इस ख़ास तरीके से पानी पीकर एक महीने में ठीक हो सकता है कैंसर

जब हमारे शरीर में कोई तकलीफ या कोई बीमारी दस्तक देती है तब हम इन बीमारियों से बचने के लिए

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ल्यूकीमिया सही समय पर इलाज़ संभव है

ल्यूकीमिया कैंसर का एक प्रकार है जो रक्तज के बनने की प्रक्रिया को प्रभावित करता है, उसे ल्यूकीमिया कैंसर कहते

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ग़रीबों के लिए नहीं है गोरखपुर मेडिकल कॉलेज

नवगठित मोदी सरकार ने देश के सभी सरकारी अस्पतालों में आवश्यक दवाएं मुफ्त देने की बात कही थी, लेकिन बाबा

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शरीर और मन मिट्टी का बना है

सर्च अस्पताल में रोगियों की सेवा, एक सौ देहातों में ग्राम-आरोग्य सेवा व रिसर्च, व्यसनमुक्ति, युवक-युवती प्रशिक्षण और बाल मृत्यु

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सेहत से खिलवाड़

भारत दवाओं का एक ब़डा बाज़ार है. यहां बिकने वाली तक़रीबन 60 हज़ार ब्रांडेड दवाओं में महज़ कुछ ही जीवनरक्षक हैं. बाक़ी दवाओं में ग़ैर ज़रूरी और प्रतिबंधित भी शामिल होती हैं. ये दवाएं विकल्प के तौर पर या फिर प्रभावी दवाओं के साथ मरीज़ों को ग़ैर जरूरी रूप से दी जाती हैं. स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण के लिए गठित संसद की स्थायी समिति की एक रिपोर्ट के मुताबिक़, दवाओं के साइड इफेक्ट की वजह से जिन दवाओं पर अमेरिका, ब्रिटेन सहित कई यूरोपीय देशों में प्रतिबंधित लगा हुआ है, उन्हें भारत में खुलेआम बेचा जा रहा है.

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इंडिया इन ट्रांजिशनः एंटी बायोटिक और अनिवार्य दवाएं न मिल पाने की चुनौतियां

जहां तक एंटी बायोटिक दवाओं का संबंध है, भारत में इस संदर्भ में दो बिल्कुल अंतर्विरोधी समस्याएं हैं. बहुत से लोग इसलिए मरते हैं, क्योंकि उन्हें एंटी बायोटिक दवाएं नहीं मिल पातीं और दूसरे लोग ऐसे हालात में भी इनका प्रयोग करते हैं, जब उन्हें इनकी ज़रूरत नहीं होती और इस प्रकार वे एंटी बायोटिक प्रतिरोध को बढ़ाने में मदद करते हैं.

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पेट में कार्बेज डंप

भारत में अजब-ग़ज़ब घटनाएं बहुत आम हैं. इसी कड़ी में छत्तीसगढ़ के कोरबा ज़िले में चिकित्सकों ने एक मरीज के पेट का ऑपरेशन कर छह किलो लोहा निकाला है, जिसमें ढेरों सिक्के, चाबियां और नट बोल्ट शामिल हैं. इलाज के दौरान मरीज की मौत हो गई.

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मिर्गी के साइड इफेक्ट

अज्ञानता, अंधविश्वास और जागरूकता न होना मिर्गी रोग के बढ़ने का सबसे बड़ा कारण है, जिसके चलते आज विश्व में लगभग सात करोड़ और भारत में एक करोड़ 20 लाख लोग इस रोग से पीड़ित हैं.

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इलेक्ट्रॉनिक नाक और टीबी

इसे टीबी के मरीज़ों के लिए अच्छी खबर कहा जा सकता है. असल में भारतीय वैज्ञानिकों का दावा है कि वे एक इलेक्ट्रॉनिक नाक बना रहे हैं जिससे सांस का परीक्षण किया जाएगा और ट्यूबरकुलोसिस यानी टीबी का तुरंत पता लगाया जा सकेगा.

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नागपुरः मरीज का शोषण अस्‍पताल का पोषण

देश के विकसित राज्यों में एक महाराष्ट्र में उन तमाम बड़े अस्पतालों की हालत ख़राब है, जो दावा करते हैं कि उनके यहां ग़रीबों के लिए इलाज की मुकम्मल व्यवस्था है, जबकि इसके उलट इन बड़े कारपोरेट अस्पतालों में ग़रीबों के लिए कोई जगह नहीं है. कमाल की बात तो यह है कि अस्पतालों को ज़मीन सरकार ने ही दी है.

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बच के रहना रे बाबा

मधुमेह जैसी घातक बीमारी भारत को जकड़ती जा रही है. इंटरनेशनल डायबिटीज फेडरेशन की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक़, विश्व में मधुमेह के सबसे ज़्यादा मरीज भारत में हैं. भारत में मधुमेह के मरीजों की संख्या 5.08 करोड़ है. वहीं चीन 4.32 करोड़ मरीजों के साथ दूसरे नंबर पर है, जबकि अमेरिका 2.68 मरीजों के साथ तीसरे नंबर पर है.

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डेंगूः बेहाल मरीज, उदासीन सरकार

ओखला में रहने वाली सिम्मी महज़ 22 साल की थी. सिम्मी की शादी के सपने संजोने वाले मां-बाप का सपना तब चूर-चूर हो गया, जब डेंगू ने उसकी जान ले ली. यहां के होली फैमिली अस्पताल में तड़प-तड़प कर सिम्मी की जान चली गई. बीमारी की शुरुआत हल्के बुखार से हुई.

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एमपी बिरला अस्पताल : अवैध ब्लड ट्रांसफ्यूजन की जांच शुरू

मध्य प्रदेश विधानसभा में पूछे गए एक प्रश्न ने सतना के एमपी बिरला अस्पताल में हड़कंप मचा दिया है. इस अस्पताल के पास ब्लड बैंक की अनुमति नहीं है, जबकि यह अब तक हज़ारों मरीज़ों को स्वयं खून चढ़ाने का काम कर चुका है. पिछले आठ वर्षों से चल रहे इस गोरखधंधे से कई मरीज़ों की जान संकट में पड़ चुकी है.

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बुंदेलखंड के पत्‍थर खदान मजदूरों का दर्द

गगनचुंबी इमारतों एवं सड़कों की ख़ूबसूरती बढ़ाने के लिए पत्थर का सीना चाक करनेऔर नदी से बालू निकालने वाले मज़दूरों को दो जून की रोटी के बदले सिल्कोशिस नामक रोग मिल रहा है. विंध्याचल पर्वत श्रृंखलाओं के मध्य स्थित बुंदेलखंड में उत्तर प्रदेश भाग के ललितपुर, झांसी, महोबा, हमीरपुर, बांदा एवं चित्रकूट आदि ज़िले पूरे भारत में पत्थरों के लिए प्रसिद्ध हैं.

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लाचार-बदहाल राजेंद्र कुष्ठाश्रम

राजेंद्र कुष्ठाश्रम में कुष्ठ रोगियों की दुनिया वीरान हो गई है. आलम यह है कि बदहाली के कारण प्राय: कुष्ठ मरीज़ अपनी भूख मिटाने के लिए कुष्ठाश्रम को छोड़कर अन्य शहरों में चले गए हैं. महज़ चंद मरीज़ ही यहां कभी कभार आते हैं और चले जाते हैं. वे भी अगल-बगल के गांवों-बाज़ारों में भीख मांगने पर मजबूर हैं. ऐसा नहीं है कि यह हाल आश्रम में रहने वाले लोगों का ही है.

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मध्य प्रदेश: एड्‌स के ब़ढते मामले

मध्य प्रदेश में इस समय एड्‌स की बीमारी का क़हर बढता जा रहा है. सरकार का स्वास्थ्य विभाग राज्य में एड्‌स रोगियों की संख्या लगातार बढ़ने से चिंतित है. इसके अलावा राज्य में सरकार और सरकारी सहायता प्राप्त ग़ैर सरकारी संगठनों द्वारा हर साल करोड़ों रूपया एड्‌स की रोकथाम के प्रचार अभियान पर खर्च किया जाता है, फिर भी इस प्रचार का जनता पर कोई असर नहीं हो रहा है.

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