जामा मस्जिद इलाके में छिपे हैं तीन आतंकी, गणतंत्र दिवस पर हमले की है साज़िश

पूरे देश में गणतंत्र दिवस की तैयारियां ज़ोरों पर हैं ऐसे में राजधानी दिल्ली में गणतंत्र दिवस पर बड़े आतंकवादी

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गणतंत्र दिवस: देखिए परेड की ये मनमोहक तस्वीरें

नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया)। 68वें गणतंत्र दिवस की छठा राजपथ पर देखने को मिलती है। देश के अलग-अलग राज्यों

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68वां गणतंत्र दिवस : राष्ट्रपति ने फहराया तिरंगा, पूरा देश मना रहा है पर्व

नई दिल्ली (ब्यूरो, चौथी दुनिया)। आज देश अपना 68वां गणतंत्र दिवस मना रहा है। राष्ट्रपति के पहुंचने के बाद तिरंगे

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PM बोले आतंकवाद ख़त्म करने के लिए यूएई से साझेदारी महत्वपूर्ण

नई दिल्ली, (विनीत सिंह) : गणतंत्र दिवस में शामिल होने के लिए भारत आये अबू धाबी के क्राउन प्रिंस मोहम्मद

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प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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जहां डाल-डाल पर सोने की चिडि़या करती है बसेरा

जननी जन्मभूमिश्च स्वर्गादपि गरीयसी… यानी जन्मभूमि स्वर्ग से भी बढ़कर है. जन्म स्थान या अपने देश को मातृभूमि कहा जाता है. भारत और नेपाल में भूमि को मां के रूप में माना जाता है. यूरोपीय देशों में मातृभूमि को पितृ भूमि कहते हैं. दुनिया के कई देशों में मातृ भूमि को गृह भूमि भी कहा जाता है. इंसान ही नहीं, पशु-पक्षियों और पशुओं को भी अपनी जगह से प्यार होता है, फिर इंसान की तो बात ही क्या है.

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भारतीय कंपनियां भी बेहतर सामरिक साज़ोसामान बना सकती हैं

सैद्धांतिक तौर पर गणतंत्र दिवस परेड हमारी सैन्य शक्तिके प्रदर्शन का एक अवसर है, लेकिन व्यवहारिक तौर पर ऐसा लगता है, जैसे हमारी सैन्य कमज़ोरियां ज़ाहिर हो रही हैं. अगर स़िर्फ कमज़ोर प्रदर्शन का सवाल है तो कोई बात नहीं है. असल समस्या हमारी सैन्य क्षमता में हो रहे ह्रास की है, जो सालों से राजनीतिक मतभेद, नौकरशाहों के अहं और सैन्य निराशा से उपजा है.

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महिला सरपंचों पर अत्‍याचार

बात स़िर्फ किसी महिला की प्रताड़ना, अपमान अथवा तिरस्कार की नहीं है. विचारणीय तथ्य यह है कि महिला सरपंच किसी पंचायत का प्रतिनिधित्व करती है, जो लोकतंत्र की पहली सीढ़ी है. किसी सरपंच का अपमान गांधी जी के उस सपने का अपमान है, जो उन्होंने पंचायती राज के ज़रिए देखा था.

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