भारत के पास परमाणु हथियार कम लेकिन मारक क्षमता है ज्यादा

परमाणु हथियारों को लेकर स्टॉकहोम इंटरनैशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट (सीपरी) ने एक रिपोर्ट जारी की है। इस रिपोर्ट में बताया

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WHO की रिपोर्ट: कानपुर में प्रदूषण अपने चरम पर 6वें नंबर पर है दिल्ली

मंगलवार को विश्व स्वास्थ्य संगठन की ओर से जेनेवा में दुनिया के 15 सबसे प्रदूषित शहरों की लिस्ट जारी की

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सलमान खान बोले तुझे तो मैं कुत्ता बना दूंगा: ज़ुबैर खान

छोटे पर्द का सबसे चर्चित रियलिटी शो बिगबॉस एक बार फिर से विवादों में घिर गया है. आपको बता दें

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रंगराजन समिति की सिफारिश किसान विरोधी

पिछले दिनों राजधानी दिल्ली में गन्ना उत्पादक किसानों ने संसद का घेराव किया. आंदोलनकारी किसानों के समर्थन में पूर्व सेनाध्यक्ष जनरल वीके सिंह, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री ओमप्रकाश चौटाला, तृणमूल कांग्रेस के सांसद सुल्तान अहमद भी खुलकर सामने आए. देश के अलग-अलग राज्यों से आए किसान जब संसद के बाहर आंदोलन कर रहे थे, उसी दिन संसद के भीतर माननीय सदस्य एफडीआई के मुद्दे पर बहस कर रहे थे.

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यूपीए सरकार का नया कारनामा : किसान कर्ज माफी घोटाला

आने वाले दिनों में यूपीए सरकार की फिर से किरकिरी होने वाली है. 52,000 करोड़ रुपये का नया घोटाला सामने आया है. इस घोटाले में ग़रीब किसानों के नाम पर पैसों की बंदरबांट हुई है. किसाऩों के ऋण मा़फ करने वाली स्कीम में गड़बड़ी पाई गई है. इस स्कीम का फायदा उन लोगों ने उठाया, जो पात्र नहीं थे. इस स्कीम से ग़रीब किसानों को फायदा नहीं मिला. आश्चर्य इस बात का है कि इस स्कीम का सबसे ज़्यादा फायदा उन राज्यों को हुआ, जहां कांग्रेस को 2009 के लोकसभा चुनाव में ज़्यादा सीटें मिली. इस स्कीम में सबसे ज़्यादा खर्च उन राज्यों में हुआ, जहां कांग्रेस या यूपीए की सरकार है.

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हंस चुनेगा दाना-तिनका कौआ मोती खाएगा

अजीब इत्ते़फाक़ है. कामिनी जायसवाल ने इस पीआईएल को रजिस्ट्रार के पास जमा किया और अपने केबिन में लौट आईं, इतनी ही देर में यह पीआईएल मीडिया में लीक हो गई. उन्हें किसी ने बताया कि इसमें क्या है, यह मीडिया के लोगों को पता चल चुका है. जब इस पीआईएल की सुनवाई शुरु हुई तो जज ने पहला सवाल कामिनी जायसवाल से पूछा कि किसने लीक की.

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इंडिया अगेंस्‍ट करप्‍शनः अन्‍ना चर्चा समूह, सच बोलना अपराध नहीं है

सेवा में,

श्री वीरभद्र सिंह जी,

सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम मंत्री

1, जंतर मंतर रोड,

नई दिल्ली-110001

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समाज को आईना दिखाती रिपोर्ट

हाल में यूनीसेफ द्वारा जारी रिपोर्ट के अनुसार भारत में 22 फीसदी लड़कियां कम उम्र में ही मां बन जाती हैं और 43 फीसदी पांच साल से कम उम्र के बच्चे कुपोषण का शिकार हैं. रिपोर्ट के अनुसार, ग्रामीण क्षेत्रों के अधिकतर बच्चे कमज़ोर और एनीमिया से ग्रसित हैं. इन क्षेत्रों के 48 प्रतिशत बच्चों का वज़न उनकी उम्र के अनुपात में बहुत कम है. यूनिसेफ द्वारा चिल्ड्रन इन अर्बन वर्ल्ड नाम से जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि ग्रामीण क्षेत्रों की अपेक्षा शहरी ग़रीबों में यह आंकड़ा और भी चिंताजनक है, जहां गंभीर बीमारियों का स्तर गांव की तुलना में अधिक है.

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चौथी दुनिया की रिपोर्ट सच साबित हुई : कोयला घोटाले का सच

चौथी दुनिया ने अप्रैल 2011 में कोयला घोटाले का पर्दा़फाश किया था. उस व़क्त न सीएजी रिपोर्ट आई थी, न किसी ने यह सोचा था कि इतना बड़ा घोटाला भी हो सकता है. उस व़क्त इस घोटाले पर किसी ने विश्वास नहीं किया. जिन्हें विश्वास भी हुआ तो आधा अधूरा हुआ. चौथी दुनिया ने आपसे अप्रैल 2011 में जो बातें कहीं, उस पर वह आज भी अडिग है.

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अब बच्चों के स्वास्थ्य के बारे में : सरकार भ्रम फैला रही है

साल 2012 में हमें यह सोचकर खुश होना चाहिए कि समाज के कर्णधार यानी हमारी नौजवान पी़ढी अब ज़्यादा स्वस्थ हो रही है. देश के सर्वोच्च स्वास्थ्य संस्थान एम्स द्वारा 19 ब़डे शहरों में किए गए सर्वे के अनुसार, साल 1992 के मुक़ाबले 2012 के युवा ज़्यादा लंबे और वज़न में भारी हो रहे हैं. इसी तथ्य पर सरकार यह मानती है कि पोषण में पौष्टिकता ब़ढने की वजह से बच्चे अब स्वस्थ हो रहे हैं.

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क्या मुसलमानों को आरक्षण की ज़रूरत है

हिंदुस्तान में 160 मिलियन मुसलमान हैं, जो इंडोनेशिया के बाद दुनिया की दूसरी सबसे ब़डी मुस्लिम आबादी वाला देश है. सरकारी आंकड़ों के मुताबिक़, यहां मुसलमानों की जनसंख्या 13.4 फीसदी है, लेकिन कई लोग यह मानते हैं कि मुसलमानों की संख्या 15 से 18 फीसदी के बीच है.

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भूखों की रोटी कहां है

यूं तो भारत को विकासशील देशों की श्रेणी में अगला स्थान हासिल है, लेकिन फिर भी कुछ आंकड़े ऐसे हैं, जो इस सच को ठुकराने लगते हैं. ये आंकड़े बताते हैं कि भारत में भूखे लोगों की संख्या बढ़कर 6.3 करोड़ हो गई है. एक ग़ैर सरकारी संस्था द्वारा जारी सर्वे रिपोर्ट के आधार पर कहा गया है कि खराब आहार प्रणाली और खाद्य पदार्थों के बढ़ते दामों के कारण भूखे लोगों की गिनती बढ़ती जा रही है.

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उत्तराखंडः कैग की रिपोर्ट ने निशंक सरकार की पोल खोली

भारत के महालेखा परीक्षक (कैग) की रिपोर्ट ने देवभूमि उत्तराखंड की भाजपा सरकार के लिए परेशानी खड़ी कर दी है. कैग ने अपनी रिपोर्ट में महाकुंभ में की गई गड़बड़ियों के साथ-साथ सरकार द्वारा आपदा प्रबंधन के प्रति बरती गई ढिलाई की भी कलई खोलकर रख दी. कैग ने अपनी जांच में एकीकृत योजना का अभाव, सरकारी विभागों के मध्य समन्वय की कमी एवं कुप्रबंधन जैसी खामियां पाई हैं.

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ऐसे बनेगी मुसलमानों की तकदीर

अमेरिका स्थित पिऊ रिसर्च सेंटर की हाल में आई एक रिपोर्ट के अनुसार, पूरे विश्व में एक बिलियन और 570 मिलियन मुसलमान हैं. मतलब दुनिया का हर चौथा आदमी मुसलमान है. क्या इस रिपोर्ट में कुछ ऐसा है, जिस पर खुश हुआ जा सके? मेरे हिसाब से तो नहीं.

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दिल्‍ली का बाबूः भ्रष्ट बाबू और सरकारी निष्क्रियता

केंद्रीय सतर्कता आयोग की 2009 की वार्षिक रिपोर्ट से यह खुलासा हुआ है कि कैसे बहुत सारे भ्रष्ट बाबू खुद पर लगे आर्थिक दंड का भुगतान करने से बच गए और इसकी वजह रही सरकारी निष्क्रियता. रिपोर्ट के मुताबिक़, 2009 में पैनल ने भ्रष्टाचार से संबंधित 5783 शिकायतों की जांच की, लेकिन स़िर्फ 42 फीसदी दागी बाबुओं को ही दंडित किया जा सका.

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भारत में मुसलमानों की रोज़गार समस्या

सच्चर कमेटी ने देश में मुसलमान समुदाय के विभिन्न पक्षों का विस्तृत विश्लेषण किया और सारी बातें कमेटी की रिपोर्ट में उल्लिखित हैं. मुसलमानों की पहचान ही उनके विकास की सबसे बड़ी बाधा है, यह बात भी रिपोर्ट में स्पष्ट रूप से कही गई है. साथ ही यह भी स्पष्ट है कि इससे ही कई और बाधाएं भी पैदा हो जाती हैं.

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मेरे खिलाफ लिखना मना है

सरकार की योजनाओं और कामों को प्रचारित करने के लिए जनसंपर्क विभाग होता है. हर सरकार यही चाहती है कि उसके अच्छे कामों का प्रचार हो और सरकार की कमज़ोरियां बाहर न आएं. सरकार की विफलताओं और कमज़ोरियों को जनता के सामने लाना मीडिया का काम है. लेकिन बिहार में स्थिति अलग है.

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रंगनाथ मिश्रा रिपोर्ट एक लड़ाई संसद से सड़क तक

भारतीय राजनीति में अब ऐसे मुद्दे कम ही देखने-सुनने को मिलते हैं, जिन पर संसद से लेकर सड़क तक हंगामा बरपे. लेकिन, जब चौथी दुनिया में रंगनाथ मिश्र आयोग की रिपोर्ट छपी तो सबसे पहले संसद में इस मुद्दे पर आवाज उठी. हंगामा हुआ. संसद के दोनों सदनों की कार्यवाही कई बार स्थगित हुई. चौथी दुनिया ने अपने पत्रकारीय धर्म का निर्वाह किया तो बदले में राज्य सभा ने चौथी दुनिया के संपादक को विशेषाधिकार हनन का नोटिस भेज दिया.

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