आधा दर्जन जल मंत्री देने के बाद भी प्यासा है मगध : मगध के पांच जिलों में भीषण जलसंकट

मगध अपनी सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, लेकिन गर्मी का मौसम आते ही इसके सांस्कृतिक, धार्मिक

Read more

सिनेमाघरों से जुडी खट्टी-मीठी यादें

देश का ऐसा कोई गांव या शहर नहीं होगा, जहां के लोगों की सिनेमा से जुड़ी कोई मीठी याद न हो. हर मोहल्ले में कोई न कोई बीना दीदी ज़रूर होती थी, जो मोहल्ले की औरतों को इकट्ठा कर पास के सिनेमाघर में फिल्म दिखाने ले जाती थी. सुना है, जब धार्मिक फिल्म जैसे जय संतोषी माता लगती तो महिलाओं का रेला फिल्म देखने जाता था.

Read more

यूरोप को अपनी मानसिकता बदलनी चाहिए

यूरोप में मुस्लिमों के साथ भेदभाव किए जाने का मामला किसी न किसी स्तर पर उठता रहता है. इस बीच एमनेस्टी इंटरनेशनल की एक रिपोर्ट में कहा गया है कि जो मुसलमान सार्वजनिक तौर पर अपने धार्मिक प्रतीकों का इस्तेमाल करते हैं, उनके साथ यूरोप में भेदभाव किया जाता है.

Read more

सबका मालिक एक : साईं बाबा

शिरडी ही साई बाबा है और साई बाबा ही शिरडी, एक-दूसरे का प्रत्यक्ष पर्यायवाची होने के साथ-साथ यह आध्यात्मिक भी है. साई शब्द के उच्चारण से आशा और आदर का भाव उत्पन्न होता है. साई बाबा को किसी परिचय की आवश्यकता नहीं है.

Read more

बाबा के उपदेश

उपदेश देने के लिए किसी विशेष समय या स्थान की प्रतीक्षा न करके बाबा यथायोग्य समय पर स्वतंत्रतापूर्वक उपदेश दिया करते थे. एक बार एक भक्त ने बाबा की अनुपस्थिति में दूसरे लोगों के सम्मुख किसी को अपशब्द कहे. गुणों की उपेक्षा कर उसने अपने भाई के प्रति दोषारोपण में इतने कटु वाक्यों का प्रयोग किया कि सुनने वालों को भी उसके प्रति घृणा होने लगी. बहुधा देखने में आता है कि लोग व्यर्थ ही दूसरों की निंदा करके विवाद उत्पन्न करते हैं.

Read more

जाकी रही भावना जैसी

दृष्टि के बदलते ही सृष्टि बदल जाती है, क्योंकि दृष्टि का परिवर्तन मौलिक परिवर्तन है. अतः दृष्टि को बदलें, सृष्टि को नहीं. दृष्टि का परिवर्तन संभव है, सृष्टि का नहीं. दृष्टि को बदला जा सकता है, सृष्टि को नहीं.

Read more

गुरु के कर स्‍पर्श

जब सद्‌गुरु ही नाव के खिवैया हों तो वह निश्चय ही कुशलता और सरलता पूर्वक इस भवसागर के पार उतार देंगे. सद्‌गुरु शब्द का उच्चारण करते ही मुझे श्री साई की स्मृति आ रही है. ऐसा प्रतीत होता है, मानो वह स्वयं मेरे सामने ही खड़े हैं और मेरे मस्तक पर उदी लगा रहे हैं. देखो, देखो, वह अब अपना वरद्हस्त उठाकर मेरे मस्तक पर रख रहे हैं.

Read more

सरकारी भूमि पूजन का औचित्या

पुलिस स्टेशनों, बैंकों एवं अन्य शासकीय-अर्द्ध शासकीय कार्यालयों एवं भवनों में हिंदू देवी-

देवताओं की तस्वीरें-मूर्तियां आदि लगी होना आम बात है. सरकारी बसों एवं अन्य वाहनों में भी देवी-देवताओं की तस्वीरें अथवा हिंदू धार्मिक प्रतीक लगे रहते हैं. सरकारी इमारतों, बांधों एवं अन्य परियोजनाओं के शिलान्यास एवं उद्घाटन के अवसर पर हिंदू कर्मकांड किए जाते हैं.

Read more

विधानसभा चुनाव और मुसलमानों का सियासी रूझान

पश्चिम बंगाल के विधानसभा चुनाव बेहद महत्वपूर्ण हैं, मुसलमान वहां रिवायती तौर पर अभी तक सीपीएम के नेतृत्व वाले वाम

Read more

शीतकालीन चार धाम यात्राः सनातन धर्म के साथ खिलवाड़

उत्तराखंड सरकार द्वारा अपनी आय में वृद्धि के लिए शीतकालीन चार धाम यात्रा को हरी झंडी दिखाने के बाद राज्य के धर्माचार्य इसे धर्म विरोधी क़दम बताते हुए इसका व्यापक विरोध कर रहे हैं. देवभूमि हिमालय में आदिकाल से चार धाम यात्रा की परंपरा चली आ रही है, जिसका संचालन प्राचीन मान्यताओं के आधार पर वैदिक रीति-रिवाज से होता चला आ रहा है.

Read more

धार्मिक कट्टरता और धर्म

तार्किकता के पैरोकार, अक्सर धार्मिक कट्टरता के लिए धर्म को दोषी ठहराते हैं. क्या यह सोच सही है? इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए सबसे पहले हमें धार्मिक कट्टरता का अर्थ समझना होगा. सामान्य भाषा में हम यह कह सकते हैं कि कट्टर वह व्यक्ति है जिसने अपने दिमाग़ के खिड़की-दरवाजे बंद कर रखे हैं, जो किसी तर्क को सुनना या समझना ही नहीं चाहता.

Read more

माया कैसे तोड़ेंगी इतने मंदिर-मस्जिद!

अयोध्या मसले पर हाईकोर्ट का फैसला आने के बाद उत्तर प्रदेश की मुख्यमंत्री मायावती ने फैसले के क्रियान्वयन की ज़िम्मेदारी केंद्र के माथे मढ़ दी. साथ ही धमकी दी कि अगर प्रदेश में क़ानून व्यवस्था बिगड़ती है तो केंद्र ज़िम्मेदार होगा. मायावती ने यह बात अयोध्या के संदर्भ में तो कह दी थी, लेकिन क्या वह सार्वजनिक स्थलों पर बने 45 हज़ार से अधिक अवैध धार्मिक स्थलों के मामले में भी ऐसा कह सकेंगी?

Read more

समाधि मंदिर और पूर्व तैयारी

हिंदुओं में यह प्रथा है कि जब किसी मनुष्य का अंतकाल निकट आ जाता है तो उसे धार्मिक ग्रंथ आदि पढ़कर सुनाए जाते हैं. इसका मुख्य कारण केवल यही है कि इससे उसका मन सांसारिक झंझटों से मुक्त होकर आध्यात्मिक विषयों में लग जाए और वह प्राणी कर्मवश अगले जन्म में जिस योनि को धारण करे, उसमें उसे सद्गति प्राप्त हो.

Read more

साई की महिमा का अनुभव

आज अपने जीवन का एक ऐसा अनुभव आपके साथ बांटना चाहती हूं, जिसमें साई बाबा की कृपा की वजह से मैं संभल पाई. मैं जीवन की ऐसी भंवर में फंसी थी, जिसमें आज बहुत से पढ़े-लिखे युवक-युवती घिरे रहते हैं.

Read more

सच्चर कमेटी की रिपोर्ट और मुसलमान

इस्लाम हमेशा हमारे दिलों के क़रीब रहा है और भारत में इसका विकास और विस्तार लगातार जारी रहेगा. हमारी धार्मिक सोच इतनी विस्तृत है कि इसमें हर विचारधारा के लिए जगह है. सभी धार्मिक विचारधाराएं अपनी पहचान बनाए रखते हुए एक साथ रह सकती हैं. देश के मुसलमान राष्ट्रीय जीवनशैली, राजनीति, उत्पादन प्रक्रिया, व्यवसाय, सुरक्षा, शिक्षा, कला, संस्कृति और आत्माभिव्यक्ति में बराबर के साझीदार हैं.

Read more

विघ्‍नहर्ता रहें हमेशा साथ

धार्मिक रुझान वाले लोगों में भगवान गणेश का विशेष स्थान है और विघ्नहर्ता गणेश जनसामान्य के बीच सबसे लोकप्रिय भगवान हैं. कहा जाता है कि किसी भी काम की शुरुआत करने से पहले यदि गणेश की पूजा की जाए या उनका नाम लिया जाए तो उस कार्य में विघ्न उत्पन्न नहीं होता.

Read more

भगवान नरसिंह का शांत और लोक कल्याणकारी रूप

देवभूमि हिमालय के पावन जोशीमठ में भगवान नरसिंह की एक ऐसी दिव्य मूर्ति है, जो कला, धार्मिक विश्वास और मान्यताओं का बेजोड़ नमूना है. शालिग्राम पत्थर से बनी यह मूर्ति जगतगुरु आदि शंकराचार्य द्वारा पूजित उनकी तपोस्थली ज्योर्तिमठ (जोशीमठ) में नारायण धाम के रूप में विख्यात है.

Read more

लद्दा़ख: धार्मिक अंधविश्वास से बिगड़ा माहौल

लेह में स्थित शियाओं की मस्जिद लद्दा़खी राजाओं के पुराने राजमहल के ठीक बगल में बनी हुई है. कुछ दिनों पहले इसका ईरानी तरीक़े से पुनरुद्धार किया गया है, लेकिन इसके रंगे हुए खंभे और उन पर बने फूलों के ख़ूबसूरत चित्र अभी भी यह गवाही देते हैं कि असल में यह तिब्बती डिज़ाइन से बनी हुई थी.

Read more

मक़बूल पर फिदा क्यों हों?

जब मैंने मक़बूल फिदा हुसैन के भारत छोड़ने और क़तर की नागरिकता स्वीकार करने पर सेक्युलरवादियों के दोहरे चरित्र को उजागर करता हुआ लेख चौथी दुनिया में लिखा तो मेरे विवेक और मेरी समझ, मेरी विचारधारा, मेरी शिक्षा, मेरी पारिवारिक पृष्ठभूमि को लेकर लोगों ने सवाल उठाने शुरू कर दिए.

Read more

औरत के अधिकार के लिए आवाज़ उठाने का मतलब है मुसीबत को हवा देना

औरतों के फर्ज़ की जब बात आती है तो सारा मंच एक तऱफ दिखाई देता है, चाहे वह राजनीतिक हो, धार्मिक हो या फिर स्कॉलर हों या धर्मगुरु. लेकिन जब औरत के हक़ की बात आती है, चाहे उस हक की आवाज़ को दूसरे ही क्यों न उठाएं या वह ख़ुद मांगे, तो सारा समाज अचानक बंट जाता है.

Read more

यह आत्ममंथन का व़क्त है

साहित्य अकादमी के पुरस्कार वितरण समारोह में कुछ हिंदू संगठनों के विरोध से साहित्यिक जगत में तू़फान उठ खड़ा हुआ है. प्रगतिवाद और जनवाद के तथाकथित ठेकेदार इसे लेखकीय अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर भगवा हमला करार दे रहे हैं. इन बयानवीर जनवादियों को समारोह के दौरान हुए विरोध प्रदर्शन में फासीवाद की आहट भी सुनाई दे रही है, लेकिन किसी भी विरोध पर हल्ला मचाने वाले उक्त प्रगतिवादी लेखक यह भूल जाते हैं कि विरोध और विवाद के पीछे की वजह क्या है.

Read more

कुंभ स्नानों की कुछ यादें कचोटती हैं

यूं तो कुंभ शताब्दियों से भारत के चार नगरों, जो चार दिशाओं में विभिन्न नदियों के किनारे बसे हैं, में धार्मिक स्नान पर्व के रूप में मनाया जा रहा है. लेकिन इसका बहुत पुराने, ऐतिहासिक और प्रमाणिक दस्तावेज़ उपलब्ध नहीं हैं. हां, मुगलकाल के ग्रंथों में हरिद्वार कुंभ का वर्णन अलबत्ता मिलता है. उनका संदर्भ इस स्तंभ में पहले आ चुका है.

Read more

अल्लाह शब्द पर किसी का एकाधिकार नहीं

मलेशिया एक बार फिर से ग़लत कारण से अंतरराष्ट्रीय ख़बर की सुर्ख़ियों में है. पिछले दो सप्ताह के दौरान असामाजिक तत्वों ने पूजा के दस स्थलों को अपना निशाना बनाया है. इन स्थलों में ईसाइयों के गिरिजाघर और सिखों के गुरुद्वारे शामिल हैं. बहरहाल इस हमले में वहां कोई हताहत नहीं हुआ और संपत्तियों को जो नुक़सान पहुंचा उसकी क्षतिपूर्ति की जा सकती है

Read more

हरिद्वार अतिक्रमण की चपेट में

हरिद्वार अपने धार्मिक चरित्र के चलते जहां आस्तिक तीर्थयात्रियों का आकर्षण स्थल है, वहीं यह तीर्थाटन और पर्यटन प्रेमियों के चलते चाहे-अनचाहे दूरदराज़ के कई वर्गों को अपनी बांहों में समेट लेता है. इनमें पहला वर्ग है भिखारियों का. हरिद्वार में देश भर के भिखारियों का जमावड़ा लगता है, जो यहां चल रहे मुफ़्त के लंगरों और अन्नक्षेत्रों के भरोसे आ जुटते हैं तथा यत्र-तत्र डेरा जमाए पड़े रहते हैं.

Read more

मुसलमानों की नही, मदनी को राजनीति की फिक्र है

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर ज़िले का देवबंद क़स्बा. पिछले दिनों जमायत-ए-उलेमा-ए-हिंद के 30वें वार्षिक सम्मेलन में यहां लाखों लोग जुटे थे. स़िर्फ और स़िर्फ पुरुष. जमायत-ए-उलेमा-ए-हिंद देवबंदी फिरके के मुस्लिम उलेमाओं का कट्टरपंथी धड़ा है. सूत्रों का दावा है कि इस सम्मेलन में पूरे देश के कोने-कोने से पांच लाख से भी ज़्यादा लोग एकत्र हुए थे. सम्मेलन वाले स्थान पर जाने के संकरे और धूल भरे रास्ते पर भीड़ इतनी थी कि लोग बमुश्किल ही आगे बढ़ पा रहे थे. मीडिया के ज़्यादातर लोगों ने भीड़ से बचने के लिए सभा स्थल से थोड़ी दूरी पर डेरा जमा लिया था.

Read more

कुंभ दूर है, साधुओं का दंभ उभरने लगा है

अधिकारियों और ठेकेदारों के चंगुल से महाकुंभ बच भी जाए, पर साधु-संतों के दंभ से वह बच नहीं पाता है! यही अब तक होता आया है और यही अब 2010 के हरिद्वार महाकुंभ में हो रहा है! इतिहास साक्षी है कि कुंभ जैसे महापर्व सामाजिक सौहार्द के ऐसे बड़े अवसर होते हैं, जबकि बारह बरस में एक बार एक स्थान पर एकत्र होकर योगी एवं भोगी सामाजिक चिंतन और भविष्य के लिए नई राहों का अन्वेषण करते हैं. साधु-संन्यासियों को समाज के चिंतक और मनीषी वर्ग में गिना जाता है. अपने लिए भगवद् उपासना व समाज के लिए कल्याण-चिंतन ही इस चतुर्थाश्रम का दायित्व और ध्येय रहा है, लेकिन यह औदात्यपूर्ण परंपरा है, जो अब कालांतर में रूढ़ियों तक सीमित होकर रह गई है.

Read more