यह संसद संविधान विरोधी है

सरकार को आम जनता की कोई चिंता नहीं है. संविधान के मुताबिक़, भारत एक लोक कल्याणकारी राज्य है. इसका साफ़ मतलब है कि भारत का प्रजातंत्र और प्रजातांत्रिक ढंग से चुनी हुई सरकार आम आदमी के जीवन की रक्षा और उसकी बेहतरी के लिए वचनबद्ध है. लेकिन सरकार ने इस लोक कल्याणकारी चरित्र को ही बदल दिया है. सरकार बाज़ार के सामने समर्पण कर चुकी है, लेकिन संसद में किसी ने सवाल तक नहीं उठाया.

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उठो जवानो तुम्‍हें जगाने क्रांति द्वार पर आई है

एक कहावत है, प्याज़ भी खाया और जूते भी खाए. ज़्यादातर लोग इस कहावत को जानते तो हैं, लेकिन बहुत कम लोगों को ही पता है कि इसके पीछे की कहानी क्या है. एक बार किसी अपराधी को बादशाह के सामने पेश किया गया. बादशाह ने सज़ा सुनाई कि ग़लती करने वाला या तो सौ प्याज़ खाए या सौ जूते. सज़ा चुनने का अवसर उसने ग़लती करने वाले को दिया.

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टीम अन्‍नाः मिलिए पर्दे के पीछे के नायकों से

आप जैसे ही अरविंद केजरीवाल के दफ्तर ग़ाज़ियाबाद के कौशांबी स्थित पीसीआरएफ पहुंचते हैं, वहां आपकों कई युवा लैपटॉप से जूझते नज़र आएंगे. कोई मोबाइल पर निर्देश देता नज़र आएगा तो कोई बैनर-पोस्टर संभालता हुआ. दरअसल ये सभी इंडिया अगेंस्ट करप्शन के बैनर तले चल रहे जन लोकपाल आंदोलन की तैयारी में व्यस्त हैं.

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अन्ना की लडा़ई और साजिश की सीडी

अन्ना हजारे की लड़ाई कठिन होती जा रही है, आशंका भी यही थी. संयुक्त समिति के सदस्य शांति भूषण के विरुद्ध पहले संपत्ति की ख़रीद में कम स्टांप शुल्क अदा करने का मामला और फिर एक सीडी के ज़रिए चार करोड़ रुपये रिश्वत लेने-देने की साज़िश का सामने आना इस बात के संकेत हैं कि जन लोकपाल विधेयक का प्रारूप बिना बाधा संपन्न न होने पाए.

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भ्रष्टाचार के खिला़फ जनता को आगे आना होगा

हिंदुस्तान सबसे बड़ा प्रजातंत्र होने के बावजूद दुनिया का 72 वां सबसे भ्रष्ट देश है. दुनिया में 86 ऐसे देश हैं, जहां भारत से कम भ्रष्टाचार है. आज़ादी के बाद से ही हम भ्रष्टाचार के साथ जूझ रहे हैं. भ्रष्टाचार के खिला़फ कारगर क़ानून बनाने की योजना इंदिरा गांधी के समय से चल रही है. 42 साल गुज़र गए, फिर भी हमारी संसद लोकपाल क़ानून बना नहीं सकी.

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