भविष्य के भ्रष्टाचारियों के कुतर्क

बहुत चीजें पहली बार हो रही हैं. पूरा राजनीतिक तंत्र भ्रष्टाचार के समर्थन में खड़ा दिखाई दे रहा है. पहले भ्रष्टाचार का नाम लेते थे, तो लोग अपने आगे भ्रष्टाचारी का तमगा लगते देख भयभीत होते हुए दिखाई देते थे, पर अब ऐसा नहीं हो रहा है. भ्रष्टाचार के ख़िला़फ जो भी बोलता है, उसे अजूबे की तरह देखा जाता है. राजनीतिक व्यवस्था से जुड़े हुए लोग चाहते हैं कि यह आवाज़ या इस तरह की आवाज़ें न निकलें और जो निकालते भी हैं, उनके असफल होने की कामना राजनीतिक दल करते हैं और राजनीतिक दल से जुड़े हुए लोग इसका उपाय बताते हैं कि भ्रष्टाचार के खिला़फ आवाज़ उठाने वाले लोग कैसे असफल होंगे.

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इतिहास का ड्राफ्ट

वर्ष 2000 में जब बिहार से अलग हटकर झारखंड राज्य अस्तित्व में आया था, उस व़क्त उम्मीद जगी थी कि इलाक़े के आदिवासियों का समुचित विकास होगा और उनकी समस्याओं पर बेहतर तरीक़े से ध्यान दिया जाएगा.

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मुद्रा की शक्ति और उसकी मान्यता

भारत को आज़ाद हुए 12 साल बीत गए. इन 12 वर्षों में 5 या 6 वित्त मंत्री बदल चुके हैं. हर मंत्री की मुद्रा नीति भिन्न-भिन्न थी.

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उत्तर प्रदेशः दिल्‍ली के ताज पर मुलायम की नजर

मुलायम सिंह यादव ने बेटे अखिलेश को उत्तर प्रदेश का ताज दिलाकर अपना धर्म-कर्म पूरा कर दिया. अब अखिलेश यादव की पुत्र धर्म निभाने की बारी है. समाजवादी पार्टी के तमाम नेता चाहते हैं कि वर्षों से प्रधानमंत्री बनने का सपना देख रहे उम्रदराज़ मुलायम के लिए अखिलेश राह निष्कंटक बनाएं. इसके लिए ठीक वैसी ही तैयारियां शुरू की जाएं, जैसी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए मुलायम सिंह यादव ने की थीं.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह ग्राम सभा, मोहल्ला सभा और स्वराज

इस बार पर्चे की शुरुआत मैं शिकायत से शुरू करना चाहता हूं. हमने चर्चा समूह की शुरुआत दोतरफा संवाद शुरू करने के लिए की थी, ताकि हम अपनी बात आप तक पहुंचा सकें और आप अपनी बात हम तक पहुंचा सकें. मुझे शिकायत है कि आप लोगों की तऱफ से बहुत कम प्रतिक्रिया आ रही है. पिछले हफ्ते हमने चर्चा की कि किस तरह झारखंड के कई स्कूलों में अध्यापकों की संख्या कम है, शहरों में सरकार द्वारा नियुक्त सफाई कर्मचारी अपने काम पर नहीं आते, इन समस्याओं का क्या समाधान है, इस पर चर्चा करें.

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युवा भ्रष्‍टाचार को लेकर चिंतित हैं

देश का इतिहास इस तथ्य का साक्षी है कि युवा वर्ग हमेशा से अपने हक़ के लिए ल़डता रहा है. संचार के इस युग में भी युवाओं में इस लक्षण को देखा जा रहा है. दुनिया एक प्लेटफॉर्म तक सीमित होकर रह गई है, जहां से सूचनाओं का संचार व्यापक स्तर पर हो रहा है.

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बेकारी की समस्या

सामान वित्त वितरण तो दरकिनार, आज तो भारत में सबसे बड़ी समस्या बेकारी की है. तृतीय पंचवर्षीय योजना सफलतापूर्वक संपादित हो जाने के बाद भी योजना आयोग को आशा है कि 2 करोड़ नए रोज़गार पैदा हो जाएंगे

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लोकपाल समस्या का समाधान नहीं है

जब हमने समाज में सुधार के लिए संसदीय लोकतंत्र को स्वीकार कर लिया है तो फिर इसके लिए किसी तरह की कोई जल्दबाज़ी करने की आवश्यकता नहीं है. हमें सांसदों और विधायकों की गुणवत्ता में सुधार के लिए लगातार प्रयास करना है, जिससे शासन की गुणवत्ता में सुधार होगा.

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ग़रीबी घटाने के लिए रणनीति बदलनी होगी

अन्ना हजारे एक टेलीविजन कार्यक्रम में गए और उन्होंने कहा कि भारत में दो तरह के लोग हैं. पहले तरह के लोग वे हैं, जो कहते हैं कि क्या खाऊं, मतलब यह कि उनके पास खाने को इतना कम है कि उन्हें यह सोचना पड़ता है कि वे क्या खाएं. दूसरे तरह के लोग वे हैं, जो कहते हैं कि क्या-क्या खाऊं, मतलब यह कि उनके पास खाने की इतनी चीजें उपलब्ध हैं कि उन्हें उनमें चुनना पड़ता है कि क्या-क्या खाएं.

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पाकिस्तान में स्थानीय निकायों की बदहाली

विकेंद्रीकरण संघीय व्यवस्था को एक मजबूत आधार प्रदान करता है, लेकिन पाकिस्तान में तो विकेंद्रीरण कहीं दिखता ही नहीं है. सवाल यह है कि क्या राज्य सभी शक्तियां अपने पास रखने का अधिकारी है और वह स्थानीय निकायों को कोई भी अधिकार देना अस्वीकार कर सकता है? 18वें संविधान संशोधन के अनुसार, अनुच्छेद 270-एए का क्लॉज-1 लोकल गवर्नमेंट ऑर्डिनेंस 2001 को निरस्त करता है.

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आपकी समस्याएं और सुझाव

आपके पत्र हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण होते हैं. इस अंक में हम उन पाठकों के पत्र शामिल कर रहे हैं, जिन्होंने बताया है कि आरटीआई के इस्तेमाल में उन्हें किन-किन परेशानियों का सामना करना पड़ता है और सूचना अधिकार क़ानून को लेकर उनके अनुभव क्या हैं. इसके अलावा इस अंक में मनरेगा योजना और जॉब कार्ड से संबंधित एक आवेदन भी प्रकाशित किया जा रहा है, ताकि आप इसका इस्तेमाल समाज के ग़रीब तबक़े के हित में करके भ्रष्ट व्यवस्था को सुधारने की एक कोशिश कर सकें.

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बुंदेलखंड : पैकेज के बावजूद बदहाली बरकरार

देश के बीमारू राज्यों में शुमार उत्तर प्रदेश के सात ज़िलों में फैला बुंदेलखंड आज भी जल, ज़मीन और जीने के लिए तड़पते लोगों का केंद्र बना हुआ है. रोज़ी-रोटी और पानी की विकट समस्या से त्रस्त लोग पलायन के लिए मजबूर हैं. प्रदेश के कुल क्षेत्रफल का आठवां हिस्सा खुद में समेटे यह समूचा अंचल भूमि के उपयोग-वितरण, सिंचाई, उत्पादन, सूखा, बाढ़ और आजीविका जैसे तमाम मामलों में बहुत पीछे है.

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आवासीय ईलाकों में गैरकानूनी व्यवसायिक गतिविधियां

यह समस्या लगभग हर छोटे-बड़े शहर की है. आवासीय-रिहायशी इलाक़ों में लालची और स्वार्थी क़िस्म के लोग ऐसे-ऐसे व्यवसाय शुरू कर देते हैं, जिनकी वजह से उस इलाक़े में रहने वाले लोगों के लिए कई सारी समस्याएं खड़ी हो जाती हैं. मसलन, जहां अवैध गोदाम, पार्किंग, मोटर वर्कशॉप चल रहे हैं, जिनकी वजह से वहां प्रदूषण तो बढ़ ही रहा है, साथ ही वहां रहने वाले लोग भी परेशान रहते हैं.

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सरकारी स्कूलों का लें हिसाब

शिक्षा का अधिकार क़ानून के तहत छह साल से लेकर 14 साल तक के बच्चों के लिए शिक्षा उनका मौलिक अधिकार होगा. इस क़ानून से उन करोड़ों बच्चों को फायदा मिलेगा, जो स्कूल नहीं जा पा रहे हैं. लेकिन सवाल यह है कि क्या इतने बच्चों को पढ़ाने के लिए प्राथमिक स्कूलों की मौजूदा संख्या पर्याप्त है? शायद नहीं.

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समस्याएं अनेक समाधान एक

आज देश में एक धारणा बन गई है कि किसी भी सरकारी कार्यालय में बिना रिश्वत दिए कोई काम नहीं कराया जा सकता है. बहुत हद तक यह विचार सही भी है, क्योंकि भ्रष्टाचार उस सीमा तक पहुंच गया है, जहां एक ईमानदार आदमी का ईमानदार बने रह पाना मुश्किल हो गया है. लेकिन इस भ्रष्ट व्यवस्था में भी आप यदि चाहें तो अपना काम बिना रिश्वत दिए करा सकते हैं.

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हर समस्या का निस्तारण न्यायालय में संभव नहीं

भारत में जैसे ही कोई मुद्दा उठता है, लोग उसे ज्वलंत की संज्ञा प्रदान कर देते हैं. भारतीय न्याय व्यवस्था क्या है, इस बात पर आराम से बैठकर धैर्यपूर्वक चर्चा होनी चाहिए. मैं लोगों और खासकर न्यायाधीशों से कहना चाहता हूं कि भारतीय न्यायपालिका किसी भी ऐसी बीमारी से ग्रस्त नहीं है, जिसे लाइलाज कहा जा सकता है.

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आंख बंद करने से समस्या हल नहीं होती

जब अटल जी प्रधानमंत्री बने तो भारतीय जनता पार्टी उस तरह दबाव नहीं डाल पाई, जैसे उसने वी पी सिंह पर डाला था. सा़फ कह दिया था जॉर्ज फर्नांडिस, नीतीश कुमार, शरद यादव एवं ममता बनर्जी ने कि अगर आपने एक बार भी नाम लिया राम जन्मभूमि विवाद और मंदिर बनाने का तो हम आपकी सरकार छोड़ देंगे.

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मुक्ति का महामंत्र

शिरडी के साई बाबा आज असंख्य लोगों के आराध्यदेव बन चुके हैं. उनकी कीर्ति दिन दोगुनी-रात चौगुनी बढ़ती जा रही है. यद्यपि बाबा के द्वारा नश्वर शरीर को त्यागे हुए अनेक वर्ष बीत चुके हैं, परंतु वह अपने भक्तों का मार्गदर्शन करने के लिए आज भी सूक्ष्म रूप से विद्यमान हैं. शिरडी में बाबा की समाधि से भक्तों को अपनी शंकाओं और समस्याओं का समाधान मिलता है.

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आदिवासी महिलाओं ने बदली गांव की तस्‍वीर

आदिवासी समुदाय के हौसले को तो हमेशा ही सराहा जाता रहा है. एक बार फिर से उन्होंने कुछ ऐसा कर दिखाया है, जो काबिले तारी़फ है. हम बात कर रहे हैं मिर्जापुर ज़िले की आदिवासी महिलाओं की. जी हां मिर्जापुर ज़िले के लालगंज क्षेत्र की आदिवासी महिलाओं ने अपनी मेहनत और लगन से इस गांव की तस्वीर बदल दी है.

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संसद के समक्ष चुनौतियां

जनता महंगाई की मार से त्रस्त है. अशिक्षा और बेरोज़गारी ने जीवन दु:खद बना दिया है. ग़रीबी एक अभिशाप बनकर रह गई है. बच्चों के लिए शिक्षा तो एक सपना भर है, क्योंकि पेट भरने को भोजन ही नहीं है.

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आगराः जल संकट और सरकारी भ्रष्‍टाचार

पश्चिमी उत्तर प्रदेश आज जल संकट की ज़बरदस्त मार झेल रहा है. यहां आज पीने और कृषि दोनों के लिए पानी की कमी है. जब पीने को पानी नहीं रहेगा और न ही कृषि के लिए, तो जनजीवन का क्या होगा? आज इसी सवाल से पश्चिमी उत्तर प्रदेश की जनता दो-दो हाथ कर रही है.

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पाठकों के पत्र, समस्या और सुझाव

शहर हो या गांव, सड़क की खुदाई एक आम समस्या है. कभी बिजली वाले, कभी जल विभाग तो कभी टेलीफोन वाले आकर आपके मुहल्ले की सड़क या मुख्य मार्ग की खुदाई कर देते हैं. फिर महीनों, कभी-कभी तो सालों तक उस सड़क को यूं ही छोड़ दिया जाता है या थोड़ी-बहुत मिट्टी डालकर अपनी लापरवाही ढक दी जाती है और फिर एक लंबे समय तक उस सड़क की मरम्मत नहीं होती.

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भारत में मुसलमानों की रोज़गार समस्या

सच्चर कमेटी ने देश में मुसलमान समुदाय के विभिन्न पक्षों का विस्तृत विश्लेषण किया और सारी बातें कमेटी की रिपोर्ट में उल्लिखित हैं. मुसलमानों की पहचान ही उनके विकास की सबसे बड़ी बाधा है, यह बात भी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कही गई है. साथ ही यह भी स्पष्ट है कि इससे ही कई और बाधाएं भी पैदा हो जाती हैं.

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आपकी समस्याएं, हमारे सुझाव

इस स्तंभ के माध्यम से हम अपने पाठकों तक सूचना क़ानून से संबंधित जानकारियां पहुंचाने की कोशिश कर रहे हैं. यह ख़ुशी की बात है कि हमें पाठकों के पत्र लगातार मिल रहे हैं. इस अंक में हम अपने कुछ पाठकों के पत्र शामिल कर रहे हैं, जिनमें उन्होंने अपनी समस्याओं के संबंध में सवाल पूछे हैं, साथ ही अपने अनुभव भी हमारे साथ बांटे हैं.

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मिस्‍टीरियस शैंपू

न झटको जुल्फ से पानी कि मोती फूट जाएंगे…यह गीत अब दीवाने नहीं गाया करते, क्योंकि अब गोरियों के चेहरों पर लंबी जुल्फों के जाल नहीं बिखरते. आजकल प्रदूषण, धूल, धूप, उमस और गंदगी के चलते प्राकृतिक सुंदरता का अस्तित्व नहीं रह गया है.

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समस्या है तो समाधान है

चौथी दुनिया का आरटीआई अभियान अब लोगों तक पहुंचने लगा है. हमारे पाठकों और आम जनता ने अपनी समस्याएं अब हमसे बांटनी शुरू कर दी हैं. इसका सबूत है उनके द्वारा भेजे गए पत्र, ईमेल, फोन कॉल्स. यही नहीं, लोग अब हमारे दफ्तर में भी आकर हमसे सलाह ले रहे हैं.

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अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय की समस्याएं

सबसे पहले मैं एक बात स्पष्ट करना चाहूंगा कि अलीगढ़ से मेरा कोई ख़ास वास्ता नहीं है. मुझे कभी अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय (एएमयू) में पढ़ाई करने का मौक़ा नहीं मिला. फिर भी कुछ ऐसी वजहें बताना चाहूंगा, जिनके चलते मुझे लगता है कि इस विश्वविद्यालय से मेरा भी कुछ रिश्ता है.

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