क्‍या डॉ. लोहिया समाजवादियों को याद हैं?

समाजवादी आंदोलन का इतिहास जुड़ने से ज़्यादा टूटने का रहा है. जिस डा. लोहिया को कांग्रेस के ख़िला़फ मोर्चा बनाने में जनसंघ से समझौता करने में परहेज नहीं हुआ, उसी जनसंघ के नए चेहरे भाजपा को लेकर समाजवादी खेमों में पिछले अनेक वर्षों से खींचतान मची हुई है. यह और बात है कि अनेक राजनीतिक दबावों के कारण शरद यादव और नीतीश कुमार ने भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए को स्वीकार किया और अब बिहार या झारखंड या दूसरी जगहों पर भाजपा के साथ सरकार चलाना मंजूर किया है.

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