भारतीय जनता पार्टी अब राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की राह पर चलेगी. भाजपा पहले भी संघ के इशारे पर ही चलती थी, लेकिन थोड़ा पर्दा था. नए अध्यक्ष नितिन गडकरी ने यह पर्दा भी उठा दिया है. पहले संघ के लोग कहते थे कि भाजपा के क्रियाकलापों में संघ का कोई हस्तक्षेप नहीं है और भाजपा के नेता कहते थे कि संघ उनके लिए वैचारिक प्रेरणास्रोत है, भाजपा के काम में संघ की कोई दख़लअंदाज़ी नहीं है.
साधु-संतों को समाज में नैतिकता, प्यार, स्नेह, सहिष्णुता, अपरिग्रह का बुनियादी संदेश, जो सनातन धर्म का आधार है, फैलाना चाहिए. उन्हें वसुधैव कुटुंबकम और सर्वे भवन्ति सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामया याद रखना चाहिए, जो भारतीय समाज का पांच हज़ार वर्ष से ज़्यादा समय से आधार रहा है, पर वे तो इसे भूलते जा रहे हैं.
कसम राम की खाते हैं, मंदिर वही बनाएंगे.
अरे आडवाणी जी,चुनाव आ गया क्या?
यह क्या है?
चुनावी घोषणापत्र. हमने विवादित स्थल पर राम—मंदिर बनाने का फिर वादा किया हैं.
विवादित स्थल पर मंदिर?
हॉ इससे दो समुदायों में तनाव. हिंसा, घृणा व दूरी बढेगी. वाटों का ध्रवीकरण होगा और हमे लाभ होगा.
लेकिन ये सब तो पाप है. हमें नहीं चाहिए मंदिर इस कीमत पर.
हे सतयुग के मर्यादापुरूषोत्तम आपकी मर्यादाएं और सोच आउट—डेटेड हो चुके हैं.
ये कलियुग है. इससे पाप, धोखा फरेब से सारे सुख मिलते हैं. यदा यदा अधर्मस्य….
बस…. बस…. बस….।।।
आप महान हैं।