नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति पर विवादः प्रधानमंत्री की अग्नि परीक्षा

चौथी दुनिया को कुछ ऐसे दस्तावेज़ हाथ लगे हैं, जिनसे हैरान करने वाली सच्चाई का पता चलता है. कुछ दिन पहले सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई हुई, जिसमें लेफ्टिनेंट जनरल बिक्रम सिंह को अगले सेनाध्यक्ष के रूप में नियुक्ति पर सवाल खड़े किए गए.

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दिल्ली का बाबू : भरे जाने लगे खाली पद

सरकार भले ही देर से जागी, लेकिन अब लगता है कि विभिन्न मंत्रालयों में खाली पड़े कई पदों पर नियुक्ति बहुत जल्द की जाएगी. इसके लिए सरकार ने शुरुआत कर दी है. जवाहर सरकार को प्रसार भारती का सीईओ बनाया जाना इस दिशा में उठाया गया क़दम माना जा सकता है. ग़ौरतलब है कि बहुत दिनों से प्रसार भारती के लिए स्थायी सीईओ की नियुक्ति लंबित थी और यह पद खाली पड़ा था.

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कोल इंडिया का चेयरमैन कौन बनेगा

कोल इंडिया के नए चेयरमैन की नियुक्ति का मामला गरमा गया है. पांच आईएएस अधिकारी यानी पर्यावरण मंत्रालय में अतिरिक्त सचिव नंदिता चटर्जी, पर्यावरण सचिव आर के काहलोन, लालू यादव के पूर्व ओएसडी, राजस्थान के मुख्यमंत्री के प्रिंसिपल सेक्रेटरी श्रीमत पांडेय और सिंगरेनी कोलियरी के प्रबंध निदेशक इस पद के लिए दौड़ में शामिल हैं.

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मिर्जापुर : अवैध नियुक्तियों के जरिये करोड़ों की चपत

उत्तर प्रदेश में दो मुख्य चिकित्साधिकारियों की हत्या ने पूरे देश का ध्यान स्वास्थ्य विभाग में हो रही लूट की ओर खींचा है. इस विभाग में घोटालों की संस्कृति इतनी व्यापक है कि अन्य विभागों के प्रभावशाली लोगों ने भी बहती गंगा में हाथ धो लिए.

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दिल्ली का बाबू: आइएएस बनने का ख्वाब

भारत में नव उदारवाद के दौर के बाद से मध्य वर्ग में लोक सेवा का आकर्षण बहुत ज्यादा नहीं बचा. फिर भी अन्य लोगों में इसे लेकर अभी भी दिलचस्पी बची हुई है. हाल के वर्षों में ऐसी कई खबरें आईं, जहां आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के कई उम्मीदवारों ने लोक सेवा की परीक्षा में अपने दम पर सफलता पाई है.

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अल्पसंख्यक विद्यार्थियों के लिए छात्रवृति योजना : मदद के नाम पर धोखा

भारत में मूल शिक्षा को मौलिक अधिकार घोषित किया गया, लेकिन अ़फसोस की बात यह है कि हमारे देश में क़ानून तो बना दिए जाते हैं, पर उन्हें ठीक से लागू नहीं किया जाता. परिणामस्वरूप क़ानून होते हुए भी आम नागरिक उससे कोई फ़ायदा नहीं ले पाते. शिक्षा का भी कुछ यही हाल है.

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एनएचएआई चेयरमैन की खोज जारी

कैबिनेट में फेरबदल की चर्चाओं के बीच प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने परिवहन मंत्री सी पी जोशी को निर्देश दिया है कि वह राष्ट्रीय उच्च मार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई) को पुनर्गठित करने का काम करें. दरअसल, इस एजेंसी में एक पूर्णकालिक चेयरमैन की नियुक्ति का मामला कई महीने से अटका हुआ है.

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दिल्‍ली का बाबूः बेदाग़ अधिकारी चाहिए

फिलहाल, सरकार अभी अपना ध्यान पूरी तरह से कैबिनेट में किए जाने वाले फेरबदल के अलावा अन्ना हज़ारे और रामदेव के आंदोलन से भ़डकी आग को बुझाने पर केंद्रित कर रही है, लेकिन इसके अलावा भी बहुत से काम प्रतीक्षा सूची में हैं, जिन्हें जल्दी से जल्दी यानी कुछ ही हफ्तों के भीतर किया जाना है.

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एडसिल में सीएमडी की नियुक्ति का मामलाः सिब्बल जी, यह भी भ्रष्टाचार है

लोकपाल विधेयक बनाने के लिए गठित ज्वाइंट ड्राफ्ट कमेटी में सरकारी नुमाइंदे के तौर पर मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल भी शामिल हैं. यह कमेटी एक ऐसी संस्था के गठन का रास्ता निकाल रही है, जो भ्रष्टाचार पर अंकुश लगा सके.

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आम आदमी और न्यायपालिका-2

लंबित मुकदमों की लंबी कतार और साथ ही जजों की ईमानदारी पर सवालिया निशान एक बहुत बड़ी समस्या है. ऐसा न हो कि इसकी वजह से भारतीय लोकतंत्र के इस अंतिम गढ़ की प्रतिष्ठा धूमिल हो जाए. अन्य दो संस्थाएं, विधायिका और नौकरशाही तो पहले से ही कमज़ोर हो चुकी हैं.

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दिल्‍ली का बाबूः प्रसार भारती से लाली की छुट्टी

प्रसार भारती के विवादास्पद मुख्य कार्यकारी अधिकारी बी एस लाली इस बार नहीं बच सके. राष्ट्रपति प्रतिभा पाटिल की ओर से सुप्रीम कोर्ट द्वारा लाली के खिला़फ कई प्रशासनिक और वित्तीय अनियमितताओं की जांच की स्वीकृति देने के दो सप्ताह बाद सरकार ने अंतत: कार्रवाई करने का फैसला किया और उन्हें निलंबित कर दिया गया.

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साउथ ब्‍लॉकः गुप्ता बने विकास आयुक्त

कपड़ा मंत्रालय में संयुक्त सचिव शिव शंकर गुप्ता को अब इस मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले हस्तशिल्प विभाग में विकास आयुक्त का स्थायी प्रभार सौंपा गया है. गुप्ता 1982 बैच के आईए एस अधिकारी हैं. गुप्ता संजय अग्रवाल की जगह लेंगे.

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दिल्‍ली का बाबू : कपिल सिब्बल का बदला मिजाज

ऐसा लगता है, मानव संसाधन विकास मंत्री कपिल सिब्बल ने शिक्षा क्षेत्र में शीर्ष पदों पर नौकरशाहों को नियुक्त न करने के अपने पुराने फैसले को तिलांजलि दे दी है. पिछले साल तक सिब्बल का स्पष्ट रवैया था कि वह शिक्षा विभाग में शीर्ष पदों पर नौकरशाहों की अपेक्षा शिक्षाविदों की नियुक्ति के पक्ष में हैं, लेकिन अब वह अपनी बात से पीछे हटते दिख रहे हैं.

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