बांग्लादेश की विवादास्पद और निर्वासन का दंश झेल रही लेखिका तसलीमा नसरीन ने एक बार फिर से नए विवाद को जन्म दे दे दिया है. तसलीमा ने बंग्ला के मूर्धन्य लेखक और साहित्य अकादमी के अध्यक्ष सुनील गंगोपाध्याय पर यौन शोषण का बेहद संगीन इल्ज़ाम जड़ा है. तसलीमा ने सोशल नेटवर्किंग साइट ट्विटर पर लिखा- सुनील गंगोपाध्याय किताबों पर पाबंदी के पक्षधर रहे हैं.
Tags: Autobiography, Headlines, Sunil Gangopadhyay, Taslima Nasreen, Twitter, book, charges, controversial, controversy, exploitation, literary, literature, networking, published, publishing, sexual, site, writer, writers, आत्मकथा, आरोप, किताब, ट्विटर, तसलीमा नसरीन, नेटवर्किंग, पुस्तक, प्रकाशन, प्रकाशित, यौन, लेखक, लेखिका, विवाद, विवादास्पद, शोषण, साइट, साहित्य, साहित्यकार, साहित्यिक, सुनील गंगोपाध्याय, सुर्खियां Posted in जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज, साहित्य by Author: अनंत विजय | 2 Comments » | Read More... |
इंसान ही नहीं दुनिया की कोई भी नस्ल जल, जंगल और ज़मीन के बिना ज़िंदा नहीं रह सकती. ये तीनों हमारे जीवन का आधार हैं. यह भारतीय संस्कृति की विशेषता है कि उसने प्रकृति को विशेष महत्व दिया है. पहले जंगल पूज्य थे, श्रद्धेय थे. इसलिए उनकी पवित्रता को बनाए रखने के लिए मंत्रों का सहारा लिया गया. मगर गुज़रते व़क्त के साथ जंगल से जु़डी भावनाएं और संवेदनाएं भी बदल गई हैं.
Tags: Author, Indian, Land, Mantra, book, culture, forest, life, nature, people, publishing, race, water, इंसान, जंगल, जल, जीवन, नस्ल, पुस्तक, प्रकाशन, प्रकाशित, प्रकृति, भारतीय, मंत्र, लेखक, संस्कृति, ज़मीन Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | No Comments » | Read More... |
गीत मन के भावों की सबसे सुंदर अभिव्यक्ति हैं. साहित्य ज्योतिपर्व प्रकाशन द्वारा प्रकाशित पुस्तक मेरे गीत में सतीश सक्सेना ने भी अपनी भावनाओं को शब्दों में पिरोकर गीतों की रचना की है. वह कहते हैं कि वास्तव में मेरे गीत मेरे हृदय के उद्गार हैं. इनमें मेरी मां है, मेरी बहन है, मेरी पत्नी है, मेरे बच्चे हैं. मैं उन्हें जो देना चाहता हूं, उनसे जो पानी चाहता, वही सब इनमें है.
Tags: Satish Saxena, Song, book, literature, my song, poet, publishing, work, कवि, गीत, पुस्तक, प्रकाशन, प्रकाशित, मेरे गीत, रचना, सतीश सक्सेना, समाज, साहित्य Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | No Comments » | Read More... |
साहित्य समाज का आईना होता है. जिस समाज में जो घटता है, वही उस समाज के साहित्य में दिखलाई देता है. साहित्य के ज़रिये ही लोगों को समाज की उस सच्चाई का पता चलता है, जिसका अनुभव उसे खुद नहीं हुआ है. साथ ही उस समाज की संस्कृति और सभ्यता का भी पता चलता है. जिस समाज का साहित्य जितना ज़्यादा उत्कृष्ट होगा, वह समाज उतना ही ज़्यादा सुसंस्कृत और समृद्ध होगा.
Tags: Ahkbar, Film, Javed Akhtar, culture, literary, literature, lyricist, magazines, poetry, publishing, अ़खबार, गीतकार, जावेद अख्तर, पत्रिका, प्रकाशित, फिल्म, रचनाएं, संस्कृति, समाज, साहित्य, साहित्यकार, साहित्यिक Posted in कला और संस्कृति, कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | No Comments » | Read More... |
बचपन, उम्र का सबसे प्यारा दौर होता है. यह अलग बात है कि जब हम छोटे होते हैं तो ब़डा होना चाहते हैं, क्योंकि कई बार स्कूल, प़ढाई और रोकटोक से परेशान हो जाते हैं. हम कहते हैं कि अगर ब़डे होते तो हम पर किसी तरह की कोई पाबंदी नहीं होती, न स्कूल ड्रैस पहननी प़डती और न ही रोज़ सुबह जल्दी उठकर स्कूल जाना प़डता. मगर जब हम ब़डे होते हैं, तो अहसास होता है कि वाक़ई बचपन कितना प्यारा होता है.
Tags: Anand Kumar, Children, Phdai, School, book, hair, poet, poetry, publishing, आनंद कुमार, कवि, कविता, किताब, प़ढाई, प्रकाशन, बच्चों, बाल, स्कूल Posted in जरुर पढें, साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | No Comments » | Read More... |
अनंग प्रकाशन द्वारा प्रकाशित समकालीन गीतिकाव्य : संवेदना और शिल्प में लेखक डॉ. रामस्नेही लाल शर्मा यायावर ने हिंदी काव्य में 70 के दशक के बाद हुए संवेदनात्मक और शैल्पिक परिवर्तनों की आहट को पहचानने की कोशिश की है. नवगीतकारों को हमेशा यह शिकायत रही है कि उन्हें उतने समर्थ आलोचक नहीं मिले, जितने कविता को मिले हैं. दरअसल, समकालीन आद्यावधि गीत पर काम करने का खतरा तो बहुत कम लोग उठाना चाहते हैं.
Tags: Ananga, Author, Books, Hindi, Lyrics, Song, contemporary, craft, criticism, language, poetry, publishing, research, अनंग, आलोचक, कविता, काव्य, गीत, गीतिकाव्य, ग्रंथ, प्रकाशन, प्रकाशित, भाषा, लेखक, शिल्प, शोध, समकालीन, हिंदी Posted in जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | No Comments » | Read More... |
हाल में आरोही प्रकाशन ने रेणु हुसैन की कविताओं के दो संग्रह प्रकाशित किए हैं. पहला कविता संग्रह है पानी-प्यार और दूसरे कविता संग्रह का नाम है जैसे. अंग्रेज़ी की वरिष्ठ अध्यापिका रेणु हुसैन स्कूल के व़क्त से ही कविताएं लिख रही हैं.
Tags: competition, expression, human, poetry, publishing, social, अभिव्यक्ति, कविता, प्रकाशन, प्रतियोगिता, मानवीय, सामाजिक Posted in जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: फ़िरदौस ख़ान | 1 Comment » | Read More... |
बेहद ही दिलचस्प, लेकिन हैरान करने वाला वाक़िया है. एक दिन यूं ही दफ्तर से निकला तो त़फरीह के लिए पास के ही एक मॉल में चला गया. अपनी आदत है कि जहां भी जाता हूं वहां किताबों की दुकान ढूंढकर एक बार उसके चक्कर ज़रूर लगाता हूं. नोएडा के उस शानदार मॉल में भी घूमते-घामते एक बहुत बड़ी किताबों की दुकान पर जा पहुंचा.
Tags: Noida, Office, Premchand, book, mall, publishing, किताब, दफ्तर, नोएडा, प्रकाशन, प्रेमचंद, मॉल Posted in कला और संस्कृति, जरुर पढें, समाज, साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
हिंदी में प्रकाशित किसी भी कृति-उपन्यास या कहानी संग्रह या फिर कविता संग्रह को लेकर हिंदी जगत में उस तरह का उत्साह नहीं बन पाता है, जिस तरह अंग्रेजी और अन्य भाषाओं में बनता है. क्या हम हिंदी वाले अपने लेखकों को या फिर उनकी कृतियों को लेकर उत्साहित नहीं हो पाते हैं. हिंदी में प्रकाशक पाठकों की कमी का रोना रोते हैं, जबकि पाठकों की शिकायत किताबों की उपलब्धता को लेकर रहती है.
Tags: Amitav Ghosh, English, Hindi, authors, book, language, literary, newspaper, novel, published, publishers, publishing, अंग्रेजी, अखबार, अमिताभ घोष, उपन्यास, किताब, प्रकाशक, प्रकाशन, प्रकाशित, भाषा, लेखक, साहित्यिक, हिंदी Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, विधि-न्याय, समाज, साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
पत्रकारिता को अंग्रेज़ी में जर्नलिज़्म कहते हैं. इसकी व्यापक परिभाषा देना बहुत कठिन है. कई लोगों ने इसे अपने तौर पर समझाने की कोशिश की है. अंग्रेज़ी के प्रसिद्ध साहित्यकार मैथू आर्नल्ड ने पत्रकारिता को जल्दबाज़ी में लिखा गया साहित्य कहा है, जो इस पेशे का निरादर है और मौजूदा दौर का कोई भी पत्रकार इस परिभाषा से संतुष्ट नहीं होगा.
Tags: Journalism, Urdu, literature, news, press, publishing, अख़बार, उर्दू, पत्रकार, पत्रकारिता, प्रकाशन, साहित्य, ख़बर Posted in जरुर पढें, साहित्य by Author: डॉ. कमर तबरेज | No Comments » | Read More... |
राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने अपनी मशहूर किताब संस्कृति के चार अध्याय में कहा है कि विद्रोह, क्रांति या बग़ावत कोई ऐसी चीज नहीं है, जिसका विस्फोट अचानक होता है. घाव भी फूटने के पहले बहुत दिनों तक पकता रहता है. दिनकर जी की ये पंक्तियां उनके अपने गृहराज्य पर भी पूरी तरह से लागू होती हैं.
Tags: Bihar, Bihar Vihar, Ramdhari Singh Dinkar, Vinod Anupam, authors, book, cultural, culture, education, publishing, किताब, प्रकाशन, बिहार, बिहार विहार, रामधारी सिंह दिनकर, लेखक, विनोद अनुपम, शिक्षा, संस्कृति, सांस्कृतिक Posted in कानून और व्यवस्था, जरुर पढें, राज्य, समाज, साहित्य by Author: अनंत विजय | No Comments » | Read More... |
|
जनता एक ज़िम्मेदार संसद का निर्माण करे |
|