कानपुर रेल हादसे में बड़ा खुलासा, कुकर बम से किया गया था विस्फोट

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : हाल ही में कानपुर में एक दर्दनाक ट्रेन हादसा हुआ था जिसमें सैकड़ों लोगों ने

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विकास के साथ राजनीति का जरिया बना फ्लाईओवर

विकास का पुल राजनीतिक प्रतिद्वंद्वी का कद छोटा कर सकता है, उसे ढांप सकता है. उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री अखिलेश

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सरकार ग़रीबों को तमाचा मारना बंद करे

पश्चिम बंगाल में सत्ता परिवर्तन के बाद कई बच्चों की मौत हो गई है, यूपीए-1 की तुलना में यूपीए-2 के कार्यकाल में रेल दुर्घटनाएं बढ़ गई हैं, पर इस तऱफ तृणमूल कांगे्रस के रेल मंत्री का ध्यान नहीं है, लेकिन शरद पवार को लगा एक थप्पड़ सबका ध्यान आकर्षित कर रहा है.

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विकास दर धीरे-धीरे गिरने लगी है

वेन जियाबाओ पिछले दिनों लंदन गएऔर वहां उन्होंने ब्रिटिश प्रधानमंत्री को इस बात के लिए फटकारा कि उन्हें अपने अतिथि के सामने मानवाधिकार पर भाषण नहीं देना चाहिए, लेकिन तब ब्रिटिश प्रधानमंत्री डेविड कैमरन के पास जियाबाओ की बात सुनने के अलावा कोई विशेष चारा नहीं था, क्योंकि वह चीन से व्यापार और निवेश को इच्छुक थे.

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जज्बे को सलाम

राजधानी दिल्ली के नज़दीक ग्रामीणों ने ख़ुद पैसे एकत्र करके एक रेलवे स्टेशन बनाया है. सीमावर्ती गुड़गांव इलाक़े के गांव ताजनगर और आसपास के लोगों ने दो प्लेटफ़ॉर्म के निर्माण के लिए 20,80,786 रुपये का चंदा इकट्ठा किया. पूरा काम ख़त्म होने में सात महीने लगे.

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गोधरा फ़ैसला: छलनी से ज्यादा छेद

बीती 22 फ़रवरी को सत्र न्यायालय ने गोधरा रेल आगज़नी मामले में अपना फैसला सुनाया. अदालत ने गुजरात सरकार के इस आरोप को सही ठहराया कि स्थानीय मुसलमानों ने साबरमती एक्सप्रेस के एस-6 कोच में आग लगाने का षड्‌यंत्र रचा था. जिन 94 आरोपियों पर मुक़दमा चल रहा था, उनमें से 63 को बरी कर दिया गया और 31 को साज़िश के तहत कारसेवकों को ज़िंदा जलाने का दोषी ठहराया गया

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कहीं सपना ही न रह जाए

पूर्वोतर रेलवे के गोरखपुर नरकटियागंज खंड स्थित पनियहवा-छितौनी-तमकुही रोड बड़ी रेल लाइन राजनीतिक दांव-पेंच का शिकार होकर रह गई है. तत्कालीन रेलमंत्री लालू प्रसाद ने 20 फरवरी 2007 को इसका शिलान्यास किया था.

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रांची-कोडरमा रेल परियोजनाः भूमिगत आग और भू-धसान के खतरे से बेखबर सरकार

झारखंड की सबसे बड़ी रेल परियोजना पर भूमिगत आग और भू-धसान का गंभीर खतरा मंडरा रहा है, लेकिन रेल मंत्रालय एवं झारखंड सरकार के कानों पर जू नहीं रेंग रही. आज़ादी के बाद से ही झारखंड के सबसे पुराने ज़िले हज़ारीबाग को रेल लाइन से जोड़ने की ज़ोरदार मांग उठती रही है, क्योंकि हज़ारीबाग देश का अकेला प्रमंडलीय मुख्यालय है, जो रेल लाइन से अभी तक जुड़ा नहीं है.

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बिना इंजन के दानापुर रेलमंडल

दानापुर रेलमंडल हीरक जयंती मनाने की ओर अग्रसर हो रहा है, लेकिन आज भी इस मंडल के पास एक भी अपना इंजन नहीं है. नतीजा यह है कि मंडल के अधीन चलने वाली मेल एक्सप्रेस और सवारी गाड़ियों के साथ-साथ मालगाड़ियों का परिचालन दूसरे मंडल के इंजन की सहायता से किया जा रहा है.

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सरकारी घोषणाएं कहां और क्यों गुम हो जाती हैं?

आमतौर पर एक सरकार जनता की सुविधाओं के लिए कोई योजना बनाती है या उसकी घोषणा करती है और बाद की कोई सरकार आकर उस योजना को ठंडे बस्ते में डाल देती है. इसके अलावा कई मौक़ों पर (ख़ासकर किसी आपदा के व़क्त) सरकार की तऱफ से मदद की घोषणा की जाती है, लेकिन व़क्त बीतने के साथ ही वह अपना वायदा भूल जाती है.

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सतना पुलिस चौकी को अस्तित्व की तलाश

सतना स्टेशन स्थित जीआरपी पुलिस की चौकी अंग्रेज़ों के राज्य में 160 साल पहले स्थापित की गई थी. मुंबई-हावड़ा प्रमुख रेल मार्ग से गुज़रने वाली सभी ट्रेनें इस चौकी से होकर ही गुज़रती थी. चौकी की स्थापना के समय सतना रेलवे स्टेशन से काशी एक्सप्रेस, मुंबई हाबड़ा मेल, इटारसी इलाहाबाद पेसेंजर और बाम्बे जनता मेल ही गुज़रता था.

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भाजपा और कांग्रेस में रेलवे ट्रैक पर श्रेय की दौड़

ग्‍वालियर से श्योपुर तक चलने वाली छोटी लाईन रेल को बड़ी लाईन में किसने परिवर्तित करवाया, इसका श्रेय लेने के लिए इन दिनों कांग्र्रेस और भाजपा के मध्य संघर्ष चल रहा है. भाजपा के नेता इसे अपनी मांग की पूर्ति बताकर विजयी मुद्रा में खड़े हैं, तो वहीं क्षेत्र के प्रभावशाली केंद्रीय मंत्री सिंधिया भी अन्य केंद्रीय मंत्रियों से अपनी वाहवाही का गान करवा रहे है.

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मुख्‍यमंत्री की कुर्सी अभी दूर है

रेलवे परियोजनाओं के उद्घाटन की हड़बड़ी के कारण एक रोचक वाकया हो गया. 20 मार्च को महाराजा एक्सप्रेस के उद्घाटन समारोह के लिए अख़बारों को जो विज्ञापन जारी किया गया, उसके ऩक्शे में दिल्ली को पाकिस्तान और कोलकाता को बंगाल की खाड़ी में दिखाया गया.

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