इंडियन एक्‍सप्रेस की पत्रकारिता- 2

अगर कोई अ़खबार या संपादक किसी के ड्राइंगरूम में ताकने-झांकने लग जाए और गलत एवं काल्पनिक कहानियां प्रकाशित करना शुरू कर दे तो ऐसी पत्रकारिता को कायरतापूर्ण पत्रकारिता ही कहेंगे. हाल में इंडियन एक्सप्रेस ने एक स्टोरी प्रकाशित की थी, जिसका शीर्षक था, सीक्रेट लोकेशन. यह इस अ़खबार में प्रकाशित होने वाले नियमित कॉलम डेल्ही कॉन्फिडेंशियल का एक हिस्सा थी.

Read more

इंडियन एक्सप्रेस की पत्रकारिता – 1

भारतीय सेना की एक यूनिट है टेक्निकल सर्विस डिवीजन (टीडीएस), जो दूसरे देशों में कोवर्ट ऑपरेशन करती है. यह भारत की ऐसी अकेली यूनिट है, जिसके पास खुफिया तरीके से ऑपरेशन करने की क्षमता है. इसे रक्षा मंत्री की सहमति से बनाया गया था, क्योंकि रॉ और आईबी जैसे संगठनों की क्षमता कम हो गई थी. यह इतनी महत्वपूर्ण यूनिट है कि यहां क्या काम होता है, इसका दफ्तर कहां है, कौन-कौन लोग इसमें काम करते हैं आदि सारी जानकारियां गुप्त हैं, टॉप सीक्रेट हैं, लेकिन 16 अगस्त, 2012 को शाम छह बजे एक सफेद रंग की क्वॉलिस गाड़ी टेक्निकल सर्विस डिवीजन के दफ्तर के पास आकर रुकती है, जिससे दो व्यक्ति उतरते हैं. एक व्यक्ति क्वॉलिस के पास खड़े होकर इंतज़ार करने लगता है और दूसरा व्यक्ति यूनिट के अंदर घुस जाता है.

Read more

हम तो ख़ुद अपने हाथों बेइज़्ज़त हो गए

जी न्यूज़ नेटवर्क के दो संपादक पुलिस द्वारा गिरफ्तार कर लिए गए. इस गिरफ्तारी को लेकर ज़ी न्यूज़ ने एक प्रेस कांफ्रेंस की. अगर वे प्रेस कांफ्रेंस न करते तो शायद ज़्यादा अच्छा रहता. इस प्रेस कांफ्रेंस के दो मुख्य बिंदु रहे. पहला यह कि जब अदालत में केस चल रहा है तो संपादकों को क्यों गिरफ्तार किया गया और दूसरा यह कि पुलिस ने धारा 385 क्यों लगाई, उसे 384 लगानी चाहिए थी. नवीन जिंदल देश के उन 500 लोगों में आते हैं, जिनके लिए सरकार, विपक्षी दल और पूरी संसद काम कर रही है.

Read more

सीमेंट कारखानों के लिए भूमि अधिग्रहण : किसान आखिरी दम तक संघर्ष करें

देश में जब भी भूमि अधिग्रहण की बात होती है, तो सरकार का इशारा आम आदमी और किसान की तऱफ होता है. आज़ादी के बाद से दस करोड़ लोग भूमि अधिग्रहण की वजह से विस्थापित हुए हैं. अपनी माटी से अलग होने वालों में कोई पूंजीपति वर्ग नहीं होता. विकास की क़ीमत हमेशा आम आदमी को ही चुकानी पड़ी है. जिनके पास धन है, वे दिल्ली और मुंबई जैसे महानगरों में अपने मनमाफिक मकान ख़रीद सकते हैं, लेकिन वह आम आदमी, जिसके पास अपनी जीविका और रहने के लिए ज़मीन का एक छोटा सा टुकड़ा है, उसे बेचकर आख़िर वह कहां जाएगा? ऐसे कई ज्वलंत सवालों पर पेश है चौथी दुनिया की यह ख़ास रिपोर्ट…

Read more

यह पत्रकारिता का अपमान है

मीडिया को उन तर्कों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए, जिन तर्कों का इस्तेमाल अपराधी करते हैं. अगर तुमने बुरा किया तो मैं भी बुरा करूंगा. मैंने बुरा इसलिए किया, क्योंकि मैं इसकी तह में जाना चाहता था. यह पत्रकारिता नहीं है और अफसोस की बात यह है कि जितना ओछापन भारत की राजनीति में आ गया है, उतना ही ओछापन पत्रकारिता में आ गया है, लेकिन कुछ पेशे ऐसे हैं, जिनका ओछापन पूरे समाज को भुगतना पड़ता है. अगर न्यायाधीश ओछापन करें तो उससे देश की बुनियाद हिलती है.

Read more

सेवानिवृत्‍त लेफ्टिनेंट कमांडर बेनीवाल : नियमों के जाल में उलझी पेंशन

तमाम सर्वे बताते हैं कि आज के युवा सेना में नौकरी करने की बजाय अन्य कोई पेशा अपनाना चाहते हैं. ऐसा नहीं है कि सेना की नौकरी के आकर्षण में कोई कमी आई हो या फिर वहां मिलने वाली सुविधाओं में कोई कटौती की गई हो, बावजूद इसके विभिन्न वजहों से सेना में नए अधिकारियों की कमी दिख रही है. उन्हीं वजहों में से एक है पेंशन का मामला. सेना में पेंशन विसंगतियों को लेकर संभवत: पहली बार कोई रिटायर्ड नौसेना अधिकारी सार्वजनिक रूप से सामने आया है. आखिर क्या है पूरी कहानी, पढ़िए चौथी दुनिया की इस एक्सक्लूसिव रिपोर्ट में….

Read more

एक अफसर का खुलासाः ऐसे लूटा जाता है जनता का पैसा

महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शरद पवार के भतीजे अजीत पवार ने अपने पद से इस्ती़फा दे दिया है. हालांकि उनके इस्ती़फे के बाद राज्य में सियासी भूचाल पैदा हो गया है. अजीत पवार पर आरोप है कि जल संसाधन मंत्री के रूप में उन्होंने लगभग 38 सिंचाई परियोजनाओं को अवैध तरीक़े से म़ंजूरी दी और उसके बजट को मनमाने ढंग से बढ़ाया. इस बीच सीएजी ने महाराष्ट्र में सिंचाई घोटाले की जांच शुरू कर दी है.

Read more

किसकी मिलीभगत से चल रहा है नकली नोट का खेल

आरबीआई के मुताबिक़, पिछले 6 सालों में ही क़रीब 76 करोड़ रुपये मूल्य के नक़ली नोट ज़ब्त किए गए हैं. ध्यान दीजिए, स़िर्फ ज़ब्त किए गए हैं. दूसरी ओर संसद की एक समिति की रिपोर्ट कहती है कि देश में क़रीब एक लाख 69 हज़ार करोड़ रुपये के नक़ली नोट बाज़ार में हैं. अब वास्तव में कितनी मात्रा में यह नक़ली नोट बाज़ार में इस्तेमाल किए जा रहे हैं, इसका कोई सही-सही आंकड़ा शायद ही किसी को पता हो.

Read more

सीएजी, संसद और सरकार

आज़ादी के बाद से, सिवाय 1975 में लगाए गए आपातकाल के, भारतीय लोकतांत्रिक संस्थाएं और संविधान कभी भी इतनी तनाव भरी स्थिति में नहीं रही हैं. श्रीमती इंदिरा गांधी ने संविधान के प्रावधान का इस्तेमाल वह सब काम करने के लिए किया, जो सा़फ तौर पर अनुचित था और अस्वीकार्य था. फिर भी वह इतनी सशक्त थीं कि आगे उन्होंने आने वाले सभी हालात का सामना किया. चुनाव की घोषणा की और फिर उन्हें हार का सामना करना पड़ा.

Read more

सीएजी के प्रति कांग्रेस का रवैया यह प्रजातंत्र पर हमला है

सीएजी (कंप्ट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आई तो राजनीतिक हलक़ों में हंगामा मच गया. सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि 2006-2009 के बीच कोयले के आवंटन में देश को 1.86 लाख करोड़ का घाटा हुआ. जैसे ही यह रिपोर्ट संसद में पेश की गई, कांग्रेस के मंत्री और नेता सीएजी के खिला़फ जहर उगलने लगे. पहली प्रतिक्रिया यह थी कि सीएजी ने अपने अधिकार क्षेत्र की सीमा का उल्लंघन किया.

Read more

राजस्‍थान का नंदीग्राम नवलगढ़ : सीमेंट फैक्‍ट्री के लिए भूमि अधिग्रहण

बिन पानी सब सून. राजस्थान के अर्द्ध मरुस्थलीय इलाक़े शेखावाटी की हालत कुछ ऐसी ही है. यहां के किसानों को बोरवेल लगाने की अनुमति नहीं है. भू-जल स्तर में कमी का खतरा बताकर सरकार उन्हें ऐसा करने से रोकती है. दूसरी ओर राजस्थान सरकार ने अकेले झुंझुनू के नवलगढ़ में तीन सीमेंट फैक्ट्रियां लगाने की अनुमति दे दी है. इसमें बिड़ला की अल्ट्राटेक और बांगड़ ग्रुप की श्री सीमेंट कंपनी शामिल है.

Read more

टीम अन्‍ना ने दिया सबूत हर एक रक्षा सौदे के पीछे दलाल है

हथियारों के दलाल ऐसे लोग हैं, जो होते तो हैं, लेकिन दिखते नहीं. अभी कुछ समय पहले ही एक अंग्रेजी पत्रिका ने इसी विषय पर एक विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की थी, जिसमें हथियार दलालों के नाम तो नहीं बताए गए थे, लेकिन इशारों-इशारों में ही बहुत कुछ कहानी कहने की कोशिश की गई थी. इस रिपोर्ट से इतना तो साफ हो गया था कि भारतीय हथियार दलालों के न स़िर्फ हौसले बुलंद हैं, बल्कि उनके रिश्ते भी बहुत ऊपर तक है.

Read more

दिमाग की खिड़कियां-दरवाजे खोलिए, वक्‍त बहुत कम है

शरीर के अंग जब कमज़ोर हो जाएं तो उन्हें बाहर से विटामिन की ज़रूरत होती है और कभी-कभी जब वे अंग बिल्कुल ही काम नहीं करते तो बहुत ही कड़े बाहरी तत्व की ज़रूरत होती है, जिसे हम लाइफ सेविंग ड्रग्स कहते हैं. अगर हार्ट सींक करने लगे तो कोरामीन देते हैं, बाईपास सर्जरी होती है.

Read more

हिंदी पत्रकारिता अपनी जिम्मेदारी समझे

यह महीना हलचल का महीना रहा है. मुझसे बहुत सारे लोगों ने सवाल पूछे, बहुत सारे लोगों ने जानकारियां लीं. लेकिन जिस जानकारी भरे सवाल ने मुझे थो़डा परेशान किया, वह सवाल पत्रकारिता के एक विद्यार्थी ने किया. उसने मुझसे पूछा कि क्या अंग्रेजी और हिंदी पत्रकारिता अलग-अलग हैं. मैंने पहले उससे प्रश्न किया कि आप यह सवाल क्यों पूछ रहे हैं.

Read more

भारतीय सेना को बदनाम करने की साजिश का पर्दाफाश

बीते चार अप्रैल को इंडियन एक्सप्रेस के फ्रंट पेज पर पूरे पन्ने की रिपोर्ट छपी, जिसमें देश को बताया गया कि 16 जनवरी को भारतीय सेना ने विद्रोह करने की तैयारी कर ली थी. इस रिपोर्ट से लगा कि भारतीय सेना देश में लोकतांत्रिक व्यवस्था को समाप्त कर फौजी तानाशाही लाना चाहती है. इस रिपोर्ट ने सारे देश में न केवल हलचल पैदा की, बल्कि सेना को लेकर शंका का वातावरण भी पैदा कर दिया. सभी चैनलों पर यह खबर चलने लगी, लेकिन तीन घंटे बीतते-बीतते सा़फ हो गया कि यह रिपोर्ट झूठी है, बकवास है, किसी खास नापाक इरादे से छापी गई है और इसे छपवाने के पीछे एक बड़ा गैंग है, जो हिंदुस्तान में लोकतंत्र को पसंद नहीं करता.

Read more

देश का विश्वास टूटने मत दीजिए

वर्ष 2009 में एक बड़ी घटना हुई. चौथी दुनिया ने रंगनाथ मिश्र कमीशन की रिपोर्ट छाप दी और सरकार से कहा कि अगर यह रिपोर्ट झूठी है तो वह कहे कि यह रिपोर्ट झूठी है. उस रिपोर्ट को लेकर राज्यसभा में चार-पांच दिनों तक का़फी हंगामा होता रहा. राज्यसभा के सांसदों ने हमारे ख़िला़फ विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव रखा और हमने उस विशेषाधिकार हनन के नोटिस का जवाब भी दिया.

Read more

लोकपाल के नाम पर धोखाः कहां गया संसद का सेंस ऑफ हाउस

इस बार दिल्ली की जगह मुंबई में अन्ना का अनशन होगा. जंतर-मंतर और रामलीला मैदान से गिरफ्तारियां दी जाएंगी. इसकी घोषणा टीम अन्ना ने कर दी है. आख़िरकार, वही हुआ, जिसकी आशंका चौथी दुनिया लगातार ज़ाहिर कर रहा था. अगस्त का अनशन ख़त्म होते ही चौथी दुनिया ने बताया था कि देश की जनता के साथ धोखा हुआ है.

Read more

रंगनाथ मिश्र रिपोर्ट लागू होनी चाहिए

उत्तर प्रदेश का चुनाव सिर पर है और कांग्रेस ने मुस्लिम आरक्षण का शिग़ूफा छोड़ दिया है. कांग्रेस इसलिए, क्योंकि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री कांग्रेस के सदस्य हैं. इसलिए यह कहने में कोई हर्ज नहीं कि शिगू़फा कांग्रेस ने छोड़ा है.

Read more

सीएजी रिपोर्ट पर राजनीतिः प्रजातंत्र के लिए खतरा है

सीएजी (कंपट्रोलर एंड ऑडिटर जनरल) यानी नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक की रिपोर्ट आई तो राजनीतिक हलक़ों में हंगामा मच गया. दिल्ली की मुख्यमंत्री शीला दीक्षित विपक्ष के निशाने पर आ गईं. रिपोर्ट ने देश की जनता के सामने सबूत पेश किया कि कैसे कॉमनवेल्थ गेम्स नेताओं और अधिकारियों के लिए लूट महोत्सव बन गया.

Read more

दिल्‍ली का बाबूः गोपनीयता के रखवाले

गोपनीयता का रखवाला कौन हो सकता है? संयुक्त सचिव स्तर का एक अधिकारी किसी दस्तावेज़ को गोपनीय घोषित कर सकता है. एक अंडर सेक्रेटरी एक दस्तावेज़ को स़िर्फ कंफीडेंशियल ही घोषित कर सकता है. यह खुलासा कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग द्वारा एक आरटीआई के तहत दिए गए जवाब में हुआ है. दिलचस्प रूप से डीओपीटी की यह राय गृह मंत्रालय के साथ सांझा नहीं की गई है.

Read more

राष्ट्रीय सुरक्षा और वैश्विक प्रयास की जरुरत

ऐसा कहा जाता है कि भारत के पास राष्ट्रीय सुरक्षा का सिद्धांत नहीं है और यहां रणनीतिक दुविधाग्रस्तता की स्थिति बनी रहती है. सुरक्षा विशेषज्ञ जॉर्ज तनहाम ने भी ऐसा अनुभव किया है कि भारत के पास रणनीतिक सोच की संस्कृति का अभाव है. के सुब्रमण्यम के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार बोर्ड द्वारा इस तरफ संकेत करने के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा के संदर्भ में गंभीरता से सोचा जाने लगा है.

Read more

सरकार नहीं चाहती वक्फ संपत्तियों का संरक्षक योग्य व्यक्ति बनें

देश में वक्फ संपत्तियों की खुलेआम लूट कोई नई बात नहीं है और न अब यह बात किसी से छुपी है कि इन संपत्तियों को लूटने में जितना हाथ सरकार का है, उतना ही खुद मुसलमानों का भी है. यह बहुत आसान फार्मूला है कि जिन लोगों को वक्फ बोर्ड की ज़िम्मेदारी सौंपी गई, वे अपनी इस चोरी को छिपाने के लिए सीधे-सीधे सरकार को सवालों के कठघरे में खड़ा कर दें और देश के आम मुसलमानों को यह कहकर बेवक़ू़फ बनाते रहें कि सरकार ही मुसलमानों के प्रति सांप्रदायिक है तो उन्हें इंसा़फ कैसे मिल सकता है?

Read more

आदिवासी अल्पायु होते हैं

संयुक्त राष्ट्र की एक रिपोर्ट कहती है कि दुनिया के कई देशों में रहने वाली आदिम प्रजातियों के लोगों की आयु शेष जनसंख्या से कहीं कम होती है यानी वे दूसरों की तुलना में कम जीते हैं. संयुक्त राष्ट्र ने अपने इतिहास में पहली बार आदिम प्रजातियों के बारे में विस्तृत रिपोर्ट प्रकाशित की है. ये ऐसी जातियां हैं, जो किसी भी देश के ज्ञात इतिहास में सबसे पुराने समय से रह रही हैं.

Read more

किसान आंदोलन चौथी दुनिया और सुप्रीम कोर्ट

वर्तमान हालात में जन सरोकारों से जुड़ी पत्रकारिता का स्वरूप क्या हो सकता है? इसकी एक मिसाल चौथी दुनिया की उन रिपोर्टों में देखने को मिलती है, जो देश भर में चल रही जल, जंगल और ज़मीन की लड़ाई से संबंधित हैं. दरअसल, पिछले दो सालों के दौरान लिखी गईं उक्त रिपोट्‌र्स आने वाले समय में समस्याओं की चेतावनी दे रही थीं.

Read more

दिल्ली का बाबूः चतुराई भरी चाल

वित्त मंत्रालय में विशेष सचिव जी सी चतुर्वेदी का नाम सरकार ने नए पेट्रोलियम सचिव के रूप में प्रस्तावित क्या किया, इस पर कई लोगों की भौंहे तन गईं. पीएमओ में कुछ रुकावट के बाद अंतत: चतुर्वेदी की फाइल पर हस्ताक्षर तो हो गए, लेकिन इस बीच दिल्ली में सरगर्मियां तेज रहीं.

Read more

बाघों के लिए बुरी खबर है

इस बार सुंदरवन और पश्चिम बंगाल व उड़ीसा के नक्सल प्रभावित इलाक़ों को भी इस रिपोर्ट में शामिल किया गया है, जो पिछली बार शामिल नहीं थे. सबसे चिंताजनक बात यह है कि बाघों की जो बढ़ोतरी रिपोर्ट उन इलाक़ों से नहीं आई है, जहां प्रोजेक्ट टाइगर दशकों से चल रहा है.

Read more

नैतिक, रचनात्मक और राजनीतिक ज़िम्मेदारी

प्रजातंत्र में कोई भी सरकार तब तक प्रजातांत्रिक नहीं मानी जा सकती, जब तक वह अपने देश के नागरिकों के प्रति उत्तरदायी न हो, क्योंकि वह उन्हीं के लिए और उन्हीं के नाम पर राज्य करती है. एक संसदीय व्यवस्था में वह संसद के प्रति उत्तरदायी होती है. चलिए, बात शुरू से करते हैं.

Read more

पटना विधि विज्ञान प्रयोगशाला : सुशासन और विकास का क़डवा सच

न्याय के साथ विकास और अपराध-भ्रष्टाचार मुक्त बिहार बनाने की बातें अच्छी लगती हैं तथा नीतीश कुमार ने अपना यह वादा पूरा करने की हर मुमकिन कोशिश भी की, लेकिन क़ानून का राज अभी पूरी तरह क़ायम नहीं हुआ है. क़ानून का पालन कराने वाली एजेंसी ईमानदारी से काम नहीं कर रही है.

Read more