसी तरह चलने की बेशर्मी से वकालत करता है. टीआरपी को वह अपने कुकर्मों का सुरक्षा कवच बनाता है और ये नहीं बताता है कि टीआरपी क्या है?

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