पूरे चांद की रात…

भारतीय साहित्य के प्रमुख स्तंभ यानी उर्दू के मशहूर अ़फसानानिग़ार कृष्ण चंदर का जन्म 23 नवंबर, 1914 को पाकिस्तान के गुजरांवाला ज़िले के वज़ीराबाद में हुआ. उनका बचपन जम्मू कश्मीर के पुंछ इलाक़े में बीता. उन्होंने तक़रीबन 20 उपन्यास लिखे और उनकी कहानियों के 30 संग्रह प्रकाशित हो चुके हैं. उनके प्रमुख उपन्यासों में एक गधे की आत्मकथा, एक वायलिन समुंदर के किनारे, एक गधा नेफ़ा में, तूफ़ान की कलियां, कॉर्निवाल, एक गधे की वापसी, ग़द्दार, सपनों का क़ैदी, स़फेद फूल, प्यास, यादों के चिनार, मिट्टी के सनम, रेत का महल, काग़ज़ की नाव, चांदी का घाव दिल, दौलत और दुनिया, प्यासी धरती प्यासे लोग, पराजय, जामुन का पेड़ और कहानियों में पूरे चांद की रात और पेशावर एक्सप्रेस शामिल है. 1932 में उनकी पहली उर्दू कहानी साधु प्रकाशित हुई. इसके बाद उन्होंने पीछे म़ुडकर नहीं देखा.

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फिल्मी गीतों में महकी साहित्य की खुशबू

गीतकार शैलेंद्र ने फिल्मों में भी साहित्य की महक को बरक़रार रखा, इसलिए काव्य प्रेमियों ने उन्हें गीतों का राजकुमार कहा है. शैलेंद्र मन से कवि ही थे, तभी तो उनके फिल्मी गीतों में भी काव्य की पावन गंगा बहती है. उनसे प्रभावित होकर उपन्यासकार फणीश्वर नाथ रेणु ने उन्हें कविराज का खिताब दिया था. मुंबई के शैलेंद्र प्रशंसक परिवार ने उनकी याद में एक किताब प्रकाशित की है, जिसका नाम है मौसम सुहाना और ये मौसम हसीं.

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स्वामी विवेकानंद का संदेश किसे याद है

रवींद्र नाथ टैगोर का 150वां जन्मदिन मनाने के बाद अब बारी है स्वामी विवेकानंद का जन्मदिन मनाने की. दोनों बंगाल के थे, लेकिन भारत के संदर्भ में दोनों का विजन का़फी अलग था. शिकागो में हुई विश्व धर्म संसद में अपनी उपस्थिति दर्ज कराने के बाद विवेकानंद का़फी प्रसिद्ध हो गए. कदाचित वह आधुनिक भारत के पहले व्यक्ति थे, जिन्हें वैश्विक प्रसिद्धि प्राप्त हुई थी.

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साहित्यकार समाज सुधारक नहीं होता

नवोदित उपन्यासकार महुआ माजी का मानना है कि साहित्यकार समाज सुधारक नहीं होता. वह सिर्फ लिखता है, ताकि लोग उस विषय पर मंथन करें कि क्या सही है और क्या ग़लत. अपने उपन्यास मैं बोरिशाइल्ला के लिए वर्ष 2007 में अंतरराष्ट्रीय इंदु शर्मा कथा सम्मान पाने वाली महुआ माजी रांची की रहने वाली हैं.

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उदय प्रकाश नहीं थे पहली पसंद

इस वर्ष के साहित्य अकादमी पुरस्कारों का ऐलान हो गया है. हिंदी के लिए इस बार का अकादमी पुरस्कार यशस्वी कथाकार और कवि उदय प्रकाश को उनके उपन्यास मोहनदास (वाणी प्रकाशन, नई दिल्ली) के लिए दिया गया. उदय प्रकाश साहित्य अकादमी पुरस्कार डिज़र्व करते हैं, बल्कि उन्हें तो अरुण कमल, राजेश जोशी और ज्ञानेन्द्रपति से पहले ही यह सम्मान मिल जाना चाहिए था.

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