2019: नीतीश के लिए कितना मुफीद रहेगा बिहार का जातीय-राजनीतिक समीकरण…

बिहार के चुनावी समीकरण में जातीय  समीकरण की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण होती है. राज्य के लगभग 16 प्रतिशत दलित-महादलित और

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राजनीति के पत्तल पर दही-चूड़ा भोज

पटना में विभिन्न राजनीतिक पार्टियों द्वारा मकर संक्रांति पर आयोजित चूड़ा-दही भोज राजनीतिक जोर आजमाइश के केंद्र में रहे. पिछले

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आगामी लोकसभा चुनाव में बिहार में सीट बंटवारे पर एनडीए में गतिरोध: बाहर शांति, अंदर बवाल

राजनीति का उसूल है कि जनता-जनार्दन को ऐसा आभास दीजिए, जैसे मेरे अंगने में सब कुछ ठीक-ठाक है और मौका

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अब होटलों में हाफ-फुल प्लेट का झंझट ख़त्म, सरकार तय करेगी थाली में कितना होगा खाना

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मन की बात कार्यक्रम में होटल और रेस्टोरेंट में खाने की

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अस्पताल में भर्ती कराये गये राम विलास पासवान, सांस लेने में हो रही थी दिक्कत

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : सांस लेने में दिक्कत होने के बाद बीते गुरूवार को केंद्रीय मंत्री एवं लोजपा प्रमुख

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बिहार विधान परिषद चुनाव : प्रत्याशियों की नहीं, सुप्रीमो की अग्नि परीक्षा

बिहार के राजनीतिक हलकों में लाख टके का सवाल है कि विधान परिषद चुनाव में क्या होगा? इसका उत्तर बहुत

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बिहार विधानसभा चुनाव पर चौथी दुनिया का पहला सर्वे : नीतीश सबसे आगे

बिहार विधानसभा चुनाव की दहलीज पर ख़डा है. इस वजह से यहां चुनावी सरगर्मियां तेज हो गई हैं. राज्य में

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बिहार की राजनीति में वंशवाद का ज़हर

लालू  यादव और रामविलास पासवान बिहार की राजनीति में वंशवाद का जहर मिलाने पर अ़डे हैं. पासवान के बेटे चिराग

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अन्ना और रामदेव की वजह से आशाएं जगी हैं

अन्ना हजारे और बाबा रामदेव जैसे लोगों को सावधान हो जाना चाहिए. इतने दिनों के बाद भी उन्हें यह समझ में नहीं आ रहा है कि कौन-सा सवाल उठाना चाहिए और कौन-सा नहीं. एक वक़्त आता है, जिसे अंग्रेजी में सेचुरेशन प्वाइंट कहते हैं. शायद जो नहीं होना चाहिए, वह हो रहा है, यानी लोकतंत्र सेचुरेशन प्वाइंट की तऱफ ब़ढ रहा है.

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मुस्लिम समाज का दर्द

बिहार में आश्चर्यजनक चीजें होती हैं. मुसलमानों की समस्याओं पर सेमिनार हो, वक्ता राजनीतिक दलों के नेता और सामाजिक कार्यकर्ता हों और कोई आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद की बात न करे, अगर कोई संघ परिवार और बजरंग दल को दोषी और अपराधी न बताए, अगर बाबरी मस्जिद का मुद्दा न उठे, अगर कोई भावनात्मक भाषण न दे, अगर मौलाना और मौलवी इस्लाम पर आने वाले खतरे को छोड़, शिक्षा और नौकरी की बातें करने लगें, तो हैरानी होती है.

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कांग्रेस मीठा जहर है

किताब लिखना बड़े-बड़े राजनेताओं और नौकरशाहों का नया शौक बन गया है. जब इन दोनों में से कोई किताब लिखता है तो बड़ा विवाद खड़ा हो जाता है. नौकरशाह कई राज़ खोलते हैं. सेवा में रहते हुए जिन बातों को वे नहीं बोल पाते, रिटायर होने के बाद किताबों में लिखते हैं.

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पारस की बंध गई पोटली

खगड़िया ज़िले के बेहद पिछड़े विधानसभा क्षेत्र अलौली में अंतत: 33 वर्षों के बाद लोजपा प्रदेश अध्यक्ष पशुपति कुमार पारस की पोटली बंध ही गई. लोजपा सुप्रीमो रामविलास पासवान के अनुज पारस ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि जनता उन्हें सिर आंखों पर बिठाने के बजाए ज़मीन पर पटक देगी. दरअसल हार से बचने के लिए उन्होंने अपने चहेते रामचंद्रा सदा को जदयू का टिकट यह सोचकर दिलवाया था कि उन्हें मुसहर समाज के तीन-तीन प्रत्याशियों के खड़े रहने से जीतने में मदद मिलेगी. हुआ उल्टा. महादलित समाज के लोगों ने एकजुट होकर उन्हें बाहर का रास्ता दिखा दिया.

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राहुल को घेरेंगे तेजस्‍वी और चिराग

बिहार विधानसभा के चुनाव में राहुल फैक्टर की बात तो पहले से हो रही थी, पर चुनावी शंखनाद के बाद इसके तेज होते असर ने नीतीश, लालू एवं पासवान जैसे दिग्गजों की नींद उड़ा दी है. राहुल गांधी युवाओं से बार-बार अपील कर रहे हैं कि चुनिए उन्हें, जिन्हें देश ने चुना है. राहुल की सभाओं में युवाओं की बढ़ती भागीदारी यह महसूस करा रही है कि सूबे के युवा वोटरों के मन में क्या चल रहा है.

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बिहार चुनावः नीतीश, लालू और राहुल की अग्निपरीक्षा

बिहार के चुनाव पर पूरे देश की नज़र है. क्या नीतीश कुमार फिर से मुख्यमंत्री बन जाएंगे, क्या लालू यादव अपनी खोई हुई लोकप्रियता वापस पाने में कामयाब हो जाएंगे, क्या रामविलास पासवान के पास सरकार बनाने की चाबी आ जाएगी, क्या मुसलमान इस बार भाजपा-जदयू गठबंधन के साथ चले जाएंगे, क्या बिहार के चुनाव में लोग विकास के मुद्दे पर वोट देंगे या फिर जातिवाद का बोलबाला रहेगा, क्या भारतीय जनता पार्टी बिहार में हिंदुत्व के एजेंडे को छोड़ देगी आदि जैसे कई सवाल हैं, जिन पर बिहार ही नहीं, पूरे देश की जनता विचार कर रही है.

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बिहार विधानसभा चुनावः सज गई सेना

बिहार में चुनावी महासंग्राम के लिए अपनी-अपनी सेनाओं को सजाने और उसे चमकाने का काम सभी दिग्गजों ने लगभग पूरा कर लिया है. चुनावी हथियारों से लैस करके सेना को मैदान-ए-जंग में कूदने की हरी झंडी चरणबद्ध तरीके से दिखाई जा रही है. जहां पेच फंस रहा है, उसे रतजगा करके सुलझाया जा रहा है, ताकि एक-एक पल का फायदा उठाया जा सके.

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यह लालू, नीतीश और राहुल की अग्निपरीक्षा है

बिहार चुनाव राजनीति की महत्वपूर्ण प्रयोगशाला बन गया है. अगर इसे पुराने बिहार के पैमाने पर देखें तो और मज़ा आएगा. पहले झारखंड के संकेत देखिए. अर्जुन मुंडा ने आडवाणी जी की अनदेखी की. आडवाणी सहित मुरली मनोहर जोशी और सुषमा स्वराज सरकार बनाना नहीं, चुनाव चाहते थे.

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कांग्रेस के हाथ लगेगी सत्ता की चाबी

पांच साल पहले रामविलास पासवान सत्ता की चाबी लेकर घूम रहे थे. बहुमत न मिलने के कारण नीतीश और लालू उन्हें मनाते रहे, लेकिन उन्होंने सत्ता की चाबी किसी को नहीं सौंपी. नतीजा यह हुआ कि किसी की सरकार नहीं बनी और सूबे में राष्ट्रपति शासन लगाना पड़ा. आज हालात बदल गए हैं.

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नीतीश के नहले पर लालू का दहला

मैदान चाहे राजनीति का हो या युद्ध का, एक नियम दोनों ही लड़ाई में लागू होता है कि अगर सवाल जीवन-मरण का हो तो राजा को खुद आगे बढ़कर सेना की कमान संभालनी चाहिए. यह ऐसी चाल है, जो थकी-हारी सेना में जीत का जोश भरने के अलावा राजा को यह एहसास दिलाती है कि अगर इस बार चूके तो किस्सा खत्म.

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ललन की खिचड़ी में पासवान का तड़का

किसी जासूसी फिल्म की तरह बिहार की चुनावी पटकथा भी रोमांच और अटकलों से सराबोर नज़र आने लगी है. हाल यह है कि आज की तस्वीर कल से जुदा दिखती है. दोस्त और दुश्मन हमशक्ल लग रहे हैं. दिन में एक दूसरे से गले मिलते नेता देर रात में उसकी चुनावी क़ब्र खोदने की रणनीति बनाने में मशगूल दिखते हैं.

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लालू और पासवान भी दौड़ में

चुनाव लड़ने और जीतने की रणनीति पर तो इन दिनों दिन-रात काम चल ही रहा है, पर चुनाव बाद की संभावित परिस्थितियों पर भी सभी दलों के महारथी माथा खपा रहे हैं. वजह, सभी दलों का यह प्रारंभिक आकलन है कि किसी भी दल को स्पष्ट बहुमत नहीं मिलने वाला.

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बारिश से बेहाल नेता

चुनावी मानसून पता नहीं किस नेता के लिए कामयाबी की फुहारें लाए और किस नेता को वृष्टि छाया क्षेत्र में सूखा छोड़ दे, यह तो समय बताएगा, लेकिन प्राकृतिक बारिश की ठंडी फुहारों के बावजूद कुछ नेताओं के माथे से पसीने का गिरना थम ही नहीं रहा. बारिश से प्रदेश की जनता तो राहत महसूस कर रही है पर नेता आहत.

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