विजयोत्सव के बहाने राजनीति

बिहार में मिशन 2019 को लेकर राजनीतिक दलों की आम तैयारी यहीं आकर सिमट गई है. जातिगत जुगत भिड़ाने की

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क्या नेताओं के इशारे पर वसूली करता था दाऊद इब्राहिम का छोटा भाई ?

नई दिल्ली। इंडिया का मोस्ट वांटेड दाऊद इब्राहिम के छोटे भाई इकबाल कासकर की गिरफ्तारी के बाद पुलिस आगे की

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भ्रष्टाचार की जांच ठेंगे पर आरोपी ने धमकाया तो क्लीन चिट दे दी

शीर्ष अफसर के आदेश की भी यूपी में ऐसी-तैसी, भ्रष्टाचार की जांच ठेंगे पर आरोपी ने धमकाया तो क्लीन चिट दे

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राजनीतिक दलों का रवैया गुस्सा दिलाता है

महाभारत शायद आज की सबसे बड़ी वास्तविकता है. इस महाभारत की तैयारी अलग-अलग स्थलों पर अलग तरह से होती है और लड़ाई भी अलग से लड़ी जाती है, लेकिन 2013 और 2014 का महाभारत कैसे लड़ा जाएगा, इसका अंदाज़ा कुछ-कुछ लगाया जा सकता है, क्योंकि सत्ता में जो बैठे हुए लोग हैं या जो सत्ता के आसपास के लोग हैं, वे धीरे-धीरे इस बात के संकेत दे रहे हैं कि वे किन हथियारों से लड़ना चाहते हैं.

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न थकेंगे, न झुकेंगे

आखिर अन्ना हज़ारे क्या हैं, मानवीय शुचिता के एक प्रतीक, बदलाव लाने वाले एक आंदोलनकारी या भारतीय राजनीति से हताश लोगों की जनाकांक्षा? शायद अन्ना यह सब कुछ हैं. तभी तो इस देश के किसी भी हिस्से में अन्ना चले जाएं, लोग उन्हें देखने-सुनने दौड़े चले आते हैं? उनकी सभाओं में उमड़ने वाली भीड़ को देखकर कई राजनेताओं को रश्क होता होगा.

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यह आम आदमी की पार्टी है

भारतीय राजनीति का एक शर्मनाक पहलू यह है कि देश के राष्ट्रीय एवं क्षेत्रीय दलों की कमान चंद परिवारों तक सीमित हो गई है. कुछ अपवाद हैं, लेकिन वे अपवाद ही हैं. अगर ऐसा ही चलता रहा तो देश के प्रजातंत्र के लिए खतरा पैदा हो जाएगा. राजनीतिक दलों और देश के महान नेताओं की कृपा से यह खतरा हमारी चौखट पर दस्तक दे रहा है, लेकिन वे देश की जनता का मजाक उड़ा रहे हैं.

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यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

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एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

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उत्तर प्रदेश : नवरत्‍नों के सहारे कांग्रेस

उत्तर प्रदेश में कांग्रेस का कोई भी प्रयोग स़फल नहीं हो पा रहा है. सभी प्रयोग उसके लिए उलटे पड़ रहे हैं. दो दशक से अधिक का समय हो चुका है, लेकिन कांग्रेस एक बार डूबी तो फिर आज तक उबर नहीं पाई है. इस दौरान सोनिया गांधी, राहुल गांधी, प्रियंका वाड्रा सभी ने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया. प्रदेश की कुर्सी पर कई अध्यक्ष बैठे. सबने बड़े-बड़े दावे किए, लेकिन ज़मीनी हक़ीक़त कोई नहीं बदल पाया.

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सीएजी के प्रति कांग्रेस का रवैया यह प्रजातंत्र पर हमला है

सीएजी (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आई तो राजनीतिक हलक़ों में हंगामा मच गया. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2006-2009 के बीच कोयले के आवंटन में देश को 1.86 लाख करोड़ का घाटा हुआ. जैसे ही यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई, कांग्रेस के मंत्री और नेता सीएजी के खिला़फ जहर उगलने लगे. पहली प्रतिक्रिया यह थी कि सीएजी ने अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लंघन किया.

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Coal Scam and Manmohan Singh

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जेलों में बढ़ती मुसलमानों की आबादी

आज से 65 वर्ष पूर्व जब देश स्वतंत्र हुआ था तो सबने सोचा था कि अब हम विकास करेंगे. आज़ाद देश में नागरिकों के अधिकारों की सुरक्षा की जाएगी. छुआछूत, जाति-पांत और भेदभाव का अंत होगा. हर धर्म से जुड़े लोग एक भारतीय के रूप में आपस में भाईचारे का जीवन व्यतीत करेंगे. धार्मिक घृणा को धर्मनिरपेक्ष देश में कोई स्थान प्राप्त नहीं होगा. यही ख्वाब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी ने देखा था और यही आश्वासन संविधान निर्माताओं ने संविधान में दिया था, लेकिन आज 65 साल बीत जाने के बाद यह देखकर पीड़ा होती है कि जाति-पांत की सियासत हमारे देश की नियति बन चुकी है.

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आरएसएस का चक्रव्‍यूह

हिंदुस्तान में सदियों से संयुक्त परिवार की प्रथा चली आ रही है. इस व्यवस्था में परिवार का मुखिया जो अक्सर बुज़ुर्ग होता है, उसके ऊपर परिवार को एक रखने और उसे चलाने की ज़िम्मेदारी होती है. आम तौर पर आज भी हिंदुस्तान में ज़्यादातर घरों में पीढ़ी दर पीढ़ी बंटवारा नहीं होता. जबसे पश्चिम का प्रभाव अपने देश पर बढ़ा है, तबसे परिवारों में बंटवारे का चलन बढ़ गया है, पर यह अभी भी अपवाद स्वरूप ही है.

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जनता को अखिलेश से बहुत उम्मीदें हैं

उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश यादव के दो फैसलों पर उनकी आलोचना हो रही है. पहला फैसला उत्तर प्रदेश में शाम सात बजे केबाद बाज़ारों और मॉल को बिजली न देना और दूसरा फैसला, जिसमें उन्होंने विधायकों को विकास निधि से कार खरीदने की अनुमति दी थी. मुख्यमंत्री के ये दोनों फैसले आलोचना का विषय ज़रूर बनते, लेकिन मुख्यमंत्री ने दोनों ही फैसलों को लागू होने के 24 घंटे के अंदर वापस ले लिया.

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इतिहास का ड्राफ्ट

वर्ष 2000 में जब बिहार से अलग हटकर झारखंड राज्य अस्तित्व में आया था, उस व़क्त उम्मीद जगी थी कि इलाक़े के आदिवासियों का समुचित विकास होगा और उनकी समस्याओं पर बेहतर तरीक़े से ध्यान दिया जाएगा.

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Standard & Poor’s report: India loses investment ratings

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आप सांसद हैं, देवता नहीं

हमारे सांसद कुछ ज़्यादा ही सेंसेटिव हो गए हैं. उन्हें लगता है कि वे संसद के लिए चुन लिए गए हैं तो वे लोकतंत्र के देवता हो गए हैं. उन्हें कोई कुछ कह नहीं सकता है. अगर देश में भ्रष्टाचार की बात हो तो सांसदों को लगता है कि उन्हें ज़िम्मेदार ठहराया जा रहा है.

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सेक्‍स, सीडी और खिलाड़ी

अभिषेक मनु सिंघवी, कांग्रेस के प्रवक्ता और सुप्रीम कोर्ट के वकील हैं. इससे भी बड़ा परिचय उनका यह है कि वह सांसद हैं. ऐसे-वैसे सांसद नहीं, बल्कि संसद की स्टैंडिंग कमेटी के चेयरमैन हैं. वह देश में क़ानून बनाने की प्रक्रिया के एक महत्वपूर्ण और शक्तिशाली केंद्र हैं.

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Baba Ramdev vs MPs

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General ka Court Martial-II

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General ka Court Martial

General ka Court Martial

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आत्मकथा के बहाने इतिहास

इंद्र कुमार गुजराल से मेरी पहली मुलाकात तब हुई थी, जब संसद के बालयोगी सभागार में संतोष भारतीय ने विश्वनाथ प्रताप सिंह की कविता पाठ का आयोजन किया था. वह एक तरह की अनूठी योजना थी, जिसमें चार पूर्व प्रधानमंत्रियों ने अपने साथी पूर्व प्रधानमंत्री के आयोजन के लिए एक साथ लोगों को आमंत्रित किया था.

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बिहार में नई सियासी नौटंकी

सियासत में शह-मात का खेल कैसे होता है, पल भर में सियासी समीकरण कैसे बदल जाते हैं. अगर आप यह जानना चाहते हैं तो बिहार की सियासी फिज़ा में फैले शगू़फों पर ग़ौर फरमाने की ज़रूरत है, जहां यारों के बीच ही यानी जद-यू और भाजपा के दरम्यान चेक-मेट का खेल अपने शबाब पर है. कुछ इस तरह से गोटियां बिछाई जा रही हैं कि लगता है कि जैसे उत्तर प्रदेश चुनाव के बाद सियासी जंग की सरज़मीन अब बिहार ही बनने वाला है.

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दिल्ली का बाबू : उच्चायुक्तों की कमी

प्रधानमंत्री की व्यस्तता का प्रभाव भारत की विदेश नीति पर भी पड़ रहा है. कई देशों में भारत सरकार अपना राजदूत या उच्चायुक्त नियुक्त नहीं कर पा रही है. इसके पीछे एक कारण तो प्रधानमंत्री की राजनीतिक व्यस्तता बताई जा रही है, क्योंकि वही विदेश मंत्री और विदेश सचिव के साथ मिलकर राजदूत या उच्चायुक्त की नियुक्ति करते हैं.

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उत्तर प्रदेश : अन्ना और रामदेव, कांग्रेस के लिए ख़तरा

सरकार और राजनेता अपनी राजनीतिक रोटियां सेंकने के लिए किस तरह लोगों की छवि धूमिल करते हैं, इसकी ताजा मिसाल हैं समाजसेवी अन्ना हजारे और योग गुरु बाबा रामदेव. कुसूर यह है कि एक जनता को भ्रष्टाचार से मुक्ति दिलाने के लिए सख्त क़ानून की वकालत कर रहा है और दूसरा विदेशों में जमा काला धन वापस मंगाने के लिए हाथ-पैर मार रहा है.

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व़क्त की नज़ाकत को समझने की ज़रूरत

अक्सर यह माना जाता है कि नियम बनाए जाते हैं और बनाते समय ही उसे तोड़ने के रास्ते भी बन जाते हैं. क़ानून बनाए जाते हैं और उनसे बचने का रास्ता भी उन्हीं में छोड़ दिया जाता है तथा इसी का सहारा लेकर अदालतों में वकील अपने मुल्जिम को छुड़ा ले जाते हैं. शायद इसीलिए बहुत सारे मामलों में देखा गया है कि अपराधी बाहर घूमते हैं, जबकि बेगुनाह अंदर होते हैं.

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अवैध खनन : सरकार एजेंट की भूमिका निभा रही है

देश में अवैध खनन का कारोबार बदस्तूर जारी है. राजनेताओं के संरक्षण और अ़फसरों की मिलीभगत से खनन मा़फिया देश के खनिज बहुल राज्यों में प्राकृतिक खनिजों को लूटने में जुटे हैं.

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मथाई और विदेश नीति

अगले विदेश सचिव के तौर पर रंजन मथाई के नाम पर अंतिम मुहर लग गई है. इसी के साथ अगला विदेश सचिव कौन की दौड़ भी खत्म हो गई है. मथाई 2007 से फ्रांस में भारत के राजदूत के रूप में कार्य कर रहे थे. पाकिस्तान में भारतीय उच्चायुक्त शरत सभरवाल और संयुक्त राष्ट्र संघ में भारतीय राजदूत हरदीप पुरी इस पद के अन्य दावेदारों में थे, लेकिन आखिरकार मथाई को ही इस पद के लिए चुना गया.

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आंख बंद करने से समस्या हल नहीं होती

जब अटल जी प्रधानमंत्री बने तो भारतीय जनता पार्टी उस तरह दबाव नहीं डाल पाई, जैसे उसने वी पी सिंह पर डाला था. सा़फ कह दिया था जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार, शरद यादव एवं ममता बनर्जी ने कि अगर आपने एक बार भी नाम लिया राम जन्मभूमि विवाद और मंदिर बनाने का तो हम आपकी सरकार छोड़ देंगे.

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