एकांत के लिए रेगिस्तान

जब इंसान वृद्धावस्था में आता है तो उसे एकांत की ज़रूरत महसूस होती है. आपने बुढ़ापे में जंगल जाने की बात तो सुनी होगी, लेकिन एक बुज़ुर्ग ने जंगल के बजाय रेगिस्तान में रहना ज़्यादा पसंद किया. टोक्यो के एक 76 वर्षीय वृद्ध ने अपना घर-बार छोड़ दिया और वह रेगिस्तान में रहने चले गए.

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सौ समस्याओं का एक समाधान : आरटीआई आवेदन

रिश्वत देना जहां एक ओर आम आदमी की मजबूरी बन गया है, वहीं कुछ लोगों के लिए यह अपना काम जल्दी और ग़लत तरीक़े से निकलवाने का ज़रिया भी बन गया है, लेकिन इन दोनों स्थितियों में एक फर्क़ है. एक ओर 2-जी स्पेक्ट्रम के लिए रिश्वत दी जाती है, तो दूसरी ओर एक आम और बेबस आदमी को राशन कार्ड बनवाने सरकारी पेंशन, दवा एवं इंदिरा आवास पाने के लिए रिश्वत देनी पड़ती है.

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पेंशन के आसरे हैं कई बुज़ुर्ग

एटा में पाश्चात्य संस्कृति की तेज बह रही बयार ने एटा जैसे ज़िले में भी सामाजिक बदलाव ला दिए हैं. यही वजह है कि सामाजिक बदलाव की परिणति के बीच में वृद्धजनों की पारिवारिक उपेक्षा में आए दिन बढ़ोतरी हो रही है. जिस औलाद को बुढ़ापे की लाठी माना, उसी के तिरस्कार ने इस वर्ग के समक्ष बुढ़ापे में रोज़ी-रोटी का संकट खड़ा कर दिया है.

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जापानः बुजुर्गों की आड़ में धोखाधड़ी

जापान की सरकार ने देश में सौ साल से अधिक उम्र के बुज़ुर्गों की वास्तविक संख्या का पता लगाने के लिए एक जांच समिति गठित की है. जापान का दावा है कि इस देश में सौ साल से अधिक उम्र के बुज़ुर्गों की संख्या सबसे अधिक है. जापानी अधिकारी इनकी संख्या तक़रीबन 3,000 बताते हैं.

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