प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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आदिवासी आज भी गुलाम है

आज देश के अधिकांश जंगलक्षेत्र एक ऐसी हिंसा की आग से धधक रहे हैं, जिसकी आंच को कहीं न कहीं पूरा देश महसूस कर रहा है. इस आग का कारण इन क्षेत्रों में माओवादी गतिविधियों का तेज होना है. देश की आज़ादी के बाद से ही सुलग रही इस आग ने आज एक विकराल ज्वालामुखी का रूप धारण कर लिया है.

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माओवादियों के खिलाफ लालगढ़ की महिलाएं

जीत के लिए चल रही एक लंबी ख़ूनी लड़ाई से जूझ रहे लालगढ़ का एक नया चेहरा सामने आ रहा है. महीनों से चल रहे संयुक्त बलों के अभियान ने माओवादियों की कमर तो तोड़ ही दी है, अब आम जनता के सड़क पर उतरने से सुरक्षाबलों का हौसला और बुलंद हो गया है.

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किसान पुत्र का राज और किसान आंदोलन

मध्य प्रदेश सरकार की कृषि और किसान हितैषी नीतियों की पोल राज्य में हर साल होने वाले किसान आंदोलनों से खुल जाती है. राज्य सरकार ने किसान आंदोलनों का लाठी-गोली से दमन तो किया, लेकिन किसानों की समस्याओं को सुलझाने में कोई दिलचस्पी नहीं दिखाई.

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देश की आधी मुठभेड़ फर्जी हैं

सोलह साल में 2560 पुलिस और कथित अपराधी मुठभेड़. और इनमें से 1224 फर्ज़ी. यानी, भारत की हरेक दूसरी मुठभेड़ फर्ज़ी है. इतना ही नहीं, इस 1224 फर्जी मुठभेड़ की लिस्ट में बाटला हाउस मुठभेड़ का नाम भी शामिल हो गया है. हालांकि इस मामले में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग (एनएचआरसी) ने दिल्ली पुलिस को पहले क्लीन चिट दे दी थी.

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