यह राजनीति जनता का विश्वांस समाप्त करेगी

देश की राजनीति का भविष्यदर्शन लगभग हर प्रदेश में हो रहा है. गुजरात, महाराष्ट्र, राजस्थान, मध्यप्रदेश, बिहार में हो रहा

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चौंकाने वाला होगा उत्तर प्रदेश का चुनाव

उत्तर प्रदेश विधानसभा के चुनाव सर पर हैं. संभवत:, दिसंबर में चुनाव होने की उम्मीद है. उत्तर प्रदेश में अनुमान

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तीसरा मोर्चा संभावनाएं और चुनौतियां

लोकसभा में एफडीआई के मुद्दे पर दो दलों ने जो किया, वह भविष्य की संभावित राजनीति का महत्वपूर्ण संकेत माना जा सकता है. शायद पहली बार मुलायम सिंह और मायावती किसी मुद्दे पर एक सी समझ रखते हुए, एक तरह का एक्शन करते दिखाई दिए. यह मानना चाहिए कि अब यह कल्पना असंभव नहीं है कि चाहे उत्तर प्रदेश का चार साल के बाद होने वाला विधानसभा का चुनाव हो या फिर देश की लोकसभा का आने वाला चुनाव, ये दोनों साथ मिलकर भी चुनाव लड़ सकते हैं.

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रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश के अलग-अलग राज्यों से आए किसान जब संसद के बाहर आंदोलन कर रहे थे, उसी दिन संसद के भीतर माननीय सदस्य एफडीआई के मुद्दे पर बहस कर रहे थे.

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मुलायम-अमर अलग क्‍यों हुए

मुलायम सिंह और अमर सिंह के अलगाव की कहानी में कई तत्व हैं. अविश्वास है, ग़लतफहमी है, जलन है, आकांक्षा है, महत्वाकांक्षा है, षड्‌यंत्र हैं, दु:ख है, दर्द है और बेबसी है. मुलायम सिंह और अमर सिंह के अलावा इस कहानी के मुख्य पात्र हैं मोहन सिंह, आज़म खान और राम गोपाल यादव. बाद में तो जैसे पूरी समाजवादी पार्टी ही इस कहानी के प्रमुख किरदार में बदल गई.

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