असफल वित्त मंत्री सक्रिय राष्‍ट्रपति

वर्ष 2008 में ग्लोबल इकोनॉमी स्लो डाउन (वैश्विक मंदी) आया. उस समय वित्त मंत्री पी चिदंबरम थे. हिंदुस्तान में सेंसेक्स टूट गया था, लेकिन आम भावना यह थी कि इस मंदी का हिंदुस्तान में कोई असर नहीं होने वाला है. उन दिनों टाटा वग़ैरह का प्रदर्शन बहुत अच्छा रहा था और एक धारणा यह बनी कि भारतीय अर्थव्यवस्था को विश्व की अर्थव्यवस्था की ज़रूरत नहीं है.

Read more

मनरेगा : सरकारी धन की बंदरबाट

नक्सलवाद, भौगोलिक स्थिति और पिछड़ापन आदि वे कारण हैं, जो विंध्याचल मंडल को प्रदेश के विकसित हिस्सों से अलग करते हैं. मंडल के तीन ज़िलों में से एक भदोही को विकसित कहा जा सकता है, किंतु कालीन उद्योग में आई मंदी ने जनपद की अर्थव्यवस्था को काफी प्रभावित किया.

Read more

पाकिस्‍तान : अर्थव्‍यवस्‍था पटरी पर कैसे लौटेगी

मौजूदा समय में पाकिस्तान आर्थिक दुश्वारियों के सबसे खराब दौर से गुजर रहा है. हालांकि स्थिति से निपटने के लिए सरकार हरसंभव कोशिश कर रही है, अर्थव्यवस्था में स्थिरता और मंदी से बचने के लिए तमाम नीतियां बनाई जा रही हैं, लेकिन जमीनी स्तर पर हालात अभी भी काफी खराब हैं.

Read more

कचरे के चलते रोजी-रोटी का संकट

नई परियोजनाओं पर आठ महीने के लिए रोक लगना धनबाद में गर्त में जाते उद्योग जगत के लिए एक और चुनौती है. खासकर रोजगार के दृष्टिकोण से यह निर्णय विकट स्थिति पैदा करने के लिए का़फी है. धनबाद ज़िला प्रशासन, कोल कंपनियों के प्रबंधन और राज्य सरकार की अदूरदर्शी सोच के कारण यह विकट स्थिति उत्पन्न हुई है. अगर तीनों में से किसी ने भी सकारात्मक भूमिका निभाई होती तो आज इस स्थिति का सामना न करना पड़ता. इतना ही नहीं, अगर अगले आठ महीनों में भी कोई परिवर्तन न हुआ तो निश्चित रूप से लोगों के सामने और भी विकट स्थिति उत्पन्न हो जाएगी.

Read more