अराजकता का लाइसेंस नहीं स्वायत्तता

समकालीन भारतीय साहित्य इन दिनों संघर्ष, विरोध, प्रतिरोध, प्रदर्शन, प्रति प्रदर्शन, पुरस्कार वापसी आदि जैसे शब्दों से गूंज रहा है.

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प्रजातंत्र बना लाठीतंत्र

एक बार लखनऊ में मुख्यमंत्री कार्यालय के बाहर जबरदस्त प्रदर्शन हुआ. प्रदर्शनकारी पूर्वांचल के अलग-अलग शहरों से लखनऊ पहुंचे थे, उनकी संख्या क़रीब 1500 रही होगी, उनमें किसान, मज़दूर एवं छात्रनेता भी थे, जो अपने भाषणों में मुख्यमंत्री के ख़िलाफ़ आग उगल रहे थे. वे सब अपने भाषणों में सीधे मुख्यमंत्री पर निशाना साध रहे थे. उस प्रदर्शन का नेतृत्व समाजवादी नेता चंद्रशेखर कर रहे थे.

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प्रधानमंत्री के नाम अन्ना की चिट्ठी

सेवा में,

श्रीमान् डॉ. मनमोहन सिंह जी,

प्रधानमंत्री, भारत सरकार, नई दिल्ली.

विषय : गैंगरेप-मानवता को कलंकित करने वाली शर्मनाक घटना घटी और देश की जनता का आक्रोश सड़कों पर उतर आया. ऐसे हालात में आम जनता का क्या दोष है?

महोदय,

गैंगरेप की घटना से देशवासियों की गर्दन शर्म से झुक गई.

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सायन-कोलीवाड़ाः मुंबई, जमीन हड़पने की राजधानी बनती जा रही है

उदारीकरण के दौर में ज़मीन सबसे क़ीमती संसाधन बन चुकी है और जहां-जहां लालची बिल्डरों को ज़मीन दिख रही है और यह भी दिख रहा है कि उस ज़मीन पर आम और कमज़ोर आदमी रह रहे हैं, उसे हड़पने के लिए वे पूरी ताक़त लगा रहे हैं. उनके इस कार्य में सरकार से लेकर सरकारी अधिकारी तक उनका साथ दे रहे हैं. सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की जगह बिल्डर्स कल्याण ने ले ली है.

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पुलिस की तानाशाही और वन गुजरों की जीत

देश में वनाधिकार क़ानून लागू होने के बावजूद वन क्षेत्र में रहने वाले लोगों को उनके मूल स्थान से भगाने के प्रयास किए जाते रहते हैं, जिससेउन्हें का़फी परेशानी का सामना करना पड़ता है. पिछले दिनों ऐसा ही एक मामला सामने आया. राष्ट्रीय वन-जन श्रमजीवी मंच के वन गूजर नूर जमाल की गिरफ्तारी के विरोध में वन गूजरों और टांगिया गांव की महिलाओं ने बीते 29 जून को सहारनपुर की बेहट तहसील अंतर्गत आने वाले थाना बिहारीगढ़ का घेराव कर पुलिस को उसे बिना शर्त रिहा करने को मजबूर कर दिया.

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भारत-पाकिस्‍तान वार्ताः छोटे कदम बढ़ाए जा सकते हैं

आज भी पाकिस्तान इतिहास की उस घटना, जिसे देश विभाजन कहते हैं, से बाहर नहीं निकल पाया है. पाकिस्तानी मानसिकता आज भी 1947 में ही फंसी हुई है. पाकिस्तान ने हमेशा से भारत विरोध को ही अपने जीवन का सबसे बड़ा और एकमात्र लक्ष्य दिखाने का प्रयास किया है. पाकिस्तान आज भी भारत को एक पड़ोसी देश की तरह न देखकर हिंदू राष्ट्र की तरह देखता है और यही कारण है कि पाकिस्तान आज भी अपने भारत विरोध से निकल नहीं पाया है.

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मध्‍य प्रदेशः वेलस्‍पन कंपनी का कारनामा- देश में कितने और सिंगुर बनेंगे

विकास के नाम पर आ़खिर कब तक किसानों और मज़दूरों को उनके हक़ से वंचित किया जाएगा? सेज, नंदीग्राम, सिंगुर, जैतापुर, फेहरिस्त लंबी है और लगातार लंबी होती जा रही है. इसी क़डी में एक और नाम जु़ड गया है वेलस्पन का. मध्य प्रदेश के कटनी ज़िले में वेलस्पन कंपनी के प्रस्तावित पावर प्लांट की स्थापना हेतु ज़िले की बरही एवं विजयराघवगढ़ तहसीलों के गांव बुजबुजा व डोकरिया के किसानों की लगभग 237.22 हेक्टेयर भूमि का शासन द्वारा अधिग्रहण किए जाने की खबर है.

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मुस्लिम जगत का पुनर्जागरण काल

मध्य पूर्व में गदर करने वाले डटे हुए हैं. ट्यूनीशिया और मिस्र के दो तानाशाहों के ताज अब तक उछाले जा चुके हैं, तख्त गिराए जा चुके हैं. यमन, बहरीन, लीबिया, अल्जीरिया एवं ईरान में हलचल जारी है. रूढ़िवादी मुस्लिम समाज अब पूरी तरह से बदल रहा है.

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कश्मीरियों की व्यथा कब तक अनसुनी की जाएगी

अरुंधति राय के इस वक्तव्य कि कश्मीर भारत का अविभाज्य हिस्सा नहीं है, पर काफी बवाल मचा. भाजपा ने मांग की कि अरुंधति के ख़िला़फ देशद्रोह का मुक़दमा क़ायम किया जाना चाहिए. भाजपा महिला मोर्चा के सदस्यों ने उनके दिल्ली स्थित निवास में तोड़फोड़ की और बजरंग दल ने उन्हें कई तरह की धमकियां दीं.

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सरकार प्रॉपर्टी डीलर बन गई है

विरोध के बदले गोली. बच्चे, बूढ़े, जवान, महिलाएं यानी समाज का हर तबका लाठी-डंडों के साथ एक साथ खड़ा था. किसान आंदोलन की यह आग आगरा, मथुरा और अलीगढ़ के रास्ते पूरे पश्चिमी उत्तर प्रदेश में फैल गई. किसानों के इस उग्र विरोध के पीछे सरकार का अक्खड़ रवैया है, जो 10,000 करोड़ रुपये के यमुना एक्सप्रेस-वे प्रोजेक्ट के लिए उनकी ज़मीनों को औने-पौने दामों पर अधिग्रहीत करना चाहती है, लेकिन यह तो केवल शुरुआत है.

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कश्‍मीर: कैसे रूके अंतहीन हिंसा का सिलसिला?

कश्मीर में जारी विवाद का कोई अंत नज़र नहीं आ रहा है. हमारे सशस्त्र बल, विशेषकर सीआरपीएफ समस्या को बढ़ा रहे हैं. दुर्भाग्यवश, कश्मीर समस्या को आज भी केवल क़ानून और व्यवस्था की समस्या माना जा रहा है. आम लोगों की महत्वाकांक्षाओं, उनके सपनों और उनकी समस्याओं पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है.

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एक हरी चाय की प्याली हो…

अब आप बेड टी के तौर पर हरी चाय का इस्तेमाल कर सकते हैं, क्योंकि इससे आंखों से संबंधित बीमारियों को ठीक किया जा सकता है. यह हमारा नहीं, बल्कि वैज्ञानिकों का कहना है. तो फिर देर किस बात की, आप भी हरी चाय की प्याली को अपनी आदतों में शुमार कीजिए. शोध के मुताबिक़, हरी चाय ग्लूकोमा और आंखों की बीमारियों के लिए काफी फायदेमंद हो सकती है.

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