137 वीं जयंती पर याद किए जा रहे हैं साहित्य सम्राट मुंशी प्रेमचंद

प्रेमचंद को हिन्दी कहानी व उपन्यास का सम्राट कहा जाता है.  साहित्यकार मुंशी प्रेमचंद की आज 137वीं जयंती है. 8

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समाज की दरारों को आईना दिखाने की कोशिश

कवि यायावर का मानना है कि साहित्य सृजन बहुजन हिताय होना चाहिए. वह मानते हैं कि वर्तमान परिवेश या इस

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अमरकांत का न रहना

हमारे समय के कलम के सिपाही अमरकांत नहीं रहे. नई कहानी आंदोलन के अन्य पुरस्कर्ता अमरकांत को काल का निष्ठुर

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यस ! वी हैव प्रेमचंद

बेहद ही दिलचस्प, लेकिन हैरान करने वाला वाक़िया है. एक दिन यूं ही दफ्तर से निकला तो त़फरीह के लिए पास के ही एक मॉल में चला गया. अपनी आदत है कि जहां भी जाता हूं वहां किताबों की दुकान ढूंढकर एक बार उसके चक्कर ज़रूर लगाता हूं. नोएडा के उस शानदार मॉल में भी घूमते-घामते एक बहुत बड़ी किताबों की दुकान पर जा पहुंचा.

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पांच दशक से समीक्षा कर्म में लगे हैं मधुरेश

प्रेमचंद की मशहूर कहानी पंच परमेश्वर में अलगू चौधरी और खाला के बीच एक संवाद है- क्या बिगाड़ के डर से ईमान की बात न कहोगे. यह बात उस प्रसंग में कही गई है जब खाला, जुम्मन से परेशान होकर पंचायत करवानी चाहती है.

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साहित्यिक कृतियों के लिए शुभ संकेत

देशों में साहित्यिक कृतियों पर कई फिल्में बनीं और उन्होंने ऑस्कर से लेकर कई अन्य पुरस्कार जीतने के अलावा ख़ूब लोकप्रियता भी हासिल की. नोबेल पुरस्कार प्राप्त एलफ्रेड येलनिक की कृति पियानो टीचर पर बनी फिल्म हो या फिर अभी हाल में ही दिवंगत एरिक सीगल के उपन्यास लव स्टोरी पर इसी नाम से बनी फिल्म, सभी ने पश्चिम में ख़ासी धूम मचाई थी.

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